संदिग्ध मृतकों का बिना कोरोना टेस्ट के पोस्टमार्टम करने की मजबूरी!

- बुखार और श्वास लेने में दिक्कत से हुई मौत

- पुलिस कोरोना टेस्ट करवाने गई तो चिकित्सकों ने मना किया

By: Sanjeev Kumar Singh

Updated: 23 Sep 2020, 09:28 PM IST

सूरत.

कोविड-19 की गाइडलान में कोरोना रोकथाम के लिए ट्रोमा सेंटर में संदिग्ध अवस्था में व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने के बाद उसका कोरोना टेस्ट करने के बाद ही शव पोस्टमार्टम रूम में ले जाने के निर्देश हैं। इसके बावजूद न्यू सिविल अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में आने वाले संदिग्ध मृतकों का बिना कोरोना टेस्ट किए ही डॉक्टर पोस्टमार्टम कर रहे हैं। सचिन जीआईडीसी पुलिस ने सोमवार को एक मृतक को कुछ दिनों से बुखार और श्वास लेने में दिक्कत होने के बाद मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम के लिए लेकर आई थी। कोविड टेस्ट नहीं होने के कारण मृतक की मां अपने बेटे का अंतिम बार चेहरा नहीं देख पाई।


सचिन जीआईडीसी पुलिस के मुताबिक, सचिन-मगदल्ला रोड साई नगर सोसायटी निवासी श्याम नारायण शिवबालक गौड (25) बिहार के बक्सर जिले का निवासी था। श्याम की तबियत कुछ दिनों से खराब थी। उसने घर के नजदीक दवाखाने में प्राथमिक इलाज करवाया। इसी दौरान तबियत अधिक खराब हुई तो परिजन उसे सोमवार दोपहर 12 बजे बेहोशी की हालत में न्यू सिविल अस्पताल लेकर आए। इमरजेंसी विभाग में उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को बिना कोरोना टेस्ट किए पोस्टमार्टम रूम में रखवा दिया गया।

सचिन जीआईडीसी पुलिस शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टर के पास पहुंची। यहां परिजनों ने बताया कि मृतक श्याम सूरत में अकेला रहता था। उसके माता-पिता गांव में रहते हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव बिहार के बक्सर ले जाना है। पुलिस ने पंचनामे में कुछ दिन से बुखार और श्वास लेने में तकलीफ होने का लिखा था। इसलिए चिकित्सकों ने उसके कोरोना टेस्ट करवाने के लिए आरएमओ से बातचीत की।

इसके बाद पुलिस को कोविड-19 हॉस्पिटल में कोरोना टेस्ट करवाने के लिए भेजा गया, लेकिन चिकित्सकों ने सहयोग नहीं किया। पुलिस आरएमओ ऑफिस पहुंची, यहां भी शव का कोरोना टेस्ट करने की अनुमति नहीं मिली। अंत में इमरजेंसी विभाग के चिकित्सक ने पीपीई किट पहनकर पोस्टमार्टम किया। अब प्रशासन ने परिजनों को सूरत में ही शव का अंतिम संस्कार करने के लिए कहा है। पुलिस ने बताया कि श्याम के परिजन गांव से सूरत आने के लिए रवाना हो गए थे। परिजनों ने बताया कि मां अंतिम बार अपने बेटे को नहीं देख सकी।

छह माह में सिर्फ एक शव का टेस्ट हुआ !

ट्रोमा सेंटर के चिकित्सकों ने संदिग्ध मृतकों के कोरोना टेस्ट करने और बाद में शव पोस्टमार्टम रूम में रखने का मुद्दा उठाया था, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने शुरू से ही ध्यान नहीं दिया है। सूत्रों ने बताया कि 19 मार्च को सूरत में पहला केस मिला था। इसके बाद न्यू सिविल अस्पताल में सैकड़ों संदिग्ध मृतकों के पोस्टमार्टम बिना कोरोना टेस्ट के ही किए गए। 20 मई को एक मृतक सचिन से लाया गया गया था। उस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मृतक का कोरोना टेस्ट आरटी-पीसीआर किया गया था। पुलिस ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम के लिए कहती भी है, लेकिन अस्पताल में अभी तक कोई भी नियम नहीं बनाया गया।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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