scriptCow is not a creature, it is the life of Vedic religion: Sadhvi Aradha | गाय प्राणी नहीं, वैदिक धर्म का प्राण है : साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती ने किया गौ-महिमा का बखान | Patrika News

गाय प्राणी नहीं, वैदिक धर्म का प्राण है : साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती ने किया गौ-महिमा का बखान

# सावन और देशभक्ति के रंगों से सराबोर काव्य गोष्ठी

# पाल,धनगर समाज द्वारा अहिल्याबाई होलकर के नाम की तख्ती का अनावरण

सूरत

Published: August 14, 2021 01:42:39 pm

सूरत. साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती ने कहा कि गाय माता साधारण प्राणी नही है, वैदिक धर्म का प्राण है। जिस गाय को जगत के नाथ ठाकुरजी ने जंगलों में नंगे पांव चराया, वो साधारण कैसे हो सकती हैं। गाय माता तो देवताओं की भी आराध्या हैं। यह चलता फिरता तीर्थ ही नही, चलता फिरता औषधालय भी हैं।
गाय प्राणी नहीं, वैदिक धर्म का प्राण है : साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती ने किया गौ-महिमा का बखान
गाय प्राणी नहीं, वैदिक धर्म का प्राण है : साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती ने किया गौ-महिमा का बखान
गौमाता के दर्शन में न केवल सभी देवों और तीर्थो के दर्शन है, बल्कि पंचगव्य के रूप में असाध्य रोगों की औषधि भी गौमाता भक्तों को बिना किसी फीस के दे देती हैं। साध्वी श्री ने गुरुवार को घोड़दौड रोड स्थित अग्रवाल समाज भवन में गौपुत्र अरुण पाटोदिया एवं पुखराज अग्रवाल द्वारा आयोजित गौ-महिमा का बखान के दौरान यह बातें कही।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में गौभक्त उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि गौमाता सृष्टि की धुरी हैं, जब गोमाता ही नही बचेगी तो यह सृष्टि भी खत्म हो जाएगी। उन्होंने गौमाता के तन की पवित्रता का बखान करते हुए कहा कि सृष्टि में केवल गोमाता ही हैं, जिसका मल और मूत्र को शस्त्रों में पवित्र मान कर पूजा सामग्री में शामिल किया गया हैं।
महिमा को बस महसूस करने की आवश्यक्ता हैं। जैसे विद्युत करंट दिखाई नही देता प्रकाश के रूप में उसे महसूस किया जाता है, ऐसे ही गोमाता की विलक्षण महिमा को महसूस करने की आवश्यकता है। इंसान के लिए जन्म से लेकर मृत्यु के बाद तक गौ-माता उपयोगी है। इसलिए सभी मानव को गौवंश का संरक्षण करना नितांत आवश्यक है।
गौ माता के पूजन और सेवा से बांझपन, नार्मल डीलीवरी सहित अनेकों प्रकार की बीमारिया, दुख दरिद्रता आदि सब दूर हो जाती है। गौमाता को यदि कोई जानवर मानता हैं तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल है। जिस दिन सही मायनों में गाय को माता मानने लग जाओगे उस दिन आपके सब दु:ख और तकलीफ दूर होते चले जायेंगे।
इस अवसर पर स्वामी श्रीहरि जीवन, छोटू भाई पाटिल, पुखराज अग्रवाल, पार्षद दिनेश राजपुरोहित, रश्मीबेन साबू, सुमन गाडिय़ा सहित सोमोलाई गौशाला, नंदेश्वर गौशाला, पथमेड़ा गौशाला आदि गौभक्त भी उपस्थित रहे।

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सावन और देशभक्ति के रंगों से सराबोर काव्य गोष्ठी

सूरत. महिला काव्य मंच की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ .पूनम गुजरानी की अध्यक्षता में सरस्वती वंदना से शुरुआत हुई। फिर सुमन शाह ने सावन व देशभक्ति के रंग बिखरे। निम्मी गुप्ता तलवार ने चिङिय़ा को माध्यम बनाकर स्त्री की आजादी और लंबी उङ़ान की बात को मुखरता से रखा। रूचि गुप्ता ने मैं पॉकेट में बचपन भर लाई और गंगा घाट पर एक दिन कविता सुनाकर दाद बटोरी। कवयित्री सुमन लता ने आजादी की बात करते हुए समर शेष है कविता सुनाकर चिंतन को नई दिशा दी। महिला काव्य की मंत्री रजनी जैन ने भी सावन और देशभक्ति पर अपनी भावनाएं व्यक्त की।
नीरु तलवार ने राखी और देशभक्ति के शानदार रंग फिजा में बिखरे। प्रीति सुराणा ने तुम और मैं की सुंदर व्याख्या वाली गहरी कविता व बेटी का गीत सुनाया। डॉ.पूनम गुजरानी ने सावन की रिमझिम पर गीत की प्रस्तुति देते हुए किसान की मनोव्यथा को एक दिन तूं खेत पर चल के माध्यम से व्यक्त किया।
बिंदु शर्मा ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया तथा अपनी कविताओं और फिल्मी गीतों के माध्यम से समां बांध दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। जिसे दो छोटी छोटी बच्चियों खनक गुजराती और कुहू अग्रवाल ने प्रस्तुत किया।
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पाल,धनगर समाज द्वारा अहिल्याबाई होलकर के नाम की तख्ती का अनावरण


सूरत. पांडेसरा पियूष प्वाइंट में पुण्य श्लोक लोकमाता अहिल्या बाई होलकर की प्रतिमा की तख्ती का अनावरण किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में पाल, धनगर, गडरिया समाज के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। सभी ने राज माता अहिल्या बाई होलकर की 226 वीं पुण्य तिथि पर उनकी प्रतिमा पर पुष्प वर्षा कर नमन किया और आशिवाद लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छोटूभाई पाटिल पूर्व उपप्रमुख भाजपा सूरत शहर, सूरत मनपा की बांधकाम समिति अध्यक्ष रोहिणी पाटिल ,अध्यक्ष सांस्कृतिक समिति पूर्णिमा दावले, दंडक विनोद भाई पटेल मौजूद रहे। पाल समाज के अग्रणी पारसनाथ पाल, बैजनाथ पाल, पंकज पाल, उमाशंकर पाल, डॉ. एलबी पाल, पीएस बघेल समेत अन्य लोगों ने कार्यक्रम को सफल बनाया।
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