आईआरएसडीसी की सलाह का इंतजार

Mukesh Sharma

Publish: Oct, 10 2017 09:52:14 (IST)

Surat, Gujarat, India
आईआरएसडीसी की सलाह का इंतजार

मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) प्रोजेक्ट पर मनपा प्रशासन को इंडियन रेलवे डवलपमेंट कॉरपोरेशन (आईआरएसडीसी) के नए फैसले का इंतजार है। आईआरएसडीसी के

सूरत।मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) प्रोजेक्ट पर मनपा प्रशासन को इंडियन रेलवे डवलपमेंट कॉरपोरेशन (आईआरएसडीसी) के नए फैसले का इंतजार है। आईआरएसडीसी के पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की जगह इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर जाने के निर्णय के बाद पूरा प्रोजेक्ट होल्ड पर है।

मनपा प्रशासन की पहल पर आईआरएसडीसी ने सूरत रेलवे स्टेशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने का निर्णय किया था। गुजरात स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने भी इस निर्णय पर सहमति देते हुए अपने हिस्से की जमीन प्रोजेक्ट के लिए देने का ऐलान किया था। पीपीपी मोड पर आगे बढऩे के लिए सहमति बनने के बाद वर्ष २०१६ में एमओयू भी साइन हो गया था। अचानक २६ सितंबर को आईआरएसडीसी ने ई-मेल भेजकर प्रोजेक्ट ईपीसी मोड पर ले जाने की जानकारी दी।

मनपा प्रशासन ने आईआरएसडीसी से इस संबंध में आगे काम करने के लिए दिशा-निर्देश मांगे हैं। जब तक आईआरएसडीसी से कोई जवाब नहीं आता, एमएमटीएच प्रोजेक्ट होल्ड पर है। जानकारों के मुताबिक एमएमटीएच प्रोजेक्ट के रिव्यू को लेकर होने वाली बैठक में ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।

यह था मूल प्रोजेक्ट


रेलवे स्टेशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब मनपा प्रशासन का ड्रीम प्रोजेक्ट है। रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट सरीखा बनाने के साथ ही ट्रांसपोर्ट एक्टिविटीज को इंटीग्रेट करना इसका मुख्य आकर्षण है। साथ ही एमएमटीएच के ऊपर बिजनस मॉडल तैयार करना था। आईआरएसडीसी, मनपा प्रशासन और जीएसआरटीसी के मुताबिक एक ही जगह ट्रांसपोर्ट के सभी मोड्स की सहूलियत के साथ रेलवे स्टेशन पर आने वाले लोगों को पूरे बाजार और मिनी सिटी का अहसास दिलाने की योजना थी। बड़ा निवेश होने के कारण प्रोजेक्ट पर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में आगे बढऩा तय किया गया। इसमें पूरा प्रोजेक्ट ९० साल के लिए निजी डवलपर को सौंप दिया जाना था। इसके लिए कंसलटेंट की नियुक्ति हो चुकी थी।

यह है ईपीसी

इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एण्ड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड के तहत ठेकेदार फर्म को डिजाइन, कच्चे माल की खरीद, निर्माण, परियोजना की कमीशनिंग और तैयार करने के बाद उसके हस्तांतरण की जिम्मेदारी निभानी होती है। ठेकेदार फर्म संबंधित पक्ष की जरूरतों को देखते हुए उसके अनुरूप ही प्रोजेक्ट की वायबिलिटी देखने के साथ पूरी जिम्मेदारी उठाती है। यह मोड आर्थिक रूप से कम खर्चीला होता है।

फायदे का सौदा है ईपीसी

इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड सरकार के लिए आर्थिक रूप से फायदे का सौदा है। इसमें रेलवे स्टेशन को लेकर आईआरएसडीसी अपनी प्लानिंग और जरूरतें प्राइवेट प्लेयर को बता देगा। प्राइवेट प्लेयर को उसी आधार पर प्रोजेक्ट की कंसलटेंसी, डिजाइन और वर्कप्लान देना होगा। पीपीपी मोड में प्राइवेट पार्टनर को निवेश भी करना पड़ता है, जबकि ईपीसी में सरकार को निर्माण पर रकम खर्च करनी होगी। भविष्य की प्लानिंग को देखते हुए पीपीपी मोड की जगह ईपीसी ज्यादा बेहतर है। तत्कालीन मनपा आयुक्त मिलिंद तोरवणे ने भी ईपीसी मोड का सुझाव दिया था, लेकिन पीपीपी के आकर्षण में उस
वक्त इसे दरकिनार कर दिया गया था। नए बदलाव के साथ यह निर्णय सूरत समेत देशभर के १५ स्टेशनों के प्रोजेक्ट्स पर असर डालेगा।

 

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