दर्जनों मार्केट में बिल्डर जमाए बैठे हैं कब्जा

रघुकुल टैक्सटाइल मार्केट के व्यापारियों का संघर्ष कई माह से जारी, फोस्टा समेत अन्य व्यापारिक संगठनों की प्रत्येक गतिविधि पर है नजर

 

सूरत. अब भला कोई अपनी जमी-जमाई दुकान कैसे छोड़ सकता है, फिर उसके लिए कुछ भी क्यों नहीं करना पड़े। अभी कुछ ऐसा ही हाल रिंगरोड पर कपड़ा बाजार के रघुकुल टैक्सटाइल मार्केट में बना हुआ है। यहां दो दशक पहले मार्केट इमारत बनाकर सैकड़ों कपड़ा व्यापारियों को दुकानें बेचने वाले बिल्डर का मोह मार्केट संचालन से नहीं छूटा है। इसके पीछे व्यापारियों की नवगठित सोसायटी बड़े लालच को कारण मानते है और बताते हैं कि अब वे अपना अधिकार किसी भी हाल में दूसरे के भरोसे नहीं छोड़ेंगे। हालांकि रिंगरोड पर रघुकुल ऐसा अकेला मार्केट नहीं जहां बिल्डर संचालन प्रक्रिया से जुड़े है बल्कि ऐसे कई मार्केट है।
गतवर्ष जुलाई-अगस्त से ही कपड़ा कारोबार की ब्रांडेड फर्मों के मार्केट के रूप में माने जाते रघुकुल टैक्सटाइल मार्केट में व्यापारी वर्सेज बिल्डर चला आ रहा है। गत सात माह के दौरान मार्केट के एक हजार करीब कपड़ा व्यापारियों ने एकजुट होकर अपने व्यापारिक घर ‘रघुकुल’ को स्वयं संवारने-सुधारने का दृढ़निश्चय किया और जमी-जमाई दुकान के रूप में बिल्डर से संचालन गतिविधि लेने के उद्देश्य से जिला रजिस्ट्रार सहकारी मंडली में वैधानिक तरीके से सोसायटी का गठन किया। बिल्डर के साथ लम्बे समय से संघर्ष कर रही रघुकुल टैक्सटाइल मार्केट के व्यापारियों की सोसायटी भी मानती है कि संघर्ष थोड़ा और लम्बा चल सकता है लेकिन, वे अब पीछे नहीं हटेंगे। सोसायटी ने यह भी बताया कि रघुकुल मार्केट में व्यापारिक एकता की जीत जिस दिन होगी, उसी दिन से कहीं अन्य टैक्सटाइल मार्केट में भी व्यापारी अपने अधिकार के लिए एकजुट होकर सामने आएंगे।


अभी तक यह परिवर्तन


रघुकुल टैक्सटाइल मार्केट में कपड़ा व्यापारियों की सोसायटी के गठन के बाद बिल्डर की ओर से मार्केट संचालन प्रक्रिया बंद हो गई हालांकि अभी भी मार्केट में सिक्युरिटी, सफाई आदि में पहले के नियुक्त कर्मचारी कार्यरत है। सोसायटी ने नई एजेंसी को कार्य सौंपा है जो कि नए-पुराने कर्मचारियों के साथ संचालन कर रहे है। मार्केट मेंटनेंस की देखरेख में भी नए स्टाफ को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा मार्केट के ही पार्किंग परिसर में बने गोदाम में वाहन पार्किंग की व्यवस्था शुरू किए जाने से मार्केट में मालवाहक वाहनों के आने-जाने में सुगमता बन गई है।


रिंगरोड पर ही कई टैक्सटाइल मार्केट


रघुकुल टैक्सटाइल मार्केट पर से बिल्डर का कब्जा हटाने के लिए संघर्षरत कपड़ा व्यापारियों ने अन्य टैक्सटाइल मार्केट के व्यापारियों में भी दम भरने जैसा कार्य कर दिया है। रिंगरोड पर ही कई मार्केट है जहां बिल्डर अपना कब्जा जमाए बैठे है। इसमें सवा तीन हजार दुकानों वाला मिलेनियम टैक्सटाइल मार्केट, कोहिनूर टैक्सटाइल मार्केट, कोहिनूर टैक्सटाइल हाउस, अन्नपूर्णा टैक्सटाइल मार्केट, सोमेश्वर टैक्सटाइल मार्केट, यूनिवर्सल टैक्सटाइल मार्केट, एकता टैक्सटाइल मार्केट, रीजेंट टैक्सटाइल मार्केट, राठी पैलेस समेत अन्य शामिल है। यहां की संचालन गतिविधि से कपड़ा व्यापारी दूर है।


इन्हें मानते हैं जिम्मेदार वजह


मार्केट इमारत बनने के बाद शुरुआती दौर में संचालन प्रक्रिया बिल्डर के हाथों में इसलिए रहती है कि मार्केट परिसर में बहुत सारे कार्य अधूरे होते हैं जिन्हें उन्हें पूरे करने होते है और इसी दौरान मेंटनेंस राशि एकत्र होना भी शुरू हो जाती है। बस यहीं सबसे बड़ा कारण होता है जिसकी वजह से अधिकांश बिल्डर मार्केट इमारत से अपने साये को दूर नहीं करना चाहते। बड़ी मात्रा में मेंटनेंस राशि के अलावा आय के अन्य ोत में पार्किंग, विज्ञापन होर्डिंग्स, ट्रांसफर फीस, पानी, वेस्टेज संग्रह आदि भी शामिल होते है। मार्केट इमारत में बिल्डर के हाथ से संचालन प्रक्रिया जाते ही यह सब आय के जरिए भी बंद हो जाते है।


सदैव व्यापारियों के साथ


कपड़ा बाजार के हजारों व्यापारियों का संगठन फैडरेशन ऑफ सूरत टैक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन व्यापारिक हित में सदैव साथ है। रघुकुल टैक्सटाइल मार्केट की प्रत्येक गतिविधि पर फोस्टा की नजर है और जीत आखिर सत्य की ही होगी।
मनोज अग्रवाल, अध्यक्ष, फैडरेशन ऑफ सूरत टैक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन।

Dinesh Bhardwaj Reporting
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