FEE ISSUE : फीस नहीं तो प्रवेश नहीं, एलसी ले जाओ

- फीस विवाद जारी, स्कूल ने कइयों को 11वीं कक्षा में नहीं दिया प्रवेश
-पुराने सत्र के साथ नए सत्र की फीस भरने के बाद ही प्रवेश देने की शर्त

By: Divyesh Kumar Sondarva

Published: 07 Jun 2018, 09:10 PM IST

सूरत.

शहर की स्कूलों में फीस का विवाद थम नहीं रहा है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में अब गिनती के दिन बाकी हैं। फीस का विवाद अभिभावकों और विद्यार्थियों को परेशान कर रहा है। शहर के एक स्कूल ने फीस के कारण कई विद्यार्थियों को 11वीं कक्षा में प्रवेश देने से इनकार कर दिया है। फीस भरने पर ही प्रवेश देने की शर्त रखी गई है।
फीस का विवाद पिछले दो शैक्षणिक सत्र से चल रहा है। फीस को नियंत्रित करने के लिए एफआरसी गठित की गई, लेकिन कई स्कूल अदालत में केस लड़ रहे हैं और मनमानी फीस वसूल रहे हैं। ऐसे स्कूलों पर प्रशासन भी लगाम नहीं लगा पा रहा है। 11जून से राज्यभर में शैक्षणिक सत्र का आगाज होने वाला है। स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। जिन्होंने फीस नहीं भरी है, उन विद्यार्थियों को निजी स्कूलों ने प्रवेश देने से साफ मना कर दिया है। इनसे नई फीस के साथ पुराने सत्र की शेष फीस भी मांगी जा रही है। शहर के एक स्कूल ने तो मात्र 400 रुपए कम भरने के कारण विद्यार्थियों को आगे प्रवेश नहीं दिया है। ऐसे विद्यार्थियों के अभिभावकों को नोटिस भेजकर शेष फीस भरने के लिए कहा गया है। फीस नहीं भरने पर एलसी थमा देने की चेतावनी दी गई है। एक स्कूल ने तो एलसी थमा भी दिया है। एलसी पर फीस नहीं भरने के कारण एलसी थमाने की सूचना भी लिख दी गई, जिससे विद्यार्थी को अन्य स्कूल में प्रवेश लेने में परेशानी हो। ऐसे सभी मामलों में जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत की गई, लेकिन एक भी मामले में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एलसी भेज दी

अब शहर के एक स्कूल ने फीस नहीं भरने वाले विद्यार्थियों को कुरियर से एलसी भेज दी है। साथ ही उस पर लिखा गया है कि फीस नहीं भरने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया है। गौरतलब है कि एलसी विद्यार्थी के लिए काफी महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र है। अन्य स्कूल व कॉलेज के साथ अन्य कई सरकारी कार्यों में एलसी की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में एलसी पर फीस नहीं भरने का कारण लिखे जाने से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। आगे अन्य स्कूलों में प्रवेश लेने में भी परेशानी हो सकती है।

Divyesh Kumar Sondarva Reporting
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