कोरोना से बच गए, पर इलाज में लिया कर्ज बन गया मर्ज

महंगे इलाज का दर्द बाकी है : गुजरात के 4620 लोगों ने बैंक से उधार लेकर इलाज कराया, उधार से इलाज कराने वालों में गुजरात देशभर में 9वें नंबर पर, देश में तमिलनाडु सबसे ऊपर, सरकार ने दिलाया था संपत्ति को गिरवी रखे बिना पांच लाख रुपये तक का ऋण

 

By: विनीत शर्मा

Published: 21 Aug 2021, 08:19 PM IST

विनीत शर्मा

सूरत. बैंकों से उधार लेकर लोगों ने कोरोना संक्रमण से तो पार पा ली, लेकिन अब कर्ज के जाल में फंस गए हैं। रोजगार छूटने ओर कामधंधा पटरी से उतरने के कारण कई लोग इस कर्ज को उतारने में खुद को असहज पा रहे हैं। उधार लेकर कोरोना का इलाज कराने में गुजरात देशभर में नवें नंबर पर है। गुजरात के 4620 लोगों ने बैंकों से उधार लेकर अपना या अपनों का इलाज कराया है। इस मामले में तमिलनाडु शीर्ष पर है।

कोरोना काल में जब कामधंधा व जॉब पटरी से पूरी तरह उतर चुका था और लोगों के पास नकदी संकट था, तब कोरोना का इलाज भी उनके लिए चुनौती बन गया था। ऐसे वक्त में केंद्र सरकार ने भले ही करते हुए देशभर में सरकारी बैंकों को कोरोना के महंगे इलाज के लिए खाताधारकों को बगैर गारंटी पांच लाख तक का ऋण देने के लिए कहा था, लेकिन उसे चुकाने के दर्द बाकी है। हालांकि इसका लाभ लेते हुए देशभर में लोगों ने बैंकों से उधार लेकर संक्रमण की चपेट में आए मरीजों का इलाज कराया था। कोरोना के इलाज के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के सरकारी बैंकों से प्रदेश के 4,620 लोगों ने बैंकों से कर्ज लिया है।

यह थी व्यवस्था

इलाज के लिए यह सॉफ्ट लोन तीन से पांच वर्ष तक के लिए दिया गया है। सरकार ने साफ किया था कि बैंक अपने ग्राहकों को उनकी स्थिति के मुताबिक लोन की पहली किश्त के लिए तीन से छह माह तक का वक्त दे सकती हैं। लोन लेकर इलाज कराने वालों में कई लोग इस अवधि को पार कर चुके हैं। कामधंधा अब तक पटरी पर नहीं लौटने के कारण लोन लेकर इलाज करा चुके कई लोगों के समक्ष लोन की किश्त चुकाने का संकट आ खड़ा हुआ है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि किश्त का जुगाड़ कहां से और कैसे करें, जिससे कि बैंक में उनकी साख बची रह जाए।

1.33 लाख लोगों ने लिया कर्ज

केंद्रीय वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में सरकारी बैंकों से उधार लेकर इलाज कराने वालों का आंकड़ा 1.33 लाख है। कर्ज लेकर इलाज कराने के मामले में गुजरात देशभर में नवें नंबर पर है। इस मामले में तमिलनाडु शीर्ष पर है। यहां 33,917 लोगों ने इलाज के लिए बैंकों से कर्ज लिया है। मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंकड़ा केवल सरकारी बैंकों का है। मंत्रालय की रिपोर्ट ने यह भी साफ नहीं किया कि बैंकों को कितने लोगों ने इलाज के लिए आवेदन किया था। साथ ही निजी बैंकों या दूसरी वित्तीय संस्थाओं से लोन लेकर इलाज कराने वालों की संख्या कहीं अधिक होगी।

राज्य कर्ज लेने वालों की संख्या

तमिलनाडु - 33917
कर्नाटक - 20391
उत्तर प्रदेश - 12,569
पश्चिम बंगाल - 8000
महाराष्ट्र - 7967
उड़ीसा -5522
बिहार - 5151
केरल - 4801
गुजरात - 4620
पंजाब - 3520
तेलंगाना - 3389
मध्य प्रदेश - 3092

विनीत शर्मा Reporting
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