OMG : पहली बार एक ही दिन में साइबर क्राइम के 36 मामले दर्ज

 

- कइयों की शिकायतें तो पिछले साल से लंबित थी

- Many of the complaints were pending since last year.

By: Dinesh M Trivedi

Published: 04 Mar 2021, 10:07 AM IST

दिनेश एम.त्रिवेदी
सूरत. शहर के आपराधिक इतिहास पहली बार एक ही दिन में 15 पुलिस थानों में साइबर अपराध से जुड़े 36 मामले दर्ज हुए हैं। ऐसा नहीं कि यह सारे अपराध एक ही दिन में हुए। इनमें से कुछ मामले की शिकायतें तो पिछले साल हुई थी, लेकिन वे तब से लंबित थीं। शिकायतें मिलने के बावजूद थानों में अधिकृततौर पर प्राथमिकियां दर्ज नहीं की गई थी।

दो दिन पूर्व इन लंबित मामलों की आलाधिकारियों के निर्देशन में समीक्षा की गई और फिर मंगलवार को शहर के डूमस, इच्छापोर, जहांगीरपुरा, अडाजण, रांदेर, अमरोली, गोडादरा, पांडेसरा, उमरा, अठवालाइन्स, सलाबतपुरा, डिंडोली, पूणागाम, उधना, लिम्बायत व सरथाणा थानों में कुल 36 मामले दर्ज किए गए। इनमें से कुछ मामले तो सोशल मीडिया पर फेक अकाउन्ट बना कर बदनाम करने, छेड़छाड़ करने के है।

जबकि अधिकतर मामले विभिन्न तरीकों से झांसा देकर रुपए ऐंठने के हैं। दो चार हजार से लेकर 2.59 लाख रुपए की ठगी तक शामिल है। ईनाम में कार लगने, क्रेडिट लिमिट बढ़ाने, रेलवे टिकट का रिफंड करने, विदेश में नौकरी दिलवाने, एनआरआई युवतियों से मिलवाने, फ्रेंडशिप क्लब की सदस्य बनाने, ऑनलाइन शॉपिंग व डेटा हेकिंग ठगी की गई है। पीडि़तों ने तो इन मामलों की लिखित शिकायतें दे दी थी। लेकिन पुलिस ही कार्रवाई में ढिलाई बरत रही थी। पुलिस पर दिनों दिन भार बढ़ता ही जा रहा था।

संसाधनों के अभाव में पुलिस लाचार, दो माह में 300 से अधिक शिकायतें :

देशभर में डिजिटलाइजेशन के साथ-साथ साइबर अपराध भी दिन दो गुनी और रात चौगुनी तेजी से बढ़ रहे है लेकिन पर्याप्त संसाधनों के अभाव में पुलिस साइबर अपराधों से निपटने में लाचार है। न तो पुलिस के पास साइबर अपराधों के पेचिंदगियों को समझने के लिए तकनीकी दक्षता है और न ही उतना मेनपावर है। यही कारण है कि साइबर अपराध से जुड़े छोटे मामलों की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी जाती है।

वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या समिति है। वहीं, साइबर अपराधियों का दायरा भी व्यापक है। वे शहर बहुत दूर अन्य राज्यों से अपराधों को अंजाम देते है। ऐसे में पुलिस को जांच में समय भी अधिक लगता है। ऐसे में जब भी थानों में साइबर अपराधों से जुड़ी शिकायत पहुंचती है तो तुंरत प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई में पुलिस कन्नी काटती है और थानों में लंबित शिकायतों के ढेर जमा हो जाते है। सूत्रों की माने तो पिछले करीब दो माह में ही पुलिस को 300 से अधिक शिकायतें मिली है। हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टी नहीं की है।

इनका कहना

साइबर क्राइम से जुड़े मामलों की जांच पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा की जाती है। अधिकतर मामले अंतरराज्जीय होने के कारण इनकी जांच में काफी समय भी लगता है। इस वजह से शिकायतें मिलते ही तुंरत प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती है। काफी शिकायतें लंबित थी इसलिए उनकी समीक्षा कर कार्रवाई की जा रही हैं।
- अजय कुमार तोमर ( पुलिस आयुक्त )

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Dinesh M Trivedi Reporting
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