Corona News : कोविड-19 वायरस ज्यादा गंभीर नहीं है नया यूके स्ट्रेन वायरस

- ब्रिटेन या यूके स्ट्रेन अधिक संक्रमक जरूर, लेकिन घबराएं नहीं, सजगता ही जरूरी...

 

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 06 Jan 2021, 10:14 PM IST

संजीव सिंह /सूरत.

ब्रिटेन या यूके स्ट्रेन का नाम सुनते ही लोगों में अलग प्रकार की दहशत देखने को मिल रही है, लेकिन नए स्ट्रेन को लेकर पैनिक होने वाली बात नहीं है। नए स्ट्रेन की तुलना में कोविड-19 (पुराना स्ट्रेन) ज्यादा गंभीर और खतरनाक है। नया स्ट्रेन कोविड-19 की तुलना में ज्यादा संक्रामक जरूर है, लेकिन प्रारंभिक स्टेज में जानलेवा नहीं है। यह कहना है शहर के चेस्ट फिजिशियन का जिन्होंने अब तक सैकड़ों कोरोना मरीजों को इलाज से स्वस्थ किया है।

कोरोना वायरस से मिलती- जुलती नए स्ट्रेन वायरस के भारत में आने की खबर से हर कोई चिंतिंत है, लेकिन कोविड-19 वायरस के म्यूटेशन से बदले स्वरूप को ही नया स्ट्रेन कहा जाता है। भारत में अब तक उत्तर और दक्षिण भारत में नए स्ट्रेन के कुछ मामले सामने आए हैं। अहमदाबाद में भी ब्रिटेन से आए चार मरीजों में नए स्ट्रेन मिलने की पुष्टि हुई है। अब तक सूरत या दक्षिण गुजरात में नए स्ट्रेन का कोई पॉजिटिव केस सामने नहीं आया है। न्यू सिविल के कोविड-19 हॉस्पिटल में यूके रिटर्न कामरेज और हजीरा निवासी सात जनों को नए स्ट्रेन का संदिग्ध मानते हुए इलाज किया जा रहा है। इन सभी मरीजों की हालत पहले से काफी बेहतर बताई जा रही है।



लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके कोविड-19 के समान ही

चेस्ट फिजिशियन डॉ. समीर गामी ने ‘राजस्थान पत्रिका’ को बताया कि नया स्ट्रेन मौजूदा कोविड-19 की तुलना में 70 प्रतिशत अधिक संक्रामक है, लेकिन लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके कोविड-19 के समान ही हैं। नए कोरोना वायरस वेरिएंट (नया स्ट्रेन) को वीयूआई 202012/01 का नाम दिया गया है। इसके अलावा अब तक देश-दुनिया में आए नए स्ट्रेन के मामलों पर छपे लेखों के मुताबिक नया स्ट्रेन कोविड-19 की तुलना में अधिक गंभीर या खतरनाक नहीं है। नया स्ट्रेन छोटी उम्र के लोगों को भी संक्रमित कर रहा है। इसमें बच्चे भी शामिल हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की मृत्युदर की तुलना में नए स्टे्रन से संक्रमित मरीजों की मृत्युदर 50 प्रतिशत से भी कम है। इसलिए कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन से घबराने की नहीं सावधान और सजग रहने की जरूरत है। नए स्ट्रेन के संक्रमित मरीजों में माइल्ड प्रकार का संक्रमण देखने को मिला है। नए स्ट्रेन के मरीज को ऑक्सीजन लेवल में कमी या दूसरी अन्य गंभीरता अब तक देखने को नहीं मिली है।

कोरोना पॉजिटिव और नए स्ट्रेन के संदिग्ध मरीजों को आइसोलेशन में रखकर इलाज किया जा रहा है। वहीं यूके से लौटे व्यक्तियों के सम्पर्क में आए लोगों को सिर्फ क्वारन्टाइन करके उन पर नजर रखी जा रही है। गौरतलब है कि, केन्द्र सरकार की नए स्ट्रेन को लेकर जारी गाइडलाइन के मुताबिक 9-23 दिसम्बर के बीच यूके से लौटे प्रत्येक व्यक्ति का आरटीपीसीआर करके नए स्ट्रेन की पहचान की जा रही है। वहीं 25 नवम्बर से 8 दिसम्बर के बीच ब्रिटेन या अन्य यूरोपिय देशों से यात्रा करके आने पर लक्षण होने पर कोरोना टेस्ट किए जा रहे हैं।

वायरस नया, सावधानी पुरानी

कोविड-19 वायरस नौ जनों को संक्रमित करता है। वहीं नया स्ट्रेन वायरस बारह जनों को संक्रमित करता है। चिकित्सकों ने बताया कि कोविड-19 से एक से 20 वर्ष तक के लोगों को नहीं के बराबर खतरा था। लेकिन नए स्ट्रेन को लेकर रिसर्च में सामने आया है कि यह छोटी उम्र या एडल्ट को बड़ी संख्या में संक्रमित करते है। चिकित्सकों ने बताया कि वायरस जरूर नया है, लेकिन बचाव के सभी गाइडलाइन पुराने वाली ही पालन करनी है। इसमें बार-बार हाथ धोना, मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग आदि का पालन करने से नए स्ट्रेन से बचाव संभव है।

नए स्टे्रन के खिलाफ वैक्सीन असरकार

भारत में दो कोरोना वैक्सीन को इमरजेंसी के तहत उपयोग की अनुमति दी गई है। चिकित्सकों ने बताया कि वैक्सीन निर्माता भविष्य में वायरस के होने वाले म्यूटेशन को ध्यान में रखकर ही वैक्सीन तैयार करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया में उपलब्ध पांच-छह कोरोना वैक्सीन नए स्ट्रेन वायरस पर भी असरकार साबित होगी। वैक्सीन मिलने पर लगवाना चाहिए। क्योंकि यह वैक्सीन मानव शरीर को सुरक्षा देने में कामयाब होगी।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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