टैक्सटाइल की मंदी ने घटा दी माल ढुलाई

टैक्सटाइल मार्केट की मंदी ने सूरत रेलवे पार्सल विभाग की कमाई घटा दी है। उत्तर और दक्षिण भारत जाने वाले पार्सल घट गए हैं। पिछले साल सितम्बर में पार्सल विभाग की आय ५७ लाख ५० हजार रुपए थी, जो इस साल सितम्बर में ५६ लाख रुपए रही। पार्सल विभाग में बुक किए जाने वाले पार्सल समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंचते, इसलिए भी कपड़ा व्यापारी ट्रकों के जरिए पार्सल भेजना पसंद करते हैं।

By: मुकेश शर्मा

Published: 18 Dec 2018, 11:12 PM IST

सूरत।टैक्सटाइल मार्केट की मंदी ने सूरत रेलवे पार्सल विभाग की कमाई घटा दी है। उत्तर और दक्षिण भारत जाने वाले पार्सल घट गए हैं। पिछले साल सितम्बर में पार्सल विभाग की आय ५७ लाख ५० हजार रुपए थी, जो इस साल सितम्बर में ५६ लाख रुपए रही। पार्सल विभाग में बुक किए जाने वाले पार्सल समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंचते, इसलिए भी कपड़ा व्यापारी ट्रकों के जरिए पार्सल भेजना पसंद करते हैं।


नई दिल्ली और अहमदाबाद रूट पर मुख्य स्टेशन होने के कारण सूरत करंट और आरक्षित टिकटों की बिक्री के अलावा पार्सल विभाग से आय का एक बड़ा स्रोत है। कपड़ा बाजार का माल रेल के जरिए भी अलग-अलग शहरों तक पहुंचता है। इससे पार्सल विभाग को हर महीने 35 से 50 लाख रुपए की आय होती है। त्योहारों के सीजन में आय बढक़र पचास लाख से एक करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। इस साल टैक्सटाइल मार्केट की मंदी ने सूरत पार्सल विभाग की दीपावली बिगाड़ दी।

उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और नई दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में पार्सल अधिक भेजे जाते हैं। उत्तरप्रदेश और बिहार के लिए सूरत-छपरा ताप्ती गंगा एक्सप्रेस, सूरत-भागलपुर एक्सप्रेस, बान्द्रा-गोरखपुर अवध एक्सप्रेस, बान्द्रा-मुजफ्फरपुर अवध एक्सप्रेस से पार्सल भेजे जाते हैं।

पश्चिम बंगाल के पार्सल अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस और हापा-हावड़ा एक्सप्रेस में भेजे जाते हैं, जबकि नई दिल्ली की ओर पार्सल भेजने के लिए मुम्बई सेंट्रल-फिरोजपुर जनता एक्सप्रेस और बान्द्रा टर्मिनस-अमृतसर पश्चिम एक्सप्रेस मुख्य गाडिय़ां हैं। दक्षिण भारत जाने वाली अहमदाबाद-चैन्नई नवजीवन एक्सप्रेस और पोरबंदर-कोचुवेली एक्सप्रेस के अलावा मुम्बई-नई दिल्ली राजधानी, मुम्बई सेंट्रल-निजामुद्दीन अगस्त क्रांति राजधानी, बान्द्रा-निजामुद्दीन गरीब रथ में भी पार्सल जाते हैं।

पार्सल विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक इस बार दीपावली पर पार्सलों की संख्या ज्यादा नहीं रही। पहले त्योहारों के सीजन में म-ुम्बई, अहमदाबाद और वड़ोदरा से पार्सल यान भरकर आने से परेशानी होती थी, लेकिन इस बार सूरत के पार्सल कम थे, इसलिए इन्हें चढ़ाने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

जगह की दिक्कत नहीं

नोटबंदी और जीएसटी के बाद मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव आया है। सूरत पार्सल विभाग से पार्सल भेजने में इन दिनों जगह की दिक्कत नहीं आ रही है।
हीरेन शाह, चीफ पार्सल सुपरवाइजर, सूरत रेलवे पार्सल विभाग।

बुकिंग पर असर

कपड़ा मार्केट से ज्यादातर पार्सल ट्रकों के जरिए भेजे जाते है। ट्रेनों के जरिए भी पार्सल अलग-अलग शहरों में भेजे जाते हैं। पहले सीजन में २०० से २५० पार्सल बुक होते थे। यह संख्या अब घटकर सौ से सवा सौ रह गई है। रमेश प्रजापति, एयरवाइड एक्सप्रेस कार्गो (लीजधारक)

मुकेश शर्मा Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned