गायब हुए समय के लिए जिम्मेदार कांग्रेस भी

इतिहास खंगालने में जुटी मनपा

By: विनीत शर्मा

Published: 17 Feb 2018, 11:38 AM IST

सूरत. मनपा हर साल डायरी प्रकाशित करती है। डायरी में नए साल की तारीख वाले पन्ने उतने महत्वपूर्ण नहीं, जितना उसमें दर्ज जानकारियां हैं। कई लोग सिर्फ इसलिए डायरी खरीदते हैं कि उसमें अधिकारियों के नंबर के साथ ही शहर की अब तक की गतिविधियां दर्ज हैं। यदि वर्ष १९९१ से १९९५ तक के कार्यकाल को डायरी में दर्ज नहीं किया गया है तो इसके लिए सत्ता पक्ष को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कांग्रेस भी दोषी है। सत्ता से बाहर कर जनता ने कांग्रेस को जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका सौंपी थी। विपक्ष का काम छाया सरकार के तौर पर सत्ता में बैठे लोगों के कामकाज की समीक्षा करना और उसे गलती करने से रोकना है। माना संख्या बल में कमजोर होने के कारण सत्ता पक्ष के फैसलों को बदलवा नहीं सकते, लेकिन पुरजोर विरोध कर लोगों को जागरूक किया जा सकता है। कई बार विपक्ष के दबाव में सत्ता को अपने फैसले बदलने भी पड़ते हैं। पिछले दिनों ड्राफ्ट बजट में बढ़ाई गई कर की दरों को वापस लेने का फैसला भी सत्ता पक्ष का स्वैच्छिक नहीं था। कांग्रेस के विरोध से सत्ता पक्ष दबाव में आया और स्थाई समिति ने बढ़ी दरों को वापस लेने का ऐलान किया था।


वर्ष 1991 से अब तक जब डायरी प्रकाशन हो रहा था, कांग्रेस को यह खयाल क्यों नहीं आया कि पांच साल की उपलब्धियां दर्ज नहीं हो रही हैं? इसकी बड़ी साफ वजह है कि कांगे्रस के पार्षदों ने दूसरी चीजों पर ही फोकस रखा और इस चूक पर ध्यान नहीं दिया। इस बार भी जब डायरी के प्रकाशन की कवायद शुरू हुई, कई कांग्रेस पार्षदों ने दबी जुबान में यह मुद्दा उठाया था। उस वक्त ही इसे सही तरीके से मनपा प्रशासन के समक्ष रखा जाता तो संभव है कि कोई रास्ता निकलता और इस चूक को सुधार लिया गया होता। जिन पार्षदों का ध्यान इस चूक पर गया, उन्होंने फौरी तौर पर इसे लिया और डायरी के प्रकाशन का इंतजार किया। उन्हें पता था कि एक बार डायरी प्रकाशित होने के बाद उसे दोबारा प्रकाशित नहीं कराया जाएगा। इसी का फायदा उठाने की फिराक में उन्होंने उस वक्त अपना मुंह बंद रखा और अब इस चूक पर राजनीति शुरू की है। कांग्रेस का सीधा मकसद मनपा आयुक्त के बहाने सत्तासीन भाजपा पर निशाना साधना है।

वर्ष 1966 से 1991 तक का विवरण खोजा जाएगा

एक बार फिर डायरी का विवाद उठने के बाद मनपा प्रशासन इसे ढंकने की कवायद में जुट गया है। इतिहास के पन्नों से पुराने कार्यक्रमों और उपलब्धियों की फेहरिस्त मंगाई जाने लगी है। मनपा का पीआरओ विभाग पुराने अधिकारियों और नेताओं से भी सम्पर्क करने की सोच रहा है, जिनके पास शहर के इतिहास की तारीखें मिल सकें। हर साल छपने वाली मनपा की डायरी में शहर के विकास का लेखा-जोखा रहता है। इसके पेज संख्या सात से लेकर 13 तक विभिन्न घटनाक्रमों का सिलसिलेवार जिक्र है, जो शहर की महत्वपूर्ण तारीखें बताता है। पेज संख्या आठ पर वर्ष 1966 के बाद सीधे 1991 का जिक्र है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इस अवधि में भी शहर के विकास के लिए कई मील के पत्थर के समान कार्य हुए, जिनका उल्लेख डायरी में नहीं है। डायरी में यह सब वर्ष 1996 से चला आ रहा है, लेकिन कांग्रेस नेताओं की नजर में यह पहली बार आया है। अंतिम बार 1995 की डायरी में 1966 से 1991 तक की उपलब्धियों का जिक्र था, जिसे बाद में हटा दिया गया।

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विनीत शर्मा Reporting
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