DEO SURAT : परिपत्र जारी करने में डीइओ कार्यालय चुस्त, अमल करवाने में सबसे सुस्त

DEO SURAT : परिपत्र जारी करने में डीइओ कार्यालय चुस्त, अमल करवाने में सबसे सुस्त

Divyesh Kumar Sondarva | Updated: 12 Jun 2019, 08:02:45 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

पत्रिका फोकस
लापरवाही:

विद्यार्थियों की सुरक्षा ताक पर, मात्र जारी होते हैं परिपत्र...

आगम आर्केड हादसे के बाद विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कई कड़े परिपत्र, लेकिन सारी कार्रवाई कागजों में सिमटी

सूरत.

सरथाणा स्थित तक्षशिला आर्केड में हुए अग्निकांड में 22 विद्यार्थियों की असमय मौत के बाद सूरत महानगर पालिका की ओर से शहर के विद्यालयों और ट्यूशन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की गई। विद्यालयों और ट्यूशन केन्द्रों के अवैध डोम और अवैध निर्माण पर हथौड़े चलाए गए। इस कार्रवाई से संचालकों में हड़कम्प मच गया। मनपा की कार्रवाई को देख जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने भी विद्यालय संचालकों को कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी। हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की कार्रवाई महज कागजों तक की सीमित रह गई। पिछले छह माह में आठ से अधिक परिपत्र जारी किए गए हैं, लेकिन यह परिपत्र मात्र खानापूर्ति साबित हुए हैं।
- आगम आर्केड हादसे के समय भी जारी किए थे परिपत्र
वेसू स्थित आगम आर्केड में चल रहे ट्यूशन क्लास में 26 नवम्बर 2018 में आग लगी थी। एक विद्यार्थी और एक शिक्षक की मौत हो गई थी। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से परिपत्र जारी कर विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने का आदेश दिया था। इसमें स्कूलों में फायर सेफ्टी, दमकल विभाग का एनओसी, रोड सेफ्टी, भवन की सुरक्षा को लेकर कड़े आदेश दिए गए थे। जांच का नाटक भी किया गया था, लेकिन मामला शांत होते ही सारी जांच और सारे परिपत्र ठंडे बस्ते में बंद हो गए।

- तक्षशिला अग्निकांड के पहले भी हुई थी जांच
तक्षशिला अग्निकांड से ठीक पहले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से स्कूलों में फायर सेफ्टी की जांच की गई थी। शहर के 700 स्कूलों में से मात्र 50 स्कूलों के पास ही दमकल विभाग की एनओसी मिली। गिनती के स्कूलों में फायर सेफ्टी उपकरण मिले। दमकल विभाग ने 180 से अधिक स्कूलों को नोटिस नोटिस भेजकर विद्यालयों से स्पष्टीकरण मांगा गया और रिपोर्ट बनाकर उसे फायर कर कार्रवाई पूर्ण कर दी गई।


- फिर परिपत्र का खेल किया शुरू
तक्षशिला अग्निकांड के बाद फिर से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से परिपत्र जारी करने का सिलसिला शुरू किया गया। शहर के स्कूलों में प्राचार्यों की टीम बनाकर जांच का खेल खेला गया। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में प्राचार्यों की टीम ने जांच की। फायर सेफ्टी उपकरण नहीं होने पर नोटिस थमाया गया। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर विद्यालयों को सील करने की चेतावनी दी गई। संचालकों ने नए शैक्षणिक सत्र में स्कूल शुरू नहीं करने की चेतावनी दी तो शिक्षा विभाग की ओर से संचालकों को रियायत दे दी गई। विद्यार्थियों की सुरक्षा मात्र फिर एक बार मात्र कागजों में ही सिमट कर रह गई है।

- नवम्बर 2018 से मार्च 2019 तक विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए जारी हुए परिपत्र :
1 नवम्बर 2018 : सेफ होम, सेफ स्ट्रीट अंतर्गत विद्यार्थियों को जागरूक करने का प्रयास
13 नवम्बर 2018 : डिजास्टर पॉलिसी का अमल, विद्यार्थियों की सुरक्षा का जिम्मा रखना
30 नवम्बर 2018 : स्कूल सेफ्टी पॉलिसी का जिले के सभी विद्यालयों में अमल करवाना
1 दिसम्बर 2018 : विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखना, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लेना
19 दिस्मबर 2018 : विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा अंतर्गत सेफ्टी ट्रेनिंग का आयोजन
28 दिस्मबर 2018 : रोड सेफ्टी, ट्राफिक एज्यूकेशन की जानकारी देना
22 मार्च 2019 : स्वनिर्भर-सरकारी विद्यालयों में फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच
26 मार्च 2019 : स्टडी टूर में दुर्घटना से बचने के लिए सावधानी के कदम उठाना

कागजों के भरोसे नहीं रहना चाहिए
विद्यार्थियों की सुरक्षा कागजों के भरोसे नहीं होनी चाहिए। जांच खानापूर्ति वाली नहीं होनी चाहिए। जिम्मेदारी का सही से पालन करे तो ऐसे हादसे नहीं हो। परिपत्र जारी किया जाए तो इस पर अमल सही से हो रहा है या नहीं इस पर भी काम करना चाहिए।
- श्रीराम सोमानी, अभिभावक

प्रशिक्षण देना चाहिए
परिपत्र से ही जिम्मेदारी पूरी नहीं होती है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि शिक्षक और विद्यार्थी को दुर्घटना से बचने का प्रशिक्षण देना चाहिए। फायर के साधन कैसे चलाए जाए, आपातकालीन स्थिति में किस तरह खुद की और अन्य की सुरक्षा का प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए।
- अंकित अग्रवाल, व्यापारी


- सुरक्षा साधनों की नियमित जांच हो
शिक्षा विभाग परिपत्र जारी कर देता है और स्कूल को जिम्मा सौंप देता है। शिक्षा विभाग में एक टीम होनी चाहिए जो स्कूलों की जांच करे। फायर के साधन हों तो वह सही से चल रहे हैं या नहीं। साधन चलाना स्कूल के शिक्षकों या अन्य कर्मचारियों को आता है या नहीं, इसकी जांच हो तो विद्यार्थी की सुरक्षा हो सकती है।
यश सोमानी, विद्यार्थी

अधिकारियों के कार्य पर होनी चाहिए नजर
सरकार जो आदेश जारी करती है, वही आदेश अधिकारी आगे जारी कर देते हैं। सरकार को विद्यालयों के साथ अधिकारियों के कार्य पर नजर रखनी चाहिए। आदेश का सही से पालन हो रहा है या नहीं, इस पर ध्यान देना चाहिए। आदेश का पालन मात्र कागजों पर रह जाए तो अधिकारी पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
रश्मि सिंह, अभिभावक

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