जहां तक वहां नर्क, जहां समर्पण वहां स्वर्ग

दिगम्बर जैन समाज के दशलक्षण पर्व

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 05 Sep 2019, 07:23 PM IST

सूरत. दिगम्बर जैन समाज के दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन बुधवार को मार्दव धर्म के बारे में बताते हुए मुनि पुलकसागर ने बताया कि अपने विचारों की शुद्घि का पर्व पर्युषण है। मनुष्य में सबसे ज्यादा खतरनाक अहंकार होता है। अहंकार के पास आंखे होती है, चलता है, लेकिन पहुंचता नहीं। अहंकार रूपी नेत्रविहीन जीवन जीने वाले कंस, हिरण्यकश्यप, लादेन यहां तक की पाकिस्तान का क्या परिणाम है सब जानते हैं। इस लिए अहंकार से बचने का प्रयास करना चाहिए। विनय के विमान में बैठकर मोक्ष हुआ करता है, अहंकार की कार में बैठकर नहीं। अहंकार से बचना ही उत्तम मार्दव धर्म है। समाज में सभी को एक समान रहना चाहिए। मुनि ने बताया कि जो झुकता है वहीं उठता है और जो अकड़ता है वह अहंकार में जीता है। एक अहंकारी का क्या परिणाम होता है इतिहास गवाह है। दाम्पत्य जीवन में समर्पण का भाव होना चाहिए। पति-पत्नी एक-दूसरे की बातों को लेकर तर्क-वितर्क न करें। जहां तर्क होता है वहां नर्क है और जहां समर्पण है वहीं स्वर्ग हुआ करता है। मनुष्य थोड़ी सी उपलब्धियों पर नाज करने लगते हैं। हमने आकाश से तारे गिरते देखा है। अहंकार भगवान का आहार हुआ करता है।

Dinesh Bhardwaj Reporting
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