बैंक ऑफ बड़ौदा के पांच करोड़ से अधिक के ऋण घोटाले में दो की अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर

अलग अलग 21 फर्जी फर्म बनाकर लिया था ऋण और सरकारी सबसिडी का लाभ

By: Sandip Kumar N Pateel

Updated: 19 Oct 2020, 08:17 PM IST

सूरत. बैंक ऑफ बड़ौदा की डूमस शाखा में सामने आए पांच ककरोड़ रुपए से अधिक के ऋण घोटाले में आरोपित दो महिला अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को सेशन कोर्ट ने नामंजूर कर दी।

सीआइडी क्राइम थाने में 29 सितम्बर को कुल 26 जनों को नामजद करते हुए पांच करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज बनाने का मामला दर्ज किया गया था। आरोप के मुताबिक 26 अभियुक्तों ने मिलकर अलग अलग 21 फर्म बनाए और मशनरी तथा व्यवसाय के लिए रुपयों की जरूरत होने का कारण दर्शाकर बैंक ऑफ बड़ौदा की डूमस शाखा में ऋण के लिए आवेदन किया। अभियुक्तों ने सरकारी सबसिडी का लाभ लेने के लिए फर्जी टीन नंबर तथा जीएसटी नंबर भी दर्शाए थे। फर्जी दस्तावेज के आधार पर वर्ष 2016 में ऋण लेने के बाद अभियुक्तों ने किस्ते भरना बंद कर दिया। करीब पांच करोड़ से अधिक के ऋण घोटाले का बैंक के आला अधिकारियों को पता चलने पर उन्होंने सीआइडी क्राइम में शिकायत दर्ज करवाई। सीआइडी क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर 26 में से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। फरार अभियुक्तों में से कतारगाम कराडा रोड राजहंस पार्क निवासी अभियुक्त गीता सुरेश मीयाणी और पीनल भरत मेरूलिया ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर की थी। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोकअभियोजक किशोर रेवलिया ने दलीलें पेश की। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने लोकअभियोजक की दलीलें, अभियुक्तों की अपराध में भूमिका और जांच अधिकारी के हलफनामे को ध्यान में रखते हुए याचिकाएं नामंजूर कर दी।

Sandip Kumar N Pateel Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned