बुलेट ट्रेन के सर्वे का विरोध

कंपनी अधिकारियों के साथ किसानों की बैठक

By: विनीत शर्मा

Published: 10 Feb 2018, 09:15 PM IST

नवसारी. बुलट ट्रेन के प्रस्तावित रूट को लेकर 28 गांंवों के किसानों में रोष देखा जा रहा है। शनिवार को गणेश सिसोद्रा गांव में हुई किसानों की बैठक में लोगों ने जमीन संपादन से पहले इस प्रोजेक्ट के लिए ठोस पॉलिसी बनाने और किसानों को जमीन का मुआवजा बाजार कीमत से चार गुना अधिक देने की मांग की।


अहमदाबाद से मुबई तक चलने वाली बुलेट ट्रेन नवसारी के 28 गांवों से होकर पसार होगी। जिसके अंतर्गत नवसारी में भी संभावित मार्ग के लिए निजी कंपनी ने सर्वे शुरु किया है। बताया गया है कि गुजरात में 320 किमी क्षेत्र में बुलेट ट्रेन की पटरियां लगाई जाएंगी, जिन पर बुलेट ट्रेन नवसारी जिले के 28 गांवों से 48 किमी का रास्ता तय करेगी। इस प्रोजेक्ट के तहत जिले में जमीन संपादन से पहले सर्वे शुरु किया गया है। यह काम निजी कंपनी के करने से जिले के किसान नाराज हैं।


शनिवार को सिसोद्रा कुमार शाला में किसानों की बैठक हुई, जिसमें नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड वडोदरा जोन के प्रबंधक मंजूनाथ मौजूद रहे। बैठक में किसानों ने अपनी समस्याएं व सुझावों से उन्हें अवगत कराया। किसानों ने कहा कि उनके सुझावों पर राज्य सरकार को अमल करना होगा। किसानों ने कहा कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट कॉमर्शियल है और इसमें किसानों की भी साझेदारी मिलनी चाहिए। बैठक में किसानों ने जमीन का 50 प्रतिशत मुआवजा चेक और 50 प्रतिशत शेयर की मांग भी रखी। किसानों ने कहा कि उन्हें नियमानुसार जमीन का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए।


वर्तमान में प्रति बीघा जमीन का दाम 60 लाख से लेकर 1.50 करोड़ चल रहाहै। किसानों ने प्रोजेक्ट लाइन में आने वाली हाईटेन्शन लाइन को जेटक कंपनी द्वारा भूमिगत करने, इसके लिए जिन किसानों की जमीन ली जाए उन्हें इसका भी मुआवजा की मांग प्रमुख रही। इसके अलावा किसानो ने कहा कि जिन गांवों से बुलेट ट्रेन पसार होगी वहां दूसरी जमीनों को एनए करवाने के लिए एनएचएसआरसीएल से एनओसी नहीं लेने का आश्वासन भी राजस्व विभाग से चाहिए।


इसके अलावा लोगों ने बुलेट ट्रेन का स्टेशन बिलीमोरा से हटाकर सिसोद्रा में बनाने, बिलीमोरा में रोजगार की समस्या न उत्पन्न होने देने का आश्वासन भी मांगा। किसानों ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधि को साथ रखकर एक सप्ताह में राजस्व मंत्री व सचिव किसानों के साथ बैठक कर मुआवजे का नियम तय करें। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी नहीं सुनी गई तो सर्वे का उग्र विरोध किया जाएगा। बैठक में मौजूद मंजूनाथ ने कहा कि कलक्टर से बैठक कर वे उनकी मांग संबंधित विभाग तक पहुंचाएंगे।


मेट्रो की तर्ज पर होगा प्रोजेक्ट


बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मेट्रो की तर्ज पर होगा। बुलेट ट्रेन का ट्रेक समुद्री सतह से 11 मीटर की ऊंचाई पर रेगा और उस पर ट्रेन दौड़ेगी। इसके लिए ट्रेक के लिए 17.5 मीटर जमीन संपादित होगी। इसमें 13.5 मीटर ट्रैक के लिए और चार मीटर का समानांतर रास्ता रहेगा। स्टेशनों के लिए 33.5 मीटर जमीन संपादित होगी। जमीन से ऊंचाई पर बुलेट ट्रेन का ट्रैक होने से रास्ते में आने वाली नदियां, नाले और नहर प्रभावित नहीं होंगे।


बीपीको कंपनी को पड़ेगा हटाना


गणदेवी के नांदरखा में चार लाख वर्ग फीट मे फैली बीपीको कंपनी पर भी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का असर होगा। इस प्रोजेक्ट के चलते कंपनी को वहां से हटाना पड़ सकता है। कंपनी में करीब ढाई सौ कर्मचारी काम करते हैं। कंपनी से जुड़े एक हजार से अधिक डीलर व अन्य लोग हैं। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के चलते करीब 1200 लोगों के रोजगार पर असर पडने की आशंका है। वहीं कंपनी के एचआर प्रबंधक केयुर भट्ट ने कहा कि सरकार से उन्हें इस तरह की कोई जानकारी नहीं मिली है। कंपनी को यहां से हटाने में दो से पांच साल लग सकते हैं। इसके लिए सरकार से कितना मुआवजा मिलेगा और कब मिलेगा इस बारे में भी कंपनी को कोई जानकारी अभी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि शायद कंपनी को मुआवजा मिल जाए मगर कर्मचारियों को वेतन कौन देगा?


धोखे में रखने पर विरोध


बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर किसानों का रुख सकारात्मक है। सरकार को किसानों को सही मुआवजा देना होगा। इसके लिए पहले राजस्व मंत्री और सचिव की उनके साथ बैठक होनी चाहिए। यदि सरकार किसानों को धोखे में रखने का प्रयास करेगी तो विरोध होगा और कानूनी लड़ाई लडऩे की भी तैयारी है।
विनोद देसाई, किसान

विनीत शर्मा Reporting
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