पेटकॉक बंद होने से सूरत के प्रोसेसर्स के करोड़ों डूब गए

पेटकॉक बंद होने से सूरत के प्रोसेसर्स के करोड़ों डूब गए

Mukesh Kumar Sharma | Publish: Feb, 15 2018 10:35:29 PM (IST) Surat, Gujarat, India

जीएसटी में व्यापार पहले से चौपट था, ऐसे में सरकार की नीतियों ने सूरत के कपड़ा उद्यमियों की हालत और खराब कर दी है। यहां के उद्यमियों ने लाखों रुपए....

सूरत।जीएसटी में व्यापार पहले से चौपट था, ऐसे में सरकार की नीतियों ने सूरत के कपड़ा उद्यमियों की हालत और खराब कर दी है। यहां के उद्यमियों ने लाखों रुपए खर्च कर पेटकॉक का इस्तेमाल करने की पद्धति विकसित कर उसके लिए यूनिट में करोड़ों रुपए खर्च किए। दो महीने पहले राज्य सरकार के पेटकॉक पर प्रतिबंध लगा देने से उद्यमियों के करोड़ों रुपए डूब गए।


सूरत के व्यापारी ईंधन के खर्च पर नुकसान का सामना कर रहे हैं। कुछ साल पहले बड़ी संख्या में उद्यमियों ने करोड़ों रुपए खर्च कर गैस आधारित उत्पादन पद्धति से काम किया। गैस की बढ़ती कीमतों के कारण उद्यमियों ने यूनिट में करोड़ों रुपए से नया सिस्टम तैयार कर लिग्नाइट कोयले से उत्पादन शुरू कर दिया। लिग्नाइट के इस्तेमाल से प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का डर लगा रहता था। इसके अलावा लिग्नाइट मिलने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता। लिग्नाइट की अपेक्षा प्रोसेसर्स को पेटकॉक सस्ता पड़ रहा था, लेकिन उसके इस्तेमाल से प्रदूषण ज्यादा होने के कारण वह प्रतिबंधित था।


प्रोसेसर्स ने इसका तोड़ ढूंढ निकाला। कई महीनों की स्टडी के बाद पर्यावरणविदों के सहयोग से नई तकनीक विकसित की गई, जिसमें लिग्नाइट के स्थान पर पेटकॉक इस्तेमाल करने पर प्रदूषण कम होता था। इसके लिए उद्यमियों को अपनी यूनिट में पचास लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। सूरत के लगभग 75 उद्यमियों ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की मंजूरी से पेटकॉक का प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल शुरू किया। लगभग दो साल तक चलने के बाद प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने दो महीने पहले पेटकॉक का इस्तेमाल बंद करवा दिया।

इससे प्रोसेसर्स चिंतित हैं। उनका कहना है कि जीपीसीबी के फैसले से प्रोसेसर्स के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। जीएसटी के कारण वह पहले से परेशान थे, इस फैसले से उद्यमियों के लगभग 50 करोड़ रुपए डूब गए। प्रोसेसर्स कहते हैं कि पिछले दिनों दिल्ली में प्रदूषण के कारण कोर्ट के पेटकॉक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद यहां भी प्रतिबंध लगाया गया, लेकिन यहां के उद्यमी पहले से पेटकॉक के इस्तेमाल मेें सल्फर डाइ आक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड की मात्रा कितनी रहनी चाहिए, यह मेंटेन कर रहे थे।

एक साल से बंद

& दक्षिण गुजरात में लगभग पचास से अधिक प्रोसेसिंग यूनिट को पेटकॉक के इस्तेमाल के लिए प्रायोगिक तौर पर छूट दी थी, लेकिन पिछले साल मार्च से इसे बंद करा दिया गया।एम.के दासाणी, जीपीसीबी अधिकारी

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