देश का पहला कार्टून थीम पार्क सूरत में

डायमंड और टैक्सटाइल सिटी के तौर पर विख्यात सूरत अब मनोरंजन की दुनिया में भी आगे बढ़ रहा है। देश का पहला कार्टून नेटवर्क थीम आधारित एम्यूजमेंट पार्क सू

By: मुकेश शर्मा

Published: 12 Nov 2017, 10:06 PM IST

सूरत।डायमंड और टैक्सटाइल सिटी के तौर पर विख्यात सूरत अब मनोरंजन की दुनिया में भी आगे बढ़ रहा है। देश का पहला कार्टून नेटवर्क थीम आधारित एम्यूजमेंट पार्क सूरत में बनाया जाएगा। इसके लिए पीपीपी मॉडल पर वाटर पार्क शुरू करने वाले राजग्रीन ग्रुप ने कार्टून नेटवर्क कंपनी टर्नर इंडिया के साथ करार किया है। राजग्रीन ग्रुप के चेयरमैन संजय मोवलिया ने प्रेसवार्ता में बताया कि सूरत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के एम्यूजमेंट पार्क के निर्णय के साथ यह करार किया गया है।

तीन लाख स्क्वॉयर फीट क्षेत्र में यह इंडोर पार्क अक्टूबर 2018 तक पूरा हो जाएगा। थीम पार्क की डिजाइन संडेरसन ग्रुप ने तैयार की है। ग्रुप के मैनेजिंग डिरेक्टर दिलीप छूगेरा ने बताया कि पार्क में कार्टून नेटवर्क के 40 से अधिक कैरेक्टर्स होंगे।

राज्य में नियमित डीजीपी के मुद्दे पर फैसला 13 को

गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य में नियमित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है।मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी व न्यायाधीश वी. एम. पंचोली की खंडपीठ ने शुक्रवार को याचिकाकर्ता और राज्य सरकार की ओर से दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला 13 नवम्बर तक के लिए सुरक्षित रखा। पूर्व आईपीएस अधिकारी राहुल शर्मा ने राज्य में नियमित डीजीपी की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की है।

इसमें कहा गया है कि राज्य में पिछले कई वर्षों से प्रभारी डीजीपी से काम चलाया जा रहा है। राज्य में 15 अप्रेल 2016 से नियमित पूर्णकालिक डीजीपी कार्यरत नहीं है। तब पी.सी. ठाकुर का तबादला कर पी पी पांडे को प्रभारी डीजीपी बना दिया गया था। पांडे की सेवानिवृत्ति के बाद गीता जौहरी को प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया गया है। यह बांबे पुलिस (गुजरात संशोधन) अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के विपरीत है।

याचिका में यह बात कही गई कि प्रभारी डीजीपी की नियुक्ति से राज्य के गलत दृष्टिकोण का पता चलता है। इससे राज्य के पुलिस बल को अपने हाथ का मोहरा बनाने का संदेश जाता है। इस कारण पुलिस बल में अनुशासनहीनता की स्थिति पैदा हो सकती है।

आचार संहिता के कारण नहीं ले सकते निर्णय: राज्य सरकार

उधर राज्य सरकार पहले बता चुकी है कि राज्य में नियमित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर विचार कर रही है। हालांकि गत सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं ले सकती क्योंकि राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू है।

इस पर याचिकाकर्ता ने विरोध करते हुए दलील दी थी कि ऐसा प्रावधान है कि राज्य निर्वाचन आयोग से मंजूरी लेकर नियमित नियुक्ति की जा सकती है। आयोग इस तरह की अनिर्वायता में मंजूरी दे सकती है। यह जनहित याचिका काफी पहले दायर की गई थी। तब खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा था कि सरकार कोर्ट को लिखित में पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त करने के अपने रवैए को बताए। वर्ष 1982 बैच की आईपीएस जौहरी 30 नवम्बर को सेवानिवृत्त होने वाली हैं। वे राज्य की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें राज्य की पुलिस प्रमुख का प्रभार दिया गया है।

मुकेश शर्मा Reporting
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