मर गई मानवता : कोरोना संक्रमित का शव सडक़ पर पटक दिया, रात भर पड़ा रहा


- अस्पताल प्रशासन बिल जमा नहीं करने पर नहीं दिया मृत्यु प्रमाण पत्र

Humanity died ..
- The hospital administration did not give the death certificate for not submitting the bill

By: Dinesh M Trivedi

Published: 02 May 2021, 01:48 PM IST

सूरत. पांडेसरा इलाके में निजी अस्पताल के कर्मचारियों ने बिल जमा नहीं होने पर कोरोना मरीज का शव सडक़ पर छोड़ दिया। जिसको लेकर शनिवार सुबह हंगामा हो गया। परिजनों का आरोप था कि 85 हजार का बिल नहीं दे पाने पर शव सडक़ पर फेंक दिया गया। खबर मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामला शांत करवाया। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हो गया।


मृतक भगवान नायक के बेटे चंद्रमोहन नायक ने बताया कि करीब बारह दिन पूर्व उसके पिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब दस हजार डिपाजिट के तौर पर भरे थे। उसके पिता को निमोनिया बताया गया था। आठ दिन बाद दोबारा से रिपोर्ट की तो लंग्स में 30 से 40 प्रतिशत इंफेक्शन मिला और कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई थी। इलाज के बाद ही शुक्रवार रात मृत्यु हो गई।

हमने अस्पताल प्रशासन से कहा था कि अभी इतने रुपए नहीं है लेकिन जल्दी इंतजाम करके चुका देंगे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी और रात एक बजे शव को अस्पताल के बाहर निकाल कर रख दिया। पिता की बाहर की दवाइयों में ही पचास हजार खर्च हो चुके थे इसके बावजूद डिपाजिट भी भरे हुए थे, फिर भी पच्चासी हजार का बिल बनाया था। मौत के बाद पहले तो कहा था कि ठीक है। लेकिन फिर अचानक से रुपए मांगने शुरू कर दिए और रुपए नहीं देने पर मृत्यु प्रमाण पत्र देने से भी मना कर दिया।

शव के सिर से निकल रहा था खून :

चंद्रमोहन का आरोप है अस्पताल वालों ने बिना बताए शव को अस्पताल के बाहर छोड़ दिया। परिजन वहां मौजूद थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन के चार लोग रात एक बजे बाहर निकले और शव छोड़ कर चले गए। परिजनों ने रोकने की कोशिश की तो झगड़ा करने लगे। सुबह जब पिताजी के शव को उठाया तो उनके सर से खून निकल रहा था। सिर पर गहरी चोटें भी लगी थी। आरोप है कि सुबह अस्पताल बिल्डिंग से गरारे कर शव पर थूका भी गया।

फेफड़ों में जमा था कफ :


चंद्रमोहन ने बताया कि उसके पिता लूम्स कारखाने में काम करते हैं। करीब 12 दिन पहले अचानक से उनकी तबीयत खराब हो गई जिसके बाद वह नजदीकी डॉक्टर के पास गए, लेकिन वहां से आराम नहीं हुआ तो अस्पताल में भर्ती करवाया था। शुरू में निमोनिया बताया गया फिर कोविड पॉजिटिव बताया गया। फैफड़ों में कफ की वजह से उन्हें सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी उनकी ब्रीथिंग स्लो हो गई थी।

Dinesh M Trivedi Reporting
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