बाजारों में पीओपी की मूर्तियों की भरमार

बाजारों में पीओपी की मूर्तियों की भरमार

Sunil Mishra | Publish: Sep, 11 2018 07:27:01 PM (IST) Surat, Gujarat, India


पीओपी की मूर्तियों के विसर्जन पर पाबंदी
मूर्तियों की सजावट के लिए केमिकल रंगों का अधिक प्रयोग


सिलवासा. नदियों के पानी को प्रदूषण से बचाने के लिए पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) की मूर्तियों के विसर्जन पर पाबंदी है। इन मूर्तियों में सजावट के लिए केमिकल रंगों का अधिक इस्तेमाल हो रहा है। विसर्जन के दौरान पीओपी की मूर्तियां कई दिनों तक पानी में नहीं घुलती हैं। विसर्जन के बाद मूर्ति पर लगे केमिकल पानी में घुलकर जलीय जीव-जंतुओं के लिए विषाक्त बन जाते हैं। गणेशोत्सव नजदीक आते ही पर गणेश प्रतिमाओं की बिक्री बढ़ी है। विक्रेता मिट्टी की बताकर पीओपी निर्मित मूर्तियां बेच रहे हैं। महाराष्ट्र में पीओपी की मूर्तियों पर प्रतिबंध होने से दादरा नगर हवेली में ऐसी मूर्तियों का प्रचलन बढ़ गया है। दुकानों में बिक्री के लिए पीओपी की मूर्तियां ज्यादा हैं।


खतरनाक रंगों का इस्तेमाल
गणेशोत्सव पर प्रतिवर्ष छोटी-बड़ी मिलाकर प्रदेश में 30 हजार से अधिक मूर्तियों की बिक्री होती है। मिट्टी की अपेक्षा पीओपी निर्मित मूर्तियां सस्ती और टिकाऊ होती हैं। जानकारों का कहना है कि इन मूर्तियों पर सजावट के लिए कॉपर सल्फेट, क्रोमियम आयोडाइड, सिल्वर एल्युमिनियम ब्रोमाइड, लेड ऑक्साइड, कांच का बुरादा जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। पूजन के बाद जब मूर्तियों का दमणगंगा में विसर्जन होता है, तब नदी में प्रदूषण को बढ़ावा मिलता है। अधिकतर मंडल पांच दिन गणेशोत्सव मनाते हैं। घरों में सवा दिन का गणपति पूजा का रिवाज चल पड़ा हैै। गणपति उत्सव में सवा दिन, ढाई दिन, पांच दिन, सात दिन, नौ दिन और ग्यारहवेें दिन सभी मूर्तियों का विसर्जन होता हैै।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार मूर्तियों का निर्माण परंपरागत मिट्टी से ही हो, पीओपी या किसी रासायनिक वस्तु का प्रयोग नहीं होना चाहिए। सजावट के लिए प्रयुक्त रंग प्राकृतिक व गैर विषाक्त होने चाहिए। उपभोक्ता को मिट्टी की बनी मूर्तियां ही खरीदनी चाहिए। विसर्जन में पूजन सामग्री, सजावटी सामान, बांस, रस्सी आदि अलग कर अपशिष्ट अधिनियम के तहत निपटान किया जाए। बाजारों में पीओपी की मूर्तियां खरीदने और बेचने पर रोक है। पानी में बहाई जाने वाली मूर्तियां चिकनी मिट्टी या पानी में जल्दी पिघलने वाले कणों की बनी होनी चाहिए।


नदी में फेंकी खंडित मूर्तियां
गणेशोत्सव से पूर्व अथाल दमणगंगा रिवर फं्रट के पास किसी ने खंडहर मूर्तियों का मलबा डाल दिया है। इनमें अधिकांश मूर्तियां दुर्गा मां की हैं। बताया जाता है कि गोदामों में रखी मूर्तियां जब टूट जाती हैं या खंडित हो जाती हैं, तब इनको नदी-नालों में बहा दिया जाता है। गणेशोत्सव पर नई मूर्तियों को रखने के लिए विक्रेता गोदाम की सफाई करते हैं। गोदामों में पड़ी पुरानी टूटी-फूटी मूर्तियों को विक्रेता चुपके से दमण गंगा में फेंक देते हैं। इससे धर्मप्रेमी निराश हैं।

Ad Block is Banned