DINDOLI RAPE CASE- कोर्ट ने कहा- रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं, लेकिन हैवानियत भरा कृत्य

बलात्कार पीडि़त बच्ची कभी मां नहीं बन सकती, अब भी अहमदाबाद सिविल में उपचार जारी

सूरत

चॉकलेट का लालच देकर डिंडोली की पांच साल की बच्ची के अपहरण और बलात्कार के बाद हत्या की कोशिश करने के मामले में अभियुक्त रोशन भूमिहार को जीवन की अंतिम सांस तक कैद की सजा सुनाते हुए मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर तो नहीं माना, लेकिन फैसले में कहा कि जिस तरह का कृत्य किया गया है, वह हैवानियत भरा है। ऐसे कृत्य के लिए जीवन की अंतिम सांस तक कैद की सजा देना ही न्यायोचित होगा।
संवेदनशील माने जाने वाले इस मामले में पुलिस ने एक महीने में जांच पूरी कर अभियुक्त रोशन भूमिहार के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी थी। तब से मामले की सुनवाई मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में चल रही थी। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी करार दिया। इसके बाद सजा को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें पेश हुईं। विशेष नियुक्त लोकअभियोजक नयन सुखड़वाला ने अभियुक्त को कड़ी से कड़ी सजा सुनाने की मांग की, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने गरीबी का हवाला देते हुए कम सजा सुनाने को कहा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं माना, लेकिन फैसले में कहा कि अभियुक्त ने पीडि़ता के साथ जिस तरह का जघन्य कृत्य किया है, उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। बच्ची के साथ जो कृत्य हुआ, उससे भविष्य में वह मां नहीं बन सकती। फिलहाल बच्ची का अहमदाबाद सिविल अस्पताल में उपचार चल रहा है। घटना के वक्त बच्ची ने जब पानी मांगा था, तो अभियुक्त ने पानी देने के बजाए उसे पीटा था और गला दबाकर उसकी हत्या की कोशिश की थी। इसे हैवानियत भरा कृत्य ही कहा जा सकता है।


बच्ची अब भी जोखिम में: अभियोजन पक्ष

सुनवाई के दौरान विशेष लोकअभियोजक नयन सुखड़वाला और अधिवक्ता अश्विन पेंटर ने दलीलें पेश करते हुए अभियुक्त को फांसी या अंतिम सांस तक कैद की सजा सुनाने की मांग की। उन्होंने अपनी दलीलों में कहा कि अभियुक्त ने बच्ची के साथ जघन्य कृत्य किया है। बच्ची के अब तक छह ऑपरेशन हो चुके हैं। बुधवार को ही अहमदाबाद सिविल में एक ऑपरेशन हुआ है। बच्ची शौच क्रिया की चेतना गंवा चुकी है। मेडिकल जांच के पेपर्स देखने से कहा जा सकता है कि यह बच्ची का नसीब है या बदनसीबी कि वह बच गई, क्योंकि उसका भविष्य जोखिम भरा है। वह जीवन में कभी मां नहीं बन सकती। अभियुक्त ने उसे जिस तरह के घाव दिए है, जिंदगीभर उसे इस घिनौनी घटना की याद दिलाते रहेंगे। इस मामले में कम सजा न्यायोचित नहीं होगी। सजा सुनाते वक्त गुनाह की गंभीरता को ध्यान में रखना चाहिए। इस मामले में अभियुक्त के बर्ताव से अपराध की गंभीरता का पता चलता है। उसने उत्तेजित होकर वारदात को अंजाम नहीं दिया, बल्कि सोच-समझकर बच्ची का अपहरण किया और उसके साथ बलात्कार के बाद पकड़े जाने के डर से गला दबा कर उसकी हत्या की कोशिश की, जो विकृत मानसिकता की चरम सीमा कही जा सकती है।


मेडिकल जांच रिपोर्ट और बच्ची के बयान अहम साबित हुए

अभियुक्त को दोषी करार देने और सजा सुनाने के लिए पूरे मामले में बच्ची के बयान और मेडिकल जांच रिपोर्ट अहम साबित हुई। 29 सितम्बर, 2018 को घटना सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच पुलिस ने एक महीने में जांच पूरी कर 2 नवम्बर को कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी थी। 16 अक्टूबर से कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई और 24 अगस्त को पूरी हो गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 26 गवाह और मेडिकल जांच, फोरेंसिक जांच, पंचनामा समेत 35 दस्तावेजी सूबत पेश किए। बच्ची की उम्र सिर्फ पांच साल होने के कारण उसके बयान दर्ज करना मुश्किल था। इसके बावजूद कोर्ट में बनाए गए चाइल्ड फ्रेन्डली कोर्ट में बच्ची के बयान दर्ज किए गए।


जांच के लिए बनाई गई थी विशेष टीम
एक ही दिन में डिंडोली क्षेत्र में लगातार दो बच्चियों से बलात्कार के मामले सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश था, जिसे देखते हुए राज्य सरकार की ओर से इन मामलों की जांच के लिए विशेष टीम बनाई गई थी। इसमें सहायक पुलिस आयुक्त आर.ए.मुंशी की निगरानी में क्राइम ब्रांच के पुलिस निरीक्षक ए.के.चौहाण को विशेष जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान पैरवी के लिए मुख्य जिला लोकअभियोजक नयन सुखड़वाला की विशेष लोकअभियोजक के तौर पर नियुक्ति की गई तथा जुवेनाइल बोर्ड सदस्य प्रतिभा देसाई और अधिवक्ता अश्विन पेंटर को भी शामिल किया गया।

किस धारा के तहत कितनी सजा
धारा सजा
आइपीसी 307 7 साल
आइपीसी 363 5 साल
आइपीसी 366 7 साल
आइपीसी 376(2)(3) अंतिम सांस तक कैद
आइपीसी 376(2)(एम) अंतिम सांस तक कैद
आइपीसी 376(ए)(बी) अंतिम सांस तक कैद
आइपीसी 377 7 साल
आइपीसी 326 5 साल
आइपीसी 324 1 साल
आइपीसी 201 2 साल
पॉक्सो एक्ट 5(आइ),5(एम),5(आर),6 10 साल
पॉक्सो एक्ट (4) 7 साल

Sandip Kumar N Pateel
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