surat textile market कोरोना से उबरे तो किसान आंदोलन में उलझे

दिल्ली में किसान आंदोलन ने की सूरत के कपड़ा बाजार पर चोट, काम घटा तो एम्ब्रायडरी उद्योग भी रह गया आधा, वीविंग और प्रोसेस उद्योग पर भी पड़ा असर, लग रहा रोजाना सौ करोड़ रुपए से अधिक का फटका

By: विनीत शर्मा

Published: 14 Feb 2021, 06:43 PM IST

विनीत शर्मा

सूरत. किसी तरह कोरोना से उबरे टैक्सटाइल उद्योग पर अब किसान आंदोलन की मार पडऩे लगी है। दिल्ली में किसानों के डेरा डालने से दिल्ली ही नहीं आसपास के दूसरे इलाकों में भी मांग घट गई है। इसका असर एम्ब्रायडरी समेत टैक्सटाइल से जुड़े अन्य उद्योगों पर भी पड़ा है। टैक्सटाइल उद्योग को रोजाना करीब सौ करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

बीते लंबे अरसे से दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का असर अब सूरत के कपड़ा उद्योग पर पडऩे लगा है। बीता पूरा साल कोरोना में गंवाने के बाद कारोबारियों को उम्मीद थी कि अब अच्छे दिन आएंगे। कोरोना के बाद निकली खरीद से बाजार गुलजार हुआ था और जिनका बरसों पुराना स्टॉक अटका हुआ था, वह भी निकल गया। कारोबारियों की उम्मीद परवान चढ़ती उससे पहले किसान आंदोलन ने बाजार की रौनक छीनना शुरू कर दिया है। बीते करीब तीन महीने से किसानों ने दिल्ली घेर रखी है। इससे दिल्ली और आसपास पश्चिम उत्तर प्रदेश, हरियाण, पंजाब व राजस्थान के दिल्ली से सटे इलाकों में कारोबारी गतिविधियां थम सी गई हैं।

दिल्ली बंद का असर सूरत के उन कारोबारियों पर पड़ रहा है, जिनका काम-धंधा प्रभावित इलाकों से जुड़ा है। स्थिति यह है कि मांग नहीं निकलने के कारण वीविंग उद्योग में डिमांड कम हो गई है। इस वजह से प्रोसेसर्स के काम पर भी असर पडऩे लगा है। सबसे ज्यादा असर वैल्यू एडीशन पर पड़ा है। काम नहीं होने के कारण एम्ब्रायडरी का जॉबवर्क आधा रह गया है। जहां पहले दो पालियों में काम हो रहा था, अब एक ही पाली में काम हो रहा है। जानकारों के मुताबिक करीब 30 हजार एम्ब्रायडरी मशीनें बंद हो गई हैं।

इस तरह बिगड़ी पूरी चेन बिगड़ी

दिल्ली और आसपास की मंडियों में मांग नहीं निकलने से ग्रे की मांग में कमी आई है। ग्रे का असर यार्न बाजार पर पड़ा। साथ ही ग्रे की मांग घटने से प्रोसेसर्स के काम में भी मंदी आ गई। दिल्ली और पंजाब में एम्ब्रायडरी की अधिक डिमांड रहती है। ऐसे में सबसे ज्यादा असर एम्ब्रायडरी उद्योग पर पड़ा और काम आधा रह गया। किसान आंदोलन से बाजार को रोजाना औसतन डेढ़ सौ करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

वीविंग पर असर

किसान आंदोलन के कारण मांग में कमी आई है। इसका असर वीविंग इंडस्ट्री पर भी पड़ा है।
अशोक जीरावाला, प्रमुख, फोग्वा

दिखने लगा असर

पहले कम था, लेकिन अब प्रोसेस उद्योग पर किसान आंदोलन का असर दिखने लगा है। मांग नहीं निकलने के कारण काम आना कम हुआ है।
जीतू वखारिया, प्रमुख, दक्षिण गुजरात टैक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन, सूरत

कम हुई डिमांड

जिन कपड़ा व्यवसायियों का कारोबार दिल्ली और आसपास की मंडियों से हो रहा है, उन पर बड़ा असर पड़ा है। मांग में कमी के कारण उनको मुश्किल आ रही है। डिमांड 25 फीसदी तक गिरी है।
अजय श्रीराम, महासचिव, सूरत आढतिया कपड़ा एसोसिएशन, सूरत

घट गया काम

किसान आंदोलन के कारण एम्ब्रायडरी के काम में कमी आई है। उन लोगों को नुकसान हो रहा है, जो दिल्ली और उससे सटी मंडियों में काम कर रहे हैं।
श्रवणकुमार जोशी, आंजणा फार्म एम्ब्रायडरी ओनर्स एसोसिएशन

विनीत शर्मा Reporting
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