वर्षों बाद भी नहीं बदले हालात

खतरे को आमंत्रित करती बस स्टेंड की इमारत

By: Gyan Prakash Sharma

Published: 27 Jun 2021, 07:28 PM IST

सिलवासा. शहर के सरकारी बस स्टेंड की इमारत खतरे से खाली नहीं है। बारिश आरम्भ होते ही सिलवासा एसटी बस स्टेंड की इमारत की छत व दीवारों से जगह-जगह पानी गिरना प्रारम्भ हो गया है। प्रतीक्षालय और प्लेटफार्म की छत से भी पानी टपकने लगा है। पुनर्निर्माण नहीं होने से पूरी इमारत बदहाल हो गई है। फर्श, दीवारें और छत का प्लास्टर गिर गया है, कई जगह दीवारों में दरारें पड़ी हैं। जर्जर होने से प्रथम तल के कमरे वर्षो से ताले में कैद हैं। परिसर का धरातल सामने की रोड ने गहराई में होने से थोड़ी सी बारिश में जलजमाव की समस्या आम बात हो गई है।
सिलवासा बस स्टेंड से रोजाना 100 से अधिक बसें संचालित होती हैं, जहां 8 से 10 हजार लोग रोजाना आवागमन करते हैं। प्रतिवर्ष बसों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर जीरो है। शहर में थोड़ी सी बारिश में प्रतीक्षा हॉल और बरामदे की छत से पानी रिसने लगता है। इस मौसम में छत से पानी टपकने के कारण यात्रियों एवं यहां कार्यरत कर्मचारियों को परेशानी हो रही है। यहां की बदहाली देखते ही यात्री बस का इंतजार करने की बजाय वापी के लिए ऑटो पकड़ लेते हैं।


चार दशक पहले हुआ था निर्माण

बस स्टेंड भवन का निर्माण 40 वर्ष पहले हुआ था, उससके बाद दीवारों पर रंग रोगन, पुताई एवं छत की मरम्मत नहीं हुई है। भवन की छत में महीन दरारे पड़ गई हैं। इमारत काफी समय से मरम्मत मांग रही है। यह बस स्टेंड गुजरात परिवहन निगम के अधीन संचालित हैं, जिससे इसके देखरेख और संचालन पर स्थानीय प्रशासन का अधिकार नहीं है। गुजरात परिवहन निगम इसके निर्माण व जीर्णोद्धार पर आंखे बंद कर रखी है। चार साल पहले योजना व विकास प्राधिकरण ने बस स्टेंड के जीर्णोद्धार का खाका तैयार किया, जिसमें बस स्टेंड की पूरी इमारत को तोड़कर सुविधाओं युक्त आधुनिक दो मंजिला बस स्टेंड भवन का निर्माण करना था। इंजीनियरों ने नए भवन के प्लान भी पास कर दिया था। प्रशासनिक अधिकारियों की अदला-बदली से यह योजना बाद में फाइलों में बंद हो गई।

Gyan Prakash Sharma
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