अंतिम संस्कार के लिए नौ घंटे बाद सौंपा वृद्ध का शव

- अव्यवस्था : कोरोना डेडबॉडी सौंपने में जारी है लापरवाही...

- कोविड-19 हॉस्पिटल पर छह घंटे, ट्रॉमा सेंटर पर दो घंटे और पोस्टमार्टम रूम पर एक घंटे का इंतजार

- 10 डॉक्टरों की डेड बॉडी मैनेजमेंट कमेटी सिर्फ कागजों पर

By: Sanjeev Kumar Singh

Updated: 08 Apr 2021, 10:22 PM IST

सूरत.

न्यू सिविल के कोविड-19 हॉस्पिटल में कोरोना से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पलसाणा निवासी एक वृद्ध की बुधवार सुबह सात बजे मौत हो गई और परिजनों को शाम 4 बजे शव अंतिम संस्कार के लिए सौंपा गया। परिजनों ने बताया कि कोरोना डेडबॉडी को सौंपने में अभी भी नौ से दस घंटे का समय लग रहा है। प्रशासन ने डेडबॉडी मैनेजमेंट के नाम पर 10 सीनियर डॉक्टरों की नियुक्ति की है, लेकिन डेडबॉडी मैनेजमेंट कमेटी सिर्फ कागजों पर ही कार्यरत है।

जानकारी के मुताबिक, पलसाणा जलाराम नगर चलथाण निवासी अशोक मैसुरिया (64) चिकित्सकों ने करोना होने पर वेंटिलेटर पर भर्ती करने के लिए कहा। उसे कोविड-19 हॉस्पिटल में भर्ती करने के बाद उसकी बुधवार सुबह 6.50 बजे मौत हो गई। चिकित्सकों ने परिजनों को घटना की जानकारी दी। बड़ा भाई मनोज और परिवार के लोग हॉस्पिटल पहुंच गए और शव मांगा। उन्हें बताया गया कि केस बहुत ज्यादा है तो समय लगेगा। परिजन हॉस्पिटल के बाहर इंतजार करते रहे। सुबह ग्यारह बजे तक भी परिवार को शव नहीं मिला। परिवार के लोगों ने फिर से अस्पताल प्रशासन से डेडबॉडी की मांग की। उन्हें कुछ देर और इंतजार करने के लिए कहा गया। दोपहर एक बजे तक इंतजार करने के बाद परिवार ने आपा खो दिया और स्टाफ से गुस्से में शव सौंपने के लिए कहा। इसके बाद चिकित्सकों ने डेथ स्लिप तैयार कर वार्डबॉय को दे दी और शव को पोस्टमार्टम रूम से ले जाने के लिए कहा।

परिवार के लोग ट्रोमा सेंटर पहुंचे लेकिन डेथ स्लिप पर मृतक को कोरोना पॉजिटिव और निगेटिव दोनों बताया गया था। जिसके कारण असमंजस की स्थिति हो गई। परिवार के लोगों ने ट्रॉमा सेंटर के बाहर ओपीडी आने-जाने वाले रास्ते पर करीब दो बजे तक इंतजार किया। इसके बाद चिकित्सकों ने मृतक को कोरोना पॉजिटिव होने के अलग से कागज तैयार किये। इसके बाद शाम चार बजे शव को अंतिम संस्कार के लिए शमशान गृह भेजा गया। मनोज ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि सुबह से शाम तक घर के लोग अस्पताल के बाहर शव लेने का भूखे- प्यासे इंतजार करते रहे। सुबह सात बजे मौत होने के बाद शाम चार बजे शव सौंपा गया है।

शव की अदला-बदली के बाद भी नहीं बदले हालात

गौरतलब है कि न्यू सिविल अस्पताल में दो दिन पहले शबाना का शव सुशीला के परिवार को सौंपने का मामला सामने आया था। इसके बाद डेडबॉडी मैनेजमेंट कमेटी बनाई गई है। लेकिन सीनियर डॉक्टर डेडबॉडी मैनेजमेंट के लिए मौक पर पहुंच नहीं रहे हैं।

परिजनों ने स्ट्रेचर पर खींचा शव

मृतक के भाई मनोज ने बताया कि कोविड-19 हॉस्पिटल पर पांच-छह घंटे इंतजार करने के बाद शव प्लास्टिक के बैग में पैक कर सौंपा गया। शव को पोस्टमार्टम रुम तक ले जाने के लिए कोई वाहन की व्यवस्था नहीं थी। एक महिला वार्डबॉय स्ट्रेचर पर शव लेकर आई और परिवार को चलने के लिए कहा। स्ट्रेचर पर शव ले जाने में कर्मचारी को दिक्कत हो रही थी, तब परिवार के लोगों ने स्ट्रेचर खींचने में मदद की।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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