अनलॉक में जमकर हुई रेलवे ई-टिकटों की कालाबाजारी

- प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर से टिकट बनाने के 25 केस दर्ज...

- 315 गिरफ्तार, डेढ़ करोड़ की टिकटें बरामद

- पश्चिम रेलवे में जुलाई से सितम्बर के बीच 298 मामले दर्ज

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 16 Oct 2020, 11:14 PM IST

सूरत.

कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुई राजधानी और नॉन एसी स्पेशल ट्रेनों में कन्फर्म टिकट दिलवाने वाले अनाधिकृत दलाल बड़ी संख्या में सक्रिय हैं। पश्चिम रेलवे में रेलवे सुरक्षा बल ने अनलॉक में रेलवे ई-टिकटों की काला बाजारी करने वाले 298 केस दर्ज कर 315 दलालों को गिरफ्तार किया है। अगर सूरत की बात करें तो सिर्फ रेलवे सुरक्षा बल की क्राइम ब्रांच ने ही 38 मामले दर्ज किए हैं।

कोरोना के चलते भारतीय रेलवे की नियमित ट्रेनें बंद हैं। मई में श्रमिक एक्सप्रेस का संचालन शुरू किया गया था। इसके बाद राजधानी और नॉन एसी स्पेशल ट्रेनें भी एक के बाद एक शुरू हो रही है। फिलहाल भारतीय रेलवे करीब 400 स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर रही है। इसके साथ ही 15 अक्टूबर से अन्य कुछ स्पेशल ट्रेनें भी शुरू की जा रही है। इन सभी स्पेशल ट्रेनों की बुकिंग ऑनलाइन या नामित आरक्षण केन्द्रों से हो रही है, लेकिन बुकिंग शुरू होते ही अनाधिकृत दलाल प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर की मदद से ज्यादातर टिकटें बुक कर लेते हैं। वहीं, आम यात्रियों को वेटिंग टिकट मिलता है। मजबूरी में यात्री ई-टिकट बनाने वाले दलालों का सम्पर्क करते हैं, जो प्रति टिकट 200 से 500 रुपए वसूलते हैं।
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी सुमित ठाकुर ने बताया कि पिछले साल जुलाई से सितम्बर तक ई-टिकटों की काला बाजारी करने वालों के खिलाफ 146 मामले दर्ज कर 171 दलालों को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से 50.16 लाख रु. के 2099 टिकट जब्त किए गए थे, लेकिन अनलॉक के दौरान ट्रेनों की संख्या कम होने के कारण दलालों ने यात्रियों से खुब कमाई की है।

रेलवे सुरक्षा बल ने जुलाई, अगस्त और सितम्बर में 298 केस दर्ज कर 315 दलालों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 87 लाख रुपए के ई - टिकट जब्त किए गए। मुम्बई मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त विनीत खर्ब ने बताया कि सूरत में 23 केस दर्ज कर 25 दलालों को गिरफ्तार किया गया है। दूसरी तरफ रेलवे सुरक्षा बल की क्राइम ब्रांच ने जुलाई में 11 केस दर्ज कर 2.86 लाख रु के 225 ई टिकट बरामद किए है। इसी तरह अगस्त में 7 केस दर्ज कर 2.28 लाख रुपए के 135 ई-टिकट बरामद किया है। सितम्बर में सबसे अधिक 20 केस दर्ज कर 5.57 लाख रु के 1513 ई-टिकट जब्त किए गए है।
गौरतलब है कि, 15 अक्टूबर से त्यौहार स्पेशल के नाम से डेढ़ दर्जन से अधिक ट्रेनें शुरू की गई है। दीपावली में गांव जाने वाले दूसरे राज्य के प्रवासी लोगों को मुश्किल से कन्फर्म टिकट मिलता है। ऐसे में यात्री बड़ी संख्या में दलालों से सम्पर्क कर ई टिकट बनवाने के लिए प्रयासरत है।


सॉफ्टवेयर नेटवर्क का पर्दाफाश

मुम्बई मंडल के सुरक्षा आयुक्त पवन श्रीवास्तव को मुखबिरों से एक सॉफ्टवेयर और लोग दुरुपयोग ना करें इसलिए यहां नाम नहीं दिया जा रहा है) से ई-टिकट बुकिंग की जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने रेलवे सुरक्षा बल के डिटेक्टिव विंग, क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और डिवीजनों में विशेष टीमों का गठन किया गया था। इसमें कई फर्जी आईडी का उपयोग कर टिकटों की अवैध बुकिंग की थी। जिनमें कुछ अधिकृत आइआरसीटीसी के एजेंट भी शामिल हैं। यह सभी फर्जी आईडी का उपयोग करते हैं और अनाधिकृत सॉफ़्टवेयर का उपयोग कर यात्रियों से अतिरिक्त पैसे वसूलते हैं। सॉफ्टवेयर के नेटवर्क के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने 25 से अधिक केस दर्ज किए। जिसमें करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के टिकट बरामद हुए है।


ऐसे करते थे ई-टिकटों की बुकिंग

सूरत में जनवरी में एएनएमएस और फरवरी में एक सॉफ्टवेयर का उपयोग कर ई-टिकटों की बुकिंग करवाने का खुलासा हुआ था। कोरोना की रोकथाम के लिए नियमित ट्रेनें बंद हो गई। इसके बाद जब ट्रेनें शुरू की गई तो ऑनलाइन ई टिकट बुकिंग के फॉर्मेट में बदलाव किया गया। अब यात्रियों को जाने वाले स्थल का पूरा पता पिनकोड के साथ फार्म में भरना होता है। प्री-इंफोर्मेशन को आसानी से ऑटो फील करने के लिए अपडेटेड एक सॉफ्टवेयर बना था। इस सॉफ्टवेयर से सेकंडों में कई टिकटें बुक होती थी। रेलवे सुरक्षा बल क्राइम ब्रांच ने अगस्त में मुख्य आरोपी को पकड़ा। इसके बाद उनके एडमिन और उसके नीचे काम करने वाले दलालों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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