Special Train : क्लोन ट्रेनों में वापसी के फेरे मिनटों में हुए बुक

- छपरा से सूरत आने वाली क्लोन ट्रेन में नो रूम

- पटना, दरभंगा, दिल्ली से अहमदाबाद स्पेशल में लम्बी वेटिंग

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 20 Sep 2020, 10:38 PM IST

सूरत.

पश्चिम रेलवे में सूरत और बान्द्रा से एक- एक और अहमदाबाद से तीन क्लोन स्पेशल ट्रेनों का परिचालन 21 सितम्बर से शुरू होना है। इन ट्रेनों की बुकिंग शनिवार को शुरू हुई और वापसी की ट्रेनों में कुछ मिनटों में ही सीटें फुल हो गई। छपरा से सूरत के बीच चलने वाली ताप्ती गंगा क्लोन स्पेशल में वेटिंग भी रिग्रेट, नो रूम आ गया है। यही स्थिति पटना, दरभंगा और दिल्ली से अहमदाबाद के बीच तथा अमृतसर-बान्द्रा पश्चिम क्लोन स्पेशल ट्रेनों की भी है।

कोरोना की रोकथाम के लिए नियमित ट्रेनें मार्च से बंद है। मई में 230 स्पेशल ट्रेनों के बाद रेलवे ने 86 अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें शुरू की है। अब 21 सितम्बर से 20 जोड़ी (40 ट्रेन) क्लोन स्पेशल ट्रेनों को चलाने का निर्णय किया है। पश्चिम रेलवे से पांच जोड़ी ट्रेनों की बुकिंग 19 सितम्बर, शनिवार से शुरू हुई जो वापसी के फेरों में मिनटों में ही फुल हो गई। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि 09065 सूरत-छपरा ताप्ती गंगा क्लोन स्पेशल में 21 सितम्बर 138 वेटिंग, 28 सितम्बर 165 वेटिंग है। 09066 वहीं, छपरा- सूरत ताप्ती गंगा क्लोन स्पेशल में वापसी के फेरे में 23 सितम्बर को नो रूम है, मतलब वेटिंग टिकट भी नहीं है। इसी रूट पर 09046 छपरा-सूरत ताप्ती गंगा स्पेशल में 20 सितम्बर को 133 वेटिंग, 22 सितम्बर को 164 वेटिंग, 23 सितम्बर को 237 वेटिंग, 25 सितम्बर को 144 वेटिंग है।

दूसरी ट्रेन 09052 मुजफ्फरपुर-वलसाड एक्सप्रेस में 21 सितम्बर को 150, 28 सितम्बर को 145, 5 अक्टूबर को 70, 12 अक्टूबर को 48, 26 अक्टूबर को 13 वेटिंग है। 09025 बान्द्रा-अमृतसर पश्चिम क्लोन स्पेशल में बुकिंग के लिए कोई मारामारी नहीं दिखाई दी। इस ट्रेन में 21 सितम्बर को स्लीपर क्लास में 100 और 28 सितम्बर को 117 सीटें रिक्त है। लेकिन 09026 अमृतसर-बान्द्रा क्लोन स्पेशल के वापसी फेरे में 23 सितम्बर को बुकिंग शुरू होते ही 90 वेटिंग पहुंच गया। इसी रूट पर पहले से चल रही 02904 अमृतसर-मुम्बई गोल्डन टेम्पल स्पेशल के द्वितीय श्रेणी में 60 से 175 वेटिंग और तृतीय एसी में 13 से 53 वेटिंग टिकट मिल रहा है।

दूसरी ट्रेन 02926 अमृतसर-बान्द्रा पश्चिम स्पेशल में द्वितीय श्रेणी में 83 से 159 वेटिंग और तृतीय एसी में 26 से 42 वेटिंग है। अहमदाबाद-पटना क्लोन स्पेशल 09477 में 23 सितम्बर को 125 सीटें रिक्त है। लेकिन 09448 पटान-अहमदाबाद क्लोन स्पेशल के पहले फेरे 25 सितम्बर को 264 वेटिंग आ गया। तृतीय एसी श्रेणी में 98 वेटिंग है। 09466 दरभंगा-अहमदाबाद क्लोन स्पेशल में स्लीपर श्रेणी में 300 से अधिक और तृतीय एसी में 60 से अधिक वेटिंग है। वहीं 09465 अहमदाबाद-दरभंगा क्लोन स्पेशल में 142 सीटें रिक्त है।


जबकि 09415 अहमदाबाद-दिल्ली क्लोन स्पेशल के स्लीपर श्रेणी में 23 सितम्बर को 100, 27 सितम्बर को 147 सीटें रिक्त है। गौरतलब है कि लॉकडाउन में बंद हो गए उद्योगों को शुरू करने के लिए दूसरे राज्य के लोग बड़ी संख्या में शहरों की तरफ आना चाहते हैं, लेकिन पर्याप्त ट्रेनें नहीं होने के कारण चल रही स्पेशल ट्रेनों तथा क्लोन ट्रेनों के वापसी के फेरे में वेटिंग टिकटों की सूची भी काफी लम्बी है।

कोरोना जांच के बाद ही शहर में प्रवेश

मनपा स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस अड्डे और हाइवे के मुख्य रास्तों पर मेडिकल टीमें तैनात कर रखी है। पिछले कुछ दिनों में सूरत स्टेशन आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ी है। मनपा आयुक्त ने भी यात्रियों को जांच के बाद ही शहरी क्षेत्र में प्रवेश देने के निर्देश दिए थे। वहीं रेलवे सुरक्षा जवानों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने के लिए कहा गया है। लॉकडाउन के समय प्रवासी श्रमिक अपने गृहनगर जाने के लिए लाइन लगाते दिखाई देते थे। अभी स्टेशनों पर उसी तरह का नजारा देखने को मिलता है। लेकिन यह यात्री दूसरे राज्य से सूरत में रोजगार के लिए आने वाले श्रमिक है। रोजाना करीब 7 से 9 हजार लोग सूरत स्टेशन पर विभिन्न ट्रेनों से आते है।

उद्योगों को मिल रहा श्रमिकों का ऑक्सीजन

फैडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स एसोसिएशन के प्रमुख अशोक जीरावाला ने कहा कि ट्रेनों की संख्या बढऩे से सूरत के उद्योगों को श्रमिकों का ऑक्सीजन मिलना शुरू हो गया है। ओडिसा से तीन और उत्तरप्रदेश से चार-पांच ट्रेनें गुजरात के लिए चल रही है। लेकिन ट्रेनों की संख्या और बढ़ाने की आवश्यकता है। उत्तरप्रदेश, बिहार, ओडिसा से स्पेशल ट्रेन में श्रमिकों को लाने की पहल की जा रही है। कोरोना जांच के लिए रेलवे स्टेशन पर मनपा स्वास्थ्य विभाग की टीम है। वहां भी यात्रियों की जांच बढ़ाने के लिए मेडिकल टीम और टेबलों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। हाल में श्रमिकों के आने की संख्या बहुत कम है और इसे बढ़ाने के लिए प्रयास करना जरुरी है। सूरत के कल-कारखानों को पटरी पर आने में तीन से चार माह का समय लगेगा।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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