कोरोना संक्रमण: कहीं लॉकडाउन ना लग जाए?

कोरोना का बढ़ता प्रभाव, आमजन को भय का एहसास

By: Gyan Prakash Sharma

Updated: 03 Apr 2021, 07:26 PM IST

सिलवासा. कोरोना के बढ़ते केसों के साथ लोगों में इस बात का डर बैठ गया है कि, हो ना हो कहीं लॉकडाउन ना लग जाए। कुछ लोग आशंका जता रहे हैं कि लॉकडाउन भले ना लगे मगर ढेरों प्रतिबंध लग जाएंगे। इससे लोग आवश्यक न होते हुए भी रिटेल शॉप हो चाहे ऑनलाइन सब जगह खूब मात्रा में दैनिक उपयोग से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं। एक दुकानदार ने बताया कि पिछले दिनों से ग्राहकों का एवरेज बिल वैल्यू बढ़ा है। देखने में आ रहा हैै कि कुछ ग्राहक तो बार-बार आकर एक ही सामान खरीद रहे हैं।


लोगों में ऐसी बाते चल रही हैं कि महाराष्ट्र व गुजरात में कोरोना मरीज बढऩे से दानह में अघोषित लॉकडाउन लग सकता है, जो आम लोगों में डर का कारण बना हुआ है। कोरोना की दूसरी लहर से एक बार फिर बस्तियां व कॉलोनियों की चहल-पहल में कमी देखने को मिल रही है। इस बीच कुछ लोगों के दिल में और दिमाग में ये बात बैठ चुकी है कि जिंदगी ऐसे ही बीतने वाली है। गांवों में लोगों को लग रहा है कि ये बीमारी अच्छी हवा, खुली धूप के सामने टिक नहीं सकती। डॉक्टरो का कहना है कि लोगों के यह ख्याल गलत हैं। जब वैक्सीन लगने के बाद भी कोरोना हो रहा है, जिससे साफ जाहिर है कि विज्ञान को कितनी मशक्कत करने की जरूरत है। अगर लोगों की धारणा नहीं बदली तो अस्पतालों में भर्ती होने के लिए जगह नहीं मिलेगी।

लॉकडाउन लगा तो हालत गंभीर

ऑक्सीजन के सहारे चल रही क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के बुरे दिन समाप्त होने वाले नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर ने छोटे और मंझले उद्योग (एमएसएमई) सेक्टर को भारी दुविधा में डाल दिया है। यदि आंशिक लॉकडाउन भी लगाया गया तो उद्योगों की स्थिति बेहद खराब हो जाएगी।

उद्योगपतियों का कहना


उद्योगपतियों का कहना है कि लॉकडाउन के पीरियड में मजदूर से लेकर सारी मशीनरी शिथिल पड़ जाती हैं। बैंकों को ब्याज अदा करने की बड़ी परेशानी है। बैंकों की अदायगी समय पर नहीं हुई तो ब्याज और बढ़ जाता है, फलस्वरूप उद्योग-व्यवसाय दिवालिया के कगार पर पहुंच जाएंगे। दूसरी ओर बैंकों को अपने डिपॉजिटर्स को भी इस अवधि का ब्याज देना पड़ेगा। यदि उन्हें दिए गए कर्ज से आय नहीं हुई तो जमाकर्ताओं को वापिस कैसे देंगे? कितने ही लोगों की अपने फिक्स डिपॉजिट के ब्याज की आय से ही आजीविका चलती है। उद्योग-व्यवसाय बैंक कर्ज से डूबे हुए हैं। बंद की स्थिति में उद्योग मालिकों को श्रमिकों को पगार, बिजली बिल, ब्याज की अदायगी, टैक्स का भुगतान करना मुश्किल हो जाएगा।
अगर रोजगार देने वाले ही बेरोजगार हो जाएंगे तो ऐसी स्थिति में क्या होगा? जिले में हर इंडस्ट्री सैकड़ो-हजारों श्रमिकों को रोजगार देती है। कोरोना के पुन: संक्रमण से उद्योगपति कुछ भी निर्णय लेने में असमर्थ हैं। इधर कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए औद्योगिक इकाईयों ने मजदूर अपने वतन लौटने लगे हैं।

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