CHATH MAHAPARV: सेविले चरन तोहार हे छठी मइया, महिमा तोहिर अपार...

अस्ताचलगामी सूर्यदेव को हजारों व्रती श्रद्धालुओं ने समर्पित किया अघ्र्य, कोविड-19 की गाइडलाइन का भी हुआ पालन

By: Dinesh Bhardwaj

Updated: 20 Nov 2020, 08:54 PM IST

सूरत. कोरोना महामारी के बीच उत्तर भारत का छठ महापर्व भी शुक्रवार को पूरे जतन के साथ हर्षोल्लास के माहौल में मनाया गया। हजारों व्रतियों व श्रद्धालुओं ने नदी-तालाब व नहर किनारे के बजाय घर की छत पर पानी के टब, सोसायटी के कृत्रिम तालाब में खड़े होकर विधिविधान से छठी मइया की आराधना की और अस्ताचलगामी सूर्यदेव को अघ्र्य समर्पित किया। इस दौरान महिलाएं गीत गाती रही वहीं, शनिवार सुबह उदियाचल सूर्य को अघ्र्य समर्पण के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व सम्पन्न होगा।
कार्तिक अमावस्या दीपावली के छठे दिन सूर्यदेव व सूर्यदेव की ***** षष्ठी मैया की पूजा का चार दिवसीय छठ पर्व इस बार बुधवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया था और इस दौरान गुरुवार को खरना का आयोजन हजारों श्रद्धालुओं व व्रतियों ने किया। इससे पूर्व छठ महापर्व के दौरान तापी नदी के विभिन्न घाट व तालाब किनारे आयोजन करने वाली सामाजिक संस्थाओं ने कोरोना महामारी को ध्यान में रख घर व छत पर ही छठ पर्व मनाने की अपील सभी श्रद्धालुओं से की थी। उसके अनुरूप ही चार दिवसीय पर्व श्रद्धालु घरों में मना रहे हैं और शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्यदेव को अघ्र्य समर्पित करने के लिए भी हजारों श्रद्धालु व व्रती छत पर बाथ टब अथवा खुले स्थल में गड्ढ़े में जमा पानी में खड़े होकर विधिविधान से पूजा-आराधना किए। इस दौरान वहां पर मौजूद अन्य महिलाओं ने केलवा के पात पर उगा हो सूरज देव..., घाट केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेडराय..., कांच ही बांस के बहंगिया, बहगी लचकती जाए..., सेविले चरन तोहार हे छठी मइया, महिमा तोहिर अपार..., उगु न सुरजदेव भइलो अरग के बेर..., निंदिया के मातल सुरूज अंखियों ना खोले हे...आदि पारम्परिक गीत गाती रही। वहीं, पुरुष वर्ग व्रतियों के सहयोग के लिए पूजा सामग्री लाने-पहुंचाने में भी तत्पर दिखाई दिया।

परम्परा का निर्वाह कुछ इस तरह...

छठ महापर्व के अवसर पर शुक्रवार को सूरत समेत देशभर में उत्तर भारतीय समाज ने अस्ताचलगामी सूर्यदेव को अघ्र्य समर्पित किया। इस दौरान नदी-तालाब किनारे पानी में खड़े रहने की परम्परा का निर्वाह सूरत के डिंडोली समेत अन्य क्षेत्रों में सैकड़ों श्रद्धालुओं व व्रतियों ने छत पर बाथ टब व सोसायटी के निकट खुले में गड्ढ़े में पानी में खड़े रहकर किया। इस बार कोरोना महामारी की वजह से शहर में तापी नदी व तालाब किनारे छठ पूजा के आयोजन स्थगित रखे गए थे, जिसकी वजह से श्रद्धालुओं ने महापर्व की परम्परा को कुछ इस तरह से निभाया।


तड़के से हो जाएंगे एकत्र


शुक्रवार शाम अस्ताचलगामी सूर्यदेव को अघ्र्य समर्पित करने के बाद अब छठ महापर्व के व्रती व अन्य श्रद्धालु शनिवार को उदियाचल सूर्यदेव को पानी में खड़े रहकर अघ्र्य समर्पित करेंगे। इसके लिए घर-परिवार के सदस्य व अन्य रिश्तेदार तड़के से घरों की छत व खुले में जमा किए पानी के स्थल के पास जमा हो जाएंगे और सूर्यदेव की लालिमा फूटने के साथ ही छठी मइया के जयकारों के साथ अघ्र्य समर्पित किया जाएगा और चार दिवसीय छठ महापर्व का प्रसाद वितरण के साथ समापन होगा।

CHATH MAHAPARV: सेविले चरन तोहार हे छठी मइया, महिमा तोहिर अपार...
Show More
Dinesh Bhardwaj Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned