ग्राहकों-खरीदार में तकरार

बड़े नोट बंद होने की घोषणा का असर लोगों की दिनचर्या पर साफ तौर पर दिखा। कहीं सुबह की चाय के लाले

By: मुकेश शर्मा

Published: 09 Nov 2016, 11:20 PM IST

सूरत। बड़े नोट बंद होने की घोषणा का असर लोगों की दिनचर्या पर साफ तौर पर दिखा। कहीं सुबह की चाय के लाले पड़े तो कहीं घरों में सब्जी के बिना ही खाना बना। नौकरीपेशा लोगों ने एक-दो दिन पहले ही एटीएम से बड़े नोट निकाले थे। इन नोटों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं।

बड़े नोट बंद करने के फैसला का पहला दिन निम्न और निम्न मध्यवर्ग पर भारी पड़ा। इसका दूरगामी असर क्या होगा, इस पर लारियों से लेकर हर सार्वजनिक जगह चर्चा होती रही। सुबह चाय की तलब ने लोगों को दूध विक्रेताओं के पास भेजा और यहीं से हील-हुज्जत की शुरुआत हो गई। सरकार की घोषणा सरकारी दूध बूथ पर बड़े नोट स्वीकारने की थी, लेकिन लोग निजी दूध बूथों पर भी यह नोट लेकर पहुंचने लगे। दूध विक्रेता ने जान-पहचान वाले लोगों को उधार देना शुरू कर दिया, लेकिन नोट लेने में असमर्थता जाहिर की। हालांकि कुछ विक्रेताओं ने नोट के बदले दूध दिया, लेकिन बाकी रुपए जमा कर लेने की बात कही। जो ग्राहक इसके लिए तैयार हुए, उन्हें सुबह की चाय में दिक्कत नहीं आई। सोसायटियों में सब्जी बेचने वालों के साथ भी तकरार देखने को मिली।

थोड़ी सब्जी के लिए पांच सौ रुपए का नोट देखते ही विक्रेता बिदक जाता। लारियों पर सब्जी बेचने के बाद नोट की वजह से कई विके्रताओं ने वह वापस ले ली। किराना दुकानों पर दूसरी हालत दिखी। कई विक्रेताओं ने लोगों को किराने का सामान दिया और रुपए भी लौटाए। जिन्होंने पांच सौ-हजार के नोट स्वीकारे, उनके यहां खूब ग्राहकी रही। इसके विपरीत जिन्होंने बड़े नोट के बदले 50-सौ रुपए का सामान लेने वालों को लौटाया, वह दिनभर ग्राहकों की राह तकते रहे।

बड़ी खरीद को टाला

बड़े नोटों को लेकर दिनभर असमंजस का माहौल रहा। लोगों में जानकारी की कमी थी। वह तरह-तरह की चर्चा में मशगूल रहे। बड़े शोरूम और दुकानों में ग्राहकी पर असर पड़ा। लोगों ने कैश खरीद के बजाए एटीएम कार्ड या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल किया। ऑटो वालों और सिनेमा हॉल वालों ने भी 500 और 1000 के नोट स्वीकार नहीं किए।
मुकेश शर्मा Reporting
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