Admission 2018 : मेडिकल और पेरा-मेडिकल में प्रवेश के लिए कड़ा मुकाबला

सीटें 27 हजार और इस बार दावेदार 53 हजार से ज्यादा,
मनपसंद पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिला तो बीएससी के लिए दौड़

By: Divyesh Kumar Sondarva

Published: 16 May 2018, 08:37 PM IST

सूरत.

राज्य के मेडिकल और पेरा-मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए इस बार कड़ा मुकाबला होगा। गुजरात बोर्ड के 53 हजार विद्यार्थियों के मुकाबले मेडिकल और पेरा-मेडिकल की 27 हजार सीटें ही हैं। मनपसंद पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिला तो विद्यार्थी बीएससी पाठ्यक्रम की ओर दौड़ लगाएंगे।
गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं विज्ञान वर्ग परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद प्रवेश को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बार विज्ञान वर्ग के बी ग्रुप में 53 हजार 511 विद्यार्थी पास हुए हैं। अभी सीबीएसइ का परिणाम बाकी है। सीबीएसइ के परिणाम के बाद बी ग्रुप में पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या और बढ़ेगी। बी ग्रुप के ज्यादातर विद्यार्थी मेडिकल और पेरा-मेडिकल में प्रवेश की इच्छा रखते हैं। मेडिकल और पेरा-मेडिकल की राज्यभर में करीब 27 हजार सीटें हैं। मेडिकल में प्रवेश के लिए नीट अनिवार्य है। पिछले साल नीट परीक्षा के लिए रिकॉर्डतोड़ विद्यार्थियों ने पंजीकरण करवाया था। इस साल नीट की परीक्षा देने वालों की संख्या बढ़ी है। इसलिए मेडिकल में प्रवेश के लिए पहले ही कड़ी स्पर्धा है। जिनको मेडिकल में प्रवेश नहीं मिलता, वह फार्मेसी की ओर दौड़ते हैं। जितने विद्यार्थी बी ग्रुप में पास हुए हैं, फार्मेसी की सीटें उससे आधी हैं। इसलिए फार्मेसी में भी कड़ी टक्कर होने वाली है। मेरिट का कट ऑफ ऊंचा जाएगा और एक-एक प्रतिशत पर विद्यार्थी का भविष्य निर्भर करेगा। यहां प्रवेश नहीं मिल पाया तो अंत में विद्यार्थी बीएससी की ओर मुड़ेंगे। हर साल बीएससी में प्रवेश के लिए भी कड़ी स्पर्धा होती है। वीएनएसजीयू के सभी साइंस कॉलेजों की सीटें भर जाती हैं। हजारों विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। इन्हें प्रवेश के लिए सीटें बढ़ाने की मांग होती है और जैसे-तैसे प्रवेश दिया जाता है।

इंजीनियरिंग में सीटें ज्यादा, दावेदार कम
दूसरी ओर इंजीनियङ्क्षरग की सीटों के मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या कम है। इंजीनियङ्क्षरग की हजारों सीटें हर साल खाली रह जाती हैं। इन्हें भरने के लिए बी ग्रुप के विद्यार्थियों को इंजीनियङ्क्षरग में प्रवेश दिया जाता है। बी ग्रुप के विद्यार्थियों के लिए गणित की विशेष परीक्षा ली जाती है। इसके आधार पर उन्हें प्रवेश दे दिया जाता है, फिर भी इंजीनियङ्क्षरग की हजारों सीट खाली पड़ी रहती हैं। इंजीनियङ्क्षरग में प्रवेश का जिम्मा एसीपीसी को सौंपा गया है। एसीपीसी ने फिलहाल न तो प्रवेश प्रक्रिया की घोषणा की है और न ही इंजीनियरिंग कॉलेजों की सीटों, ब्रांच तथा फीस के बारे में कोई सूची जारी की है।

पाठ्यक्रमों की मांग
सीनेटर मनीष कापडिया और गणपत धामेलिया ने वराछा के आत्मानंद सरस्वती कॉलेज में बीएससी केमेस्ट्री, मेथ्स, मायक्रो बायोलोजी और कम्प्यूटर साइंस पाठ्यक्रम शुरू करने की मांग की है। दोनों सीनेटर ने कुलपति को पत्र लिखकर कॉलेज को साइंस के पाठ्यक्रम नए शैक्षणिक सत्र से शुरू करने की अनुमति देने का आग्रह किया है।

Divyesh Kumar Sondarva Reporting
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