scriptDispute again between resident doctor and CMO, mental patient left in | रेजिडेंट डॉक्टर और सीएमओ के बीच फिर विवाद, ट्रॉमा में छोड़ गए मानसिक रोगी को | Patrika News

रेजिडेंट डॉक्टर और सीएमओ के बीच फिर विवाद, ट्रॉमा में छोड़ गए मानसिक रोगी को

- न्यू सिविल अस्पताल : मरीजों को भर्ती करने में रेजिडेंट डॉक्टरों की टालमटोल...

- सीएमओ ने मेडिसिन विभाग में मरीज को भर्ती कर काम चलाया तो सुबह उन्होंने भी मरीज को दे दी छुट्टी

 

सूरत

Published: August 13, 2021 09:29:55 pm

सूरत.

न्यू सिविल अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों को परेशानी तो हो ही रही है। इधर, बुधवार रात को इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर में आए एक मरीज को सीएमओ द्वारा मानसिक रोग विभाग में भर्ती करने पर विवाद खड़ा हो गया। मानसिक रोग विभाग के चार रेजिडेंट रात में मरीज को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंच गए और सीएमओ से झगड़ा करने लगे। रेजिडेंट मरीज को ट्रॉमा सेंटर में ही छोडक़र चले गए। इसके बाद सीएमओ ने मरीज को मेडिसिन विभाग में भर्ती किया। गुरुवार सुबह मामला उजागर होने पर मानसिक रोग विभाग ने मरीज को भर्ती कर इलाज शुरू किया है।
रेजिडेंट डॉक्टर और सीएमओ के बीच फिर विवाद, ट्रॉमा में छोड़ गए मानसिक रोगी को
रेजिडेंट डॉक्टर और सीएमओ के बीच फिर विवाद, ट्रॉमा में छोड़ गए मानसिक रोगी को
न्यू सिविल से मिली जानकारी के मुताबिक, उधना निवासी राजू (52) बुधवार रात को घर में धमाल मचाने लगा। परिवार के लोग उसे न्यू सिविल अस्पताल ट्रॉमा सेंटर लेकर आए। ऑनड्यूटी सीएमओ डॉ. तेजस चौहाण ने परिवार से मिली हिस्ट्री के आधार पर राजू को मानसिक रोग विभाग में रेफर कर दिया। साथ ही मानसिक रोग विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर को मरीज के बारे में सूचना दी। इसके बाद मानसिक रोग विभाग के रेजिडेंट ने मरीज को मेडिसिन और सर्जरी विभाग में रेफर कर दिया। परिजन मरीज को लेकर फिर से ट्रॉमा सेंटर पहुंच गए। अब मेडिसिन और सर्जरी विभाग के रेजिडेंट ने भी अपनी फाइंडिंग लिखने के बाद मरीज को मानसिक विभाग में जाने के लिए कहा। सीएमओ डॉ. तेजस ने मरीज को काफी देर तक यहां से वहां दौड़ाए जाने के कारण उसे मानसिक रोग विभाग में भर्ती कर दिया। इसके बाद मानसिक रोग विभाग में मरीज पहुंचा तो रेजिडेंट डॉक्टरों ने हमारा केस नहीं होने को लेकर विवाद खड़ा कर दिया।
इसके बाद मानसिक रोग विभाग के चार रेजिडेंट मरीज को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंच गए और सीएमओ डॉ. तेजस से उसे भर्ती क्यों किया कहकर, बहस करने लगे। कुछ देर बाद मानसिक रोग विभाग के रेजिडेंट मरीज को ट्रॉमा सेंटर में ही छोडक़र चले गए। इसके बाद डॉ. तेजस ने उसे मेडिसिन विभाग में भर्ती किया, लेकिन मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने भी मरीज को गुरुवार सुबह उसे छुट्टी देकर घर जाने के लिए कह दिया। परिजन उसे ट्रॉमा सेंटर लेकर आए तब पूरा मामला उजागर हुआ। इसके बाद फिर से मरीज को मानसिक रोग विभाग में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया है।
आदेश के बावजूद

गौरतलब है कि 6 अगस्त 2019 को अस्पताल अधीक्षक ने इमरजेंसी के मरीजों को एक घंटे में वार्ड में भर्ती करने के आदेश जारी किए हैं। इसके बावजूद रेजिडेंट डॉक्टर कोविड-19 खत्म होने के बाद से ही आए दिन मरीजों को भर्ती नहीं करते और 4 से 5 घंटे या इससे भी अधिक देर तक यहां से वहां विभागों में दौड़ाते रहते हैं।
रेजिडेंट डॉक्टर और सीएमओ के बीच फिर विवाद, ट्रॉमा में छोड़ गए मानसिक रोगी कोलीवर फंक्शन टेस्ट नहीं करने का बहाना

पूर्व में भी मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक समेत अलग-अलग विभागों द्वारा मरीज को भर्ती नहीं करने के मामले सामने आते रहे हैं। विभिन्न विभागों के रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच तालमेल नहीं होने के कारण मरीज को भर्ती नहीं करते है। बुधवार रात को हुई घटना में मानसिक रोग विभाग ने लीवर फंक्शन टेस्ट नहीं करवाए जाने के कारण मरीज को भर्ती करने से मना किया था। मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने लीवर फंक्शन टेस्ट करवाया जो नॉर्मल था, इसके बाद मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर ने मरीज को भर्ती किया है।
सीएमओ ने अधीक्षक को की शिकायत

सीएमओ डॉ. तेजस चौहाण ने बुधवार रात को मानसिक रोग विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुए झगड़े की लिखित शिकायत न्यू सिविल अस्पताल अधीक्षक डॉ. गणेश गोवेकर को की है। इसमें उन्होंने मानसिक रोग विभाग के रेजिडेंट डॉ. शुभम, डॉ. गर्गी समेत दो अन्य महिला रेजिडेंट डॉक्टर का नाम बताते हुए अभद्रता करने की जानकारी दी है। इसके अलावा सीएमओ टीम ने डॉ. गणेश गोवेकर के साथ बैठक की है। इसमें डॉ. गोवेकर ने ट्रॉमा सेंटर में इमरजेंसी के मरीज को एक घंटे में भर्ती करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, रेजिडेंट डाक्टरों को भी सीएमओ से मरीज को भर्ती करने पर विवाद या झगड़ा नहीं करने की भी ताकीद दी गई है।
रेजिडेंट डॉक्टरों ने गलती की थी। वार्ड में मरीज की देखभाल की है। रेजिडेंट को फिर ऐसा न हो इसके लिए कड़े निर्देश दिए हैं। किसी दूसरे विभाग में भेजने का रेफरेंस देकर उनके सीनियर डॉक्टर को सूचना दे सकते हैं।
- डॉ. ऋतंभरा मेहता, एचओडी/डीन, मानसिक रोग विभाग और गर्वमेंट मेडिकल कॉलेज, सूरत।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

बड़ी खबरें

पंजाबः अवैध खनन मामले में ईडी के ताबड़तोड़ छापे, सीएम चन्नी के भतीजे के ठिकानों पर दबिशUttarakhand Election 2022: हरक सिंह रावत को लेकर कांग्रेस में विवाद, हरीश रावत ने आलाकमान के सामने जताया विरोधUP Election 2022 : अखिलेश के अन्न संकल्प के बाद भाकियू अध्‍यक्ष का यू टर्न, फिर किया सपा-रालोद गठबंधन के समर्थन का ऐलानभारत के कोरोना मामलों में आई गिरावट, पर डरा रहा पॉजिटिविटी रेटभगवंत मान हो सकते हैं पंजाब में AAP के सीएम उम्मीदवार! केजरीवाल आज करेंगे घोषणाpm svanidhi scheme: रोजगार करना चाहते हैं तो बिना गारंटी ले लोन, ब्याज पर 7% मिलेगी सब्सिडीसचिन तेंदुलकर के नाक से बह रहा था खून, फिर भी बोला- 'मैं खेलेगा'नोएडा-गाजियाबाद समेत पूरे एनसीआर में 21-23 जनवरी तक बारिश की संभावना: मौसम विभाग
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.