देव गए शयन, रुक गए पाणिग्रहण

25 नवम्बर को देवउठनी एकादशी से होगी फिर से शुरुआत

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 01 Jul 2020, 09:19 PM IST

सूरत. श्रेष्ठ रेखा के वैवाहिक सावों के लिए विवाह के ईच्छुक युवक-युवतियों और उनके परिजनों को अब लम्बा इंतजार करना पड़ेगा। आषाढ़ शुक्ल एकादशी अर्थात देवशयन एकादशी बुधवार से ही पाणिग्रहण संस्कार वाले वैवाहिक आयोजनों पर शास्त्रसम्मत रोक लग गई है। यह रोक अब करीब पांच माह बाद 25 नवम्बर को देवउठनी एकादशी पर ही हटेगी।
गतवर्ष की तुलना में इस वर्ष मकर संक्रांति को धनुर्मलमास की समाप्ति के बाद से ही अच्छी संख्या में वैवाहिक सावे थे। 15 जनवरी मकर संक्रांति के बाद से 30 जून तक कुल 34 वैवाहिक सावे इस बीच आए थे। इसमें जनवरी व फरवरी के सावों को छोड़ दे तो शेष सभी सावे कोविड-19 की चपेट में आ गए। हालांकि मार्च-अप्रेल दो माह भले ही लोगों ने विवाहयोग्य बेटे-बेटियों का पाणिग्रहण संस्कार नहीं किया लेकिन, मई व जून के वैवाहिक सावों में खूब शादियां संपन्न हुई थी। देवशयन एकादशी से एक दिन पहले अर्थात आषाढ़ शुक्ल दशमी मंगलवार को भी शहर में कई दुल्हे घोड़ी पर सवार हुए और दुल्हनों के हाथों में मेहंदी रची। इन सभी आयोजनों में धूमधाम अवश्य नहीं दिखाई दी।


एक माह अतिरिक्त इंतजार


ज्योतिषी डॉ. हरीश जोशी ने बताया कि इस बार आश्विन मास में पुरुषोत्तम मास का आगमन है और इसलिए चातुर्मास काल एक माह अतिरिक्त हो गया है। देवशयन एकादशी से योगनिद्रा में गए भगवान श्रीहरि विष्णु व समस्त देवगण करीब पांच माह बाद 25 नवम्बर देवउठनी एकादशी को जागृत भाव में आएंगे और तब जाकर शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। उसके बाद इस वर्ष कुल नौ वैवाहिक सावे रहेंगे जिन पर पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न किए जा सकेंगे।


14 नवम्बर को मनेगी दीपावली


ज्योतिषी मुकेश पारीक ने बताया कि अधिक मास की वजह से इस बार दशहरा-दीपावली पर्व भी गतवर्ष की तुलना में 15-20 दिन के विलम्ब से आएंगे। दशहरा 26 अक्टूबर व दीपावली 14 नवम्बर को मनाई जाएगी। इसके 11 दिन बाद 25 नवम्बर को देवउठनी एकादशी रहेगी और तब जाकर वैवाहिक सावों की शुरुआत होगी। नवम्बर में 26 व 27 तारीख तथा दिसम्बर में धनुर्मलमास की शुरुआत से पहले तक सात वैवाहिक सावे आएंगे।

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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