रास्ता साफ, मौके पर काम शुरू

पाल-उमरा ब्रिज- 60 दिन के भीतर खाली करनी होगी जगह, मनपा भी दूर करेगी औपचारिकताएं, हर महीने मिलेगा 12 हजार रुपए किराया

Vineet Sharma

20 Mar 2020, 12:09 PM IST

सूरत. बरसों से लंबित पड़ा पाल-उमरा ब्रिज का काम पूरा होने की उलटी गिनती शुरू हो गई है। हाइकोर्ट के दखल के बाद विरोध में लामबंद प्रभावित पक्ष ने अपनी सहमति दे दी। संपत्ति मालिकों को 60 दिन के भीतर जगह का कब्जा देना होगा। इस बीच उनके वैकल्पिक आवासों के लिए मनपा प्रशासन भी विभिन्न औपचारिकताएं पूरी कर लेगा। वैकल्पिक आवास निर्माण की समयावधि के दौरान मनपा प्रशासन उन्हें १२ हजार रुपए महीने का किराया भी देगा।

बरसों से अटका पड़ा पाल-उमरा ब्रिज का मामला हाइकोर्ट में था। कोर्ट ने सोमवार तक सभी प्रभावित पक्षों को मनपा के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने थे। कोर्ट का समय पूरा होने से कुछ देर पहले तक भी सात लोगों ने अपने हस्ताक्षर नहीं किए थे। कोर्ट ने जब साफ कर दिया कि लोग सहमति नहीं देते हैं तो मनपा प्रशासन जबरन जगह खाली कर अधूरे पड़े काम को पूरा करे, अब तक आनाकानी कर रहे लोगों ने भी हस्ताक्षर कर सहमति जता दी। आयुक्त बंछानिधि पाणि ने बताया कि प्रभावित एक व्यक्ति अस्पताल में होने के कारण उसकी सहमति रह गई है, जो बाद में पूरी करा ली जाएगी।

ब्रिज को पूरा करने की तमाम अड़चनें दूर होने के संकेत मिलते ही मनपा प्रशासन ने मौके पर जाकर काम शुरू कर दिया। आयुक्त ने बताया कि फैसला पक्ष में आने की संभावना को देखते हुए मनपा टीम ने रविवार से ही कवायद शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि रास्ते में आ रही संपत्ति का कब्जा लेने के लिए अमल में लाई गई लाइनडोरी पर अमल की कवायद काम कर गई। ब्रिज सेल के मुताबिक जितना जल्दी जगह का कब्जा मिलता है, मानसून से पहले काम पूरा करने के लिए उतना ही बेहतर है।

सोमवार को पाल-उमरा ब्रिज की भी तमाम अड़चनें दूर होने के बाद लोगों को सहूलियत की उम्मीद बंधने लगी है। यह ब्रिज बनने का सीधा असर सरदार ब्रिज और केबल ब्रिज पर पड़ेगा। पाल, पालनपुर, भाठा, अडाजण और रांदेर की बड़ी आबादी सरदार ब्रिज या केबल ब्रिज के बजाए तापी पर बनने वाले इस नए ब्रिज का उपयोग शुरू करेगी। डूमस, गौरव पथ और सिटीलााइट होते हुए उधना-मगदल्ला रोड आदि की ओर जोने के लिए यह ब्रिज बहुत उपयोगी साबित होगा।

गौरतलब है कि अठवा और अडाजण को जोडने वाले सरदार ब्रिज पर लगातार ट्रैफिक बढता देख मनपा प्रशासन ने तापी नदी पर केबल ब्रिज और पाल-उमरा ब्रिज का प्रस्ताव रखा था। बरसों तक अटकने के बाद किसी तरह केबल ब्रिज तो पूरा हो गया, लेकिन पाल-उमरा ब्रिज अब तक अधूरा पड़ा है। पाल-उमरा ब्रिज के निर्माण का काम दोबारा तभी शुरू हो पाना संभव था, जब अड़चन बन रही संपत्तियों को हटाया जा सके।

यह थी वजह

रास्ते में आ रही संपत्तियों की लाइनडोरी पर अमल को लेकर मनपा प्रशासन लंबे समय तक असमंजस में रहा। कुछ लोग जगह देने को तैयार नहीं थे, जिस कारण ब्रिज का काम पूरा होने की तारीखें बार-बार आगे बढ़ रही थीं। लंबे विवाद और लोगों के विरोध के बाद पाल-उमरा ब्रिज के टेंडर को मनपा की स्थाई समिति में 23 जुलाई, 2015 को मंजूरी दी गई थी। ठेकेदार फर्म विजय मिस्त्री के 89 करोड़ रुपए के टेंडर को मंजूरी देते हुए इसे दो साल में पूरा करना तय किया गया था। ब्रिज की डिजाइन और स्थान बदलने को लेकर निर्माण दो से ढाई साल तक अटका रहा था। स्थाई समिति ने भी संपत्ति मालिकों के रवैये से तंग आकर अनिवार्य संपादन का निर्णय किया था।

10 फीसदी काम बाकी

करीब 89 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे पाल-उमरा ब्रिज के रास्ते में आ रही संपत्तियों के संपादन को छोड़कर बाकी भाग में मनपा प्रशासन ने काम शुरू करा दिया था। पाल से उमरा की ओर जाते समय नदी किनारे रास्ते में आ रही जमीनों के कारण काम अटका पड़ा था। विवादित स्थल तक आकर काम रुका पड़ा है। ब्रिज सेल को विवादित जगह मिलने का इंतजार था। जगह मिलते ही मनपा टीम ने मौके पर काम भी शुरू कर दिया।

विनीत शर्मा Reporting
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