जीते कोई जमानत सबकी जाएगी!

दक्षिण गुजरात चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के उप प्रमुख पद के लिए रविवार को होने वाले चुनाव कई मायनों में अभूतपूर्व हैं। एक प्रत्याशी के

By: मुकेश शर्मा

Published: 25 Apr 2018, 10:54 PM IST

सूरत।दक्षिण गुजरात चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के उप प्रमुख पद के लिए रविवार को होने वाले चुनाव कई मायनों में अभूतपूर्व हैं। एक प्रत्याशी के मतदान से ऐन पहले नाम वापसी से बैलेट पेपर पर छह नाम के बावजूद चुनाव पांच प्रत्याशियों के बीच होगा। यह पहला मौका है जब चैम्बर में उप प्रमुख पद के लिए दो से अधिक प्रत्याशियों के बीच चुनाव होगा। बड़ी बात यह कि इस बात की आशंका प्रबल हो गई है कि प्रत्याशी की जीत के बावजूद जमानत जब्त हो जाए। यदि ऐसा हुआ तो यह खुद में अनोखी घटना होगी।

तमाम प्रयासों के बावजूद सहमति नहीं बनने के बाद चैम्बर के उप प्रमुख पद के लिए रविवार को मतदान होगा। आखिरी दौर में मतदान से ठीक एक दिन पहले एक प्रत्याशी सुनील जैन के मैदान छोड़ देने से अब पांच प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। चुनाव की नौबत आने पर आठ हजार से अधिक सदस्यों वाली संस्था में अब तक औसत २५ सौ मतदाता मतदान के लिए आते रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बार तीन हजार मतदाता फैसले पर मुहर लगाने के लिए चैम्बर के नानपुरा स्थित समृद्धि भवन पहुंचेंगे।

जमानत बचाने के लिए प्रत्याशी को कम से कम ३० फीसदी मत मिलना जरूरी है। जिस तरह की स्थितियां बन रही हैं, माना जा रहा है कि जीतने वाले प्रत्याशी को भी ३० फीसदी मत मिलना मुश्किल है। ऐसे में उप प्रमुख का चुनाव जीतने के बावजूद प्रत्याशी को जमानत खोनी पड़ सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह चैम्बर के इतिहास में अभूतपूर्व घटना होगी।

यह हैं प्रत्याशी

मतदान के आखिरी दौर में केतन देसाई, भदे्रश शाह, आशा दवे, जनक पच्चीगर और जगदीश टेकरावाला के बीच मुकाबला होगा। मतदान के बाद रविवार शाम तक परिणाम भी सामने आ जाएंगे।

ना ना करते बन गए ‘नोटा’

चैम्बर में वर्ष २०१८ के उप प्रमुख पद का चुनाव कई बातों के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा। इस बार के चुनाव की एक बड़ी वजह १६ में से एक प्रत्याशी सुनील जैन भी हैं। जब आम सहमति से उप प्रमुख चुनने की कवायद चल रही थी, सुनील जैन को छोड़ अन्य सभी १५ दावेदारों ने अपने सहमति पत्र संबंधित समिति को सौंप दिए थे।

सुनील जैन के सहमत नहीं होने के कारण पहले अन्य सभी १५ प्रत्याशियों और फिर पांच लोगों ने चुनाव लडऩे का निर्णय किया। पहले दिन से नाम वापसी के लिए ना ना करने के बाद आखिरी वक्त में सुनील जैन ने मतदान से ऐन पहले अपनी दावेदारी वापस ले ली। बैलेट में नाम होने के कारण जो भी वोट सुनील जैन के खाते में जाएंगे उन्हें ‘नोटा’ की तरह ट्रीट किया जाएगा। यानी सुनील के हिस्से गए वोट कई लोगों का खेल बिगाड़ेंगे।

भदे्रश के खिलाफ जांच जारी

केतन देसाई, आशा दवे, जनक पच्चीगर और जगदीश टेकरावाला ने भद्रेश शाह पर प्रचार के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने इस बिना पर भद्रेश की दावेदारी को निरस्त करने की मांग की थी। देर रात तक चली बैठक के बाद तय हुआ कि भद्रेश के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की जाएगी। एक माह के भीतर रिपोर्ट आने के बाद इस पर निर्णय होगा। इस बीच रविवार को होने वाले मतदान के बाद भद्रेश चुनाव जीतते हैं तो उनकी जीत का ऐलान नहीं किया जाएगा। रिपोर्ट उनके खिलाफ आने की स्थिति में दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी को विजेता घोषित किया जाएगा।

नकारात्मक प्रचार से पीएम शाह नाराज

चुनाव की स्थिति बनने पर प्रत्याशियों ने वाट्सएप पर जमकर प्रचार किया। इसी बीच एक प्रत्याशी के पक्ष में नकारात्मक प्रचार की शिकायतें भी आईं। खासकर एक प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की दलील इस आधार पर दी गई कि जीएसटी का मसला सुलझाने में चैम्बर विफल रहा है। इससे चैम्बर प्रमुख पीएम शाह ने गहरी नाराजगी जताई। बताया गया कि समिति के समक्ष इस मामले को रखते हुए शाह ने इस्तीफा सौंपने और पुलिस में शिकायत करने तक की बात भी कही। जानकारों के मुताबिक बाद में मामला सुलझा लिया गया है।

पहली बार पांच उम्मीदवार मैदान में

चैम्बर में प्रमुख और उप प्रमुख का चुनाव आमतौर पर आम सहमति से होता रहा है। कभी उप प्रमुख पद के लिए चुनाव की स्थिति बनती भी है तो दो के बीच ही मुकाबला होता आया है। यह पहला मौका है जब पांच लोगों के बीच मतदान की स्थिति बनी है। इस बार मतपत्र में हालांकि छह प्रत्याशियों के नाम होंगे, लेकिन मतगणना पांच के लिए ही होगी।

मुकेश शर्मा Reporting
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