कोरोना के बाद लेप्टोस्पायरोसिस के पांच मरीज भर्ती, एक की मौत

- एक गई नहीं कि दूसरी आ गई बीमारी...

- इस सीजन में सबसे कम केस दर्ज हुए, सूरत और तापी जिले में दो-दो और वलसाड क्षेत्र का एक निवासी

By: Sanjeev Kumar Singh

Updated: 19 Sep 2020, 11:02 PM IST

सूरत.

मानसून सिजन में दिखाई देने वाले लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी के दक्षिण गुजरात में अब तक पांच मरीज सामने आए है। इसमें सूरत जिले के महुआ तहसील निवासी एक व्यक्ति की न्यू सिविल अस्पताल में मौत हुई है। इस सीजन में सूरत जिले में यह प्रथम लेप्टोस्पायरोसिस मरीज की मृत्यु का मामला है।

बारिश के सीजन में सूरत समेत दक्षिण गुजरात के विभिन्न जिलों में लेप्टोस्पायरोसिस के मरीज सामने आना शुरू हो जाते है। पिछले कुछ सालों में लेप्टोस्पायरोसिस के केसों में कमी देखी जा रही है। इस साल भी मानसून खत्म होने को है और प्रथम दो लेप्टोस्पायरोसिस केस न्यू सिविल अस्पताल में भर्ती हुए है। सूत्रों ने बताया कि सूरत जिले के पलसाणा तहसील के बारासदी गांव निवासी जगु राठौड़ (45) को दस सितम्बर को और महुआ तहसील के अंगलधरा गांव निवासी 50 वर्षीय व्यक्ति को न्यू सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसमें महुआ निवासी व्यक्ति की इलाज के दौरान 26 अगस्त को मौत हो गई। इसके अलावा तापी जिले में दो केस मिले है। व्यारा खुटडिया गांव निवासी 50 वर्षीय व्यक्ति, सोनगढ़ उखलदा गांव निवासी 28 वर्षीय युवक शामिल है। जबकि वलसाड जिले में वापी वतार क्षेत्र निवासी 51 वर्षीय व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण गुजरात में अब तक पांच मामले सामने आए है जिसमें एक मरीज की मौत हुई है। गौरतलब है कि, सूरत जिले में 2019 में 12 लेप्टोस्पायरोसिस के मरीज सामने आए थे जिसमें एक मरीज की मौत हुई थी। इसी तरह 2018 में 12 मरीज मिले, लेकिन कोई मौत नहीं हुई। 2017 में 28, 2016 में 19, 2015 में 12 केस मिले थे और एक-एक मरीज की मौत हुई थी।

दक्षिण गुजरात में लेप्टो की स्थिति

वर्ष/ मरीज/ मौत

2019- 26 -2
2018- 46 -2
2017- 47 -2
2016- 54 -2
2015- 41 - 0


क्यो है लेप्टो?

दक्षिण गुजरात में बैक्टीरिया से फैलने वाली लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी लम्बे समय से देखने को मिल रही है। घरेलू जानवरों और खासतौर से चूहे के मल-मूत्र से फैलने वाले बैक्टीरिया व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करती है। स्किन पर हल्की चोट या दरार के जरिए इस बीमारी के बैक्ट्रिया शरीर में आते है और स्वस्थ व्यक्ति बीमार हो जाता है। पिछले दस से भी अधिक सालों से स्वास्थ्य विभाग लेप्टो की रोकथाम के लिए कदम उठा रहा है।

लेप्टो के लक्षण

चिकित्सकों ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस के मरीजों में बुखार, सिर दर्द, शरीर दर्द, उल्टी-दस्त, आंखे लाल होना, पीलिया, जोड़ों का दर्द, थकान लगना इस बीमारी के मुख्य लक्षणों में से एक है। पिछले कुछ सालों से लेप्टो के मरीजों में कमी आई है। मानसून शुरू होते ही आशा वर्कर, स्वास्थ्य कर्मचारी घर-घर जाकर बुखार के मरीजों की तलाश करते है और व्यक्ति के बीमार होने पर तुरंत इलाज देकर बीमारी को काबू करने का प्रयास करते है।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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