ग्यारह गुमशुदा लोगों की मौत की पुष्टि

पिछले दो साल में सूरत (ग्रामीण) समेत दक्षिण गुजरात के पांच जिलों के गुमशुदा 11 लोगों के परिजनों की उम्मीदें उस समय टूट गईं, जब पुलिस...

By: मुकेश शर्मा

Published: 20 Jul 2018, 10:06 PM IST

सूरत।पिछले दो साल में सूरत (ग्रामीण) समेत दक्षिण गुजरात के पांच जिलों के गुमशुदा 11 लोगों के परिजनों की उम्मीदें उस समय टूट गईं, जब पुलिस की ओर से पुष्टि की गई की यह लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं।किसी व्यक्ति के लापता होने के बाद परिजनों को उम्मीद होती है वह कभी न कभी मिल जाएगा, लेकिन कई बार लापता हुए लोग हादसों का शिकार हो जाते हैं और उनके शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती।

इस वजह से परिजनों को पता नहीं चल पाता कि वह जीवित हैं या नहीं। सूरत रेंज पुलिस ने एक अनोखी पहल करते हुए पिछले दो साल में पांच जिलों सूरत (ग्रामीण), तापी, नवसारी, डांग, वलसाड से लापता हुए लोगों और पिछले दो साल के दौरान हत्या, सडक़ हादसों समेत विभिन्न कारणों से मौत के बाद बरामद अज्ञात शवों के फोटो तथा डाटा का मिलान कर उनकी शिनाख्त के प्रयास शुरू किए। इससे ग्यारह ऐसे लोगों का पता लगा, जिनकी विभिन्न घटनाओं में मौत हो चुकी थी। पुलिस ने उनके परिजनों से संपर्क कर इसकी पुष्टि की।

रेंज पुलिस महानिरीक्षक जी.एस. मलिक ने बताया कि २०१६ में १९२ और २०१७ में २०६ लोग ऐसे थे, जिनका कोई अता-पता नहीं चल पाया था। वहीं, २०१६ में ३०६ और २०१७ में २४० अज्ञात शव बरामद हुए थे। इनके डाटा का मिलान कर विभिन्न आधार पर ६८ लोगों की पहचान की गई। इनमें से ग्यारह लोगों के परिजनों से संपर्क कर उनकी मौत के पुष्टि की जा चुकी है।

शेष मामलों में भी परिजनों से संपर्क कर पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। २१ अज्ञात शवों की पहचान कर उनके परिजनों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्य में जुटे पुलिस कर्मियों को एक शव की पहचान करने पर प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा की गई है।

 

पुलिस उप निरीक्षक को एक हजार रुपए और पुलिसकर्मी को ५०० रुपए दिए जाएंगे।

 

रेंज पुलिस महकमे द्वारा इन ग्यारह शवों की शिनाख्त ने अज्ञात शवों के मामलों में पुलिस की कोताही को भी उजागर कर दिया है। यदि पुलिस ने शव बरामद होने के बाद शिनाख्त के पूरे प्रयास किए होते तो इनके बारे में उसी समय पता चल जाता।

हरेक जिले में होगा विशेष दस्ता

रेंज पुलिस महानिरीक्षक जी.एस. मलिक ने बताया कि इस कार्य की पहल डांग जिले के आहवा एएसपी (सहायक पुलिस अधिक्षक) अजीत राज्याणी ने की थी। उनके सुपरविजन में प्रत्येक जिले में विशेष दस्ता गठित किया जाएगा, जो स्थानीय क्राइम ब्रांच का हिस्सा होगा। इसके प्रभारी पुलिस उप निरीक्षक होंगे। उनके मातहत चार अन्य पुलिसकर्मी होंगे। इस दस्ते को वाहन भी उपलब्ध करवाया जाएगा। इस दस्ते का कार्य गुमशुदा लोगों का डाटा हासिल कर अज्ञात शवों की शिनाख्त करना होगा। इसके लिए दस्ता सीआइडी, रेलवे, स्टेट कंट्रोल और अन्य जिलों के संपर्क में रहेगा।

मुकेश शर्मा Reporting
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