साहूकारी के धंधे पर कोरोना का डंक

कोरोना लॉकडाउन ने मनी लेंडर्स कारोबार को दी बड़ी चोट] 40 फीसदी घट गया 50० करोड़ सालाना का कारोबार, ब्याज दर भी आधा फीसदी गिरी, कोरोनाकाल की ब्याजमाफी में गंवाए 25 करोड़ से ज्यादा

By: विनीत शर्मा

Published: 28 May 2021, 06:19 PM IST

विनीत शर्मा

सूरत. कोरोना काल का डंक उद्योग-व्यापार ही नहीं साहूकारी के धंधे को भी लगा है। शहर में सालाना पांच सौ करोड़ रुपए के ब्याज पर रुपए देने के धंधे में कोरोनाकाल में 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यही नहीं लॉकडाउन के दौरान देनदारों की ब्याज माफी में ही साहूकारों ने 25 करोड़ रुपए से ज्यादा का ब्याज गंवा दिया।

लॉकडाउन के बाद से ब्याज की दरें भी गिरकर नीचे आ गई हैं। सूरत में फिर लगे लॉकडाउन के बाद से साहूकारी के धंधे से जुड़े लोगों को नए सिरे से मुश्किल पेश आ रही है। राज्य सरकार ने हालांकि वित्तीय व्यवसाय को लॉकडाउन से बाहर रखा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन साहूकारी को वित्तीय व्यवसाय की श्रेणी में नहीं मान रहा।

सामान्य हालात में शहर में साहूकारी का धंधा करीब पांच सौ करोड़ रुपए का है। इस कारोबार के लिए हालांकि चार हजार से अधिक लाइसेंस जारी किए गए हैं, लेकिन करीब ढाई हजार लोग ही ब्याज पर रुपए देने का धंधा कर रहे हैं। कई लोग तो तीन पीढिय़ों से इसी धंधे में हैं। शहर का नवसारी बाजार इस धंधे का एपिक सेंटर है। इसके अलावा शहरभर में और आउटस्कर्ट क्षेत्र में लोग साहूकारी के धंधे से जुड़े हैं।

बरसों से साहूकारी का व्यवसाय कर रहे जिमिल रतीलाल शाह ने बताया कि कोरोनाकाल से पहले शहर में साहूकारी का धंधा करीब पांच सौ करोड़ रुपए का था। मार्च 2020 के बाद इसमें करीब 40 फीसदी की गिरावट आ गई है। ब्याज की दरें भी जो पहले डेढ़ फीसदी थीं, घटकर एक से सवा फीसदी तक रह गई हैं। लॉकडाउन में जब लोग घरों को लौटने लगे थे, तो बाजार बंदी के कारण न उनका गिरवीं रखा सामान ही लौटाया जा सका था और न उधार गई रकम ही वापस आई थी। ऐसे में स्थितियां सामान्य होने पर जब लोगों ने अपना सामान छुड़ाया तो साहूकारों को इस अवधि का ब्याज भी माफ करना पड़ा था। ब्याजमाफी में कारोबारियों को करीब 25 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था।

राज्य सरकार ने दोबारा लॉकडाउन का ऐलान किया तो शहर में भी पुलिस प्रशासन ने बाजार बंदी पर जोर दिया है। साहूकारी से जुड़े कारोबारियों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन राज्य सरकार की गाइडलाइन को पूरी तरह समझने को तैयार नहीं है। राज्य सरकार ने वित्तीय गतिविधियों को बाजार बंदी से छूट दी है, लेकिन प्रशासन साहूकारी को वित्तीय गतिविधियों से बाहर मानकर उन्हें कारोबार से रोक रहा है। इससे उनकी स्थिति और खराब हो रही है। जिन लोगों को रुपए उधार दिए हैं, उन्होंने लॉकडाउन की अवधि के ब्याज की माफी का राग फिर अलापना शुरू कर दिया है।

यह है धंधे का गणित

साहूकारों से आमतौर पर छोटे व्यापारी ही रुपए उधार लेते हैं। एक ग्राम सोने के जेवर पर आमतौर पर तीन हजार रुपए एक फीसदी ब्याज पर दिए जाते हैं। आमतौर पर उधार की यह रकम 25 हजार रुपए तक होती है। कभी-कभी ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति को 50 हजार रुपए से अधिक का उधार दिया हो और एक लाख तक यह आंकड़ा पहुंचता ही नहीं। जिन लोगों को उनके क्रेडिट पर उधार देते हैं उनसे सवा फीसदी का ब्याज लिया जाता है। शहर में इस धंधे से जुड़े लोगों की किताबों में सालाना दस लाख रुपए से लेकर 50 लाख रुपए की एंट्री आती है। औसतन 20 लाख रुपए सालाना की एंट्री से यह आंकड़ा पांच सौ करोड़ को पार कर जाता है।

मारवाडी और गुजराती जैन के हाथों में कारोबार

इस कारोबार से जुड़े लोगों में अधिकांश मारवाडी और गुजराती जैन हैं। पिछले कुछ दिनों से इनके यहां काम कर रहे पुरोहितों ने भी साहूकारी का धंधा शुरू किया है। हालांकि उन्होंने फिलहाल शहर के बाहरी इलाकों में काम पर फोकस किया है।

विनीत शर्मा Reporting
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