BJP NEWS: पेज समिति अभियान पश्चिम बंगाल में खिलाएगा कमल!

सुनिश्चित जीत का मार्ग प्रशस्त करने में काफी अहम है पेज समिति अभियान, गुजरातभर में जोरों पर चल रहा है अभियान, आसन्न स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए अभियान के तहत 75 लाख सदस्य जोडऩे का लक्ष्य पार्टी ने रखा

 

By: Dinesh Bhardwaj

Updated: 12 Jan 2021, 05:40 PM IST

सूरत. भाजपा का गुजरात फार्मूला भी कमाल है जब तक प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल इसे भली-भांति समझ पाते हैं तब तक गुजरात फार्मूले का पैंतरा ही बदल जाता है। पहले वन बूथ टेन यूथ, बूथ माइक्रो प्लानिंग, पन्ना प्रमुख और अब पेज समिति अभियान के नए पैंतरे से भाजपा पश्चिम बंगाल में कमल खिलाने की तैयारियों में व्यस्त होने लगी है।
भाजपा के लिए बेहद अहम और गंभीर गिने जा रहे राज्य पश्चिम बंगाल में यूं तो पार्टी 17वें लोकसभा चुनाव के पहले से ही विधानसभा में कब्जा जमाने की तैयारियों में लगी हुई है और इन तैयारियों में लोकसभा चुनाव के परिणामों ने और अधिक तेजी तब ला दी जब वहां भाजपा ने 42 लोकसभा सीट में से 18 पर कब्जा जमा लिया। हालांकि इससे पूर्व 2016 में सम्पन्न हुए राज्य के विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास 294 विधानसभा सीट में से मात्र 3 सीट ही हैं। गत लोकसभा चुनाव में 40 प्रतिशत वोट शेयर और पश्चिम बंगाल की 148 विधानसभा सीटों पर बढ़त की बदौलत भाजपा संभावित मार्च-अप्रेल में होने वाले राज्य के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत के प्रति आशान्वित है। इतना ही नहीं पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तो बंगाल में मिशन 200 भी छेड़ रखा है और कई राष्ट्रीय नेता इसमें लम्बे समय से जी-जान से लगे हैं। लेकिन, पश्चिम बंगाल में तीन सीट से सत्ता तक पहुंचने के लिए 148 सीट की जरूरत पड़ेगी और इसमें भाजपा अपनी तरफ से पूरा दमखम लगाने के अलावा अब गुजरात फार्मूले को ब्रह्मास्त्र के रूप में प्रयोग करने की तैयारियों में लग गई है।


-मिशन 200 भी हो सकता है पूरा


गुजरात फार्मूले के रूप में बेहद सफल पेज समिति अभियान पश्चिम बंगाल में मिशन 200 को भी पूरा करने में सक्षम बन सकता है। भाजपा का मानना है कि हाल ही में गुजरात की आठ विधानसभा के उपचुनाव में पार्टी ने इस फार्मूले को अपनाया और कांग्रेस के कब्जे वाली सभी सीटों पर जीत हासिल की। इनमें डांग विधानसभा के चुनाव परिणाम तो बेहद ही चौंकाने वाले साबित हुए, यहां पर गत चुनाव में भाजपा को 65-70 हजार कुल मत मिलते थे और उपचुनाव में 67 हजार से अधिक मतों के अंतर से पार्टी जीती। यह पेज समिति फार्मूले का ही कमाल था। इन दिनों गुजरातभर में पेज समिति अभियान जोर-शोर से चल रहा है। आसन्न स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए अभियान के तहत 75 लाख सदस्य जोडऩे का लक्ष्य पार्टी ने रखा है।


-राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा को भी भाया


गत दिनों ही गांधीनगर आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी पेज समिति अभियान का फार्मूला खूब भाया है और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में इस फार्मूले को अपनाए जाने पर जोर दिया। हाल ही में सूरत आई दो महिला केंद्रीय मंत्री देबाश्री चौधरी व स्मृति ईरानी भी पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद गुजरात की तर्ज पर विकास के रास्ते खुल जाने के इशारे कर गई है। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी खुलकर अपनी राय में बता चुके हैं कि बूथ कार्यकर्ता की जिम्मेदारी बढ़ेगी और वह कम से कम 10 परिवारों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाकर बूथ में पार्टी की ताकत बढ़ाएगा और मजबूत सरकार के फायदे लोगों को बताएगा।

-ऐसा है पेज समिति का फार्मूला


गुजरात भाजपा के नए अध्यक्ष सीआर पाटिल ने इस फार्मूले को इजाद किया है और इसी फार्मूले ने उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में बड़े अंतर से जीत दिलवाई थी और 2019 के लोकसभा चुनाव में तो वे देशभर में सर्वाधिक 6 लाख 89 हजार मतों के अंतर से जीते। पेज समिति के फार्मूले में प्रत्येक मतदान केंद्र पर 30-30 मतदाताओं की 30 अथवा इससे अधिक पेज समितियां बनाई जाती है। एक पेज समिति के प्रमुख व तीन अन्य सहयोगी इसमें सक्रिय भूमिका में रहते हैं और चुनाव में सुबह नौ बजे तक यह चारों कार्यकर्ता अपने परिवार के सदस्यों के साथ 16 मत पार्टी के खाते में डलवा देते हैं और उसके बाद दिनभर अन्य मतों को पार्टी पक्ष में खींचने का प्रयास करते हैं। अधिकांश बूथ पर 70 फीसद वोट डाले जाते हैं और इस लिहाज से भाजपा उक्त बूथ पर सुबह नौ बजे ही जीत हासिल कर लेती है और दिनभर में जो भी वोट पार्टी पक्ष में पड़ते हैं वे मार्जिन वोट बन जाते हैं।

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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