BJP GUJARAT NEWS: एक बार फिर भाजपा का अप्रत्याशित निर्णय

जिस वजह से गुजरात को भाजपा की प्रयोगशाला कहा जाता है वो एक बार फिर रविवार को पार्टी के सामान्य से कार्यकर्ता भूपेंद्र पटेल को प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने के निर्णय के साथ सार्थक साबित

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 13 Sep 2021, 10:07 AM IST

सूरत. जिस वजह से गुजरात को भाजपा की प्रयोगशाला कहा जाता है वो एक बार फिर रविवार को पार्टी के सामान्य से कार्यकर्ता भूपेंद्र पटेल को प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने के निर्णय के साथ सार्थक साबित हो गई है। इससे पहले 2001 में नरेंद्र मोदी और 2016 में विजय रुपाणी के नाम इसी तरह से गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अप्रत्याशित रूप से सामने आ चुके है।
शनिवार को विजय रुपाणी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ ही देशभर में भाजपा की प्रयोगशाला गुजरात के नए मुख्यमंत्री के जाने-अनजाने नामों पर चर्चा छि? गई थी। प्रदेश की राजनीति के जानकार भाजपा की इस अप्रत्याशित निर्णयों की शैली से भी अनभिज्ञ नही थे, तभी तो प्रफुल्ल पटेल जैसे अनजाना नाम भी तेजी से नए मुख्यमंत्री के पद की रेस वाली सूची में शामिल हो गया था। लेकिन, रविवार को विधायक दल की बैठक में बेहद अप्रत्याशित तरीके से भाजपा संगठन ने गुजरात के नए मुख्यमंत्री के लिए अहमदाबाद की घाटलोडिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक भूपेंद्र पटेल के नाम की घोषणा कर राजनीतिक पंडितों के अनुमान को भी फेल कर दिया। भूपेंद्र पटेल का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित होते ही अब नई चर्चा अपेक्षा और उपेक्षा की भी छि? गई है, हालांकि वह फिलहाल नए मंत्रिमंडल की घोषणा होने तक दबी जुबान पर ही सीमित है। इसमें भी खास भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल दक्षिण गुजरात को 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कितना प्रतिनिधित्व दिलाने में सफल रहा पाते है ही अधिक है। प्रदेश के नए मंत्रिमंडल में सौराष्ट्र और सूरत समेत दक्षिण गुजरात को साधने की नीति पर भी सबकी नजरें टिकी है। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर गुजरात के नए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का नाम घोषित होने के साथ ही तरह-तरह की चर्चा ने भी जन्म ले लिया है। इसमें कोई चुटकी लेते हुए लिख रहा है कि अहमदाबाद की घाटलोडिया विधानसभा के लोगों को भी अब पता चल रहा है कि उनके विधायक भूपेंद्र पटेल है तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा खूब गरम है कि यह भाजपा में ही सम्भव है जहां साधारण कार्यकर्ता को भी राज्य की बागडोर सौंपी जा सकती है, दूसरे राजनीतिक दलों में यह कदापि सम्भव नही है।

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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