GANAPATI MAHOTSAV: पांचवें दिन गौरी आएगी, विदाई भी दी जाएगी

घरों में स्थापित पांच दिवसीय प्रतिमाओं का किया जाएगा विसर्जन

By: Dinesh Bhardwaj

Updated: 13 Sep 2021, 08:08 PM IST

सूरत. दस दिवसीय गणपति महोत्सव के पांचवें दिन मंगलवार को परंपरागत तरीके से उत्सव मनाने वाले श्रद्धालु गौरी माता की अगवानी करेंगे और बाद में अगले दिन विदाई देंगे। वहीं, पांच दिन के लिए घरों में स्थापित प्रतिमाओं को भावभीनी विदाई भी मंगलवार को दी जाएगी।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी गणेश चतुर्थी से दस दिवसीय गणपति महोत्सव धूमधाम से शहरभर में मनाया जा रहा है। महोत्सव में मंगलवार को पांचवें दिन परम्परागत तरीके से घरों में स्थापित गणपति प्रतिमाओं की विदाई होगी। वहीं, श्रद्धालु घरों में गौरी प्रतिमा भी लाएंगे और सुपड़ा पूजन के बाद उन्हें अगले दिन बुधवार को विदाई दी जाएगी। महोत्सव के पांचवें दिन मंगलवार को श्रद्धालु सुबह घरों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं की विधिविधान से पूजा-आराधना कर बाद में घर में ही पानी के टब में उन्हें भावभीनी विदाई देंगे।

-हर बार कुछ नए अंदाज में गणपति-

गणपति महोत्सव के अवसर पर कॉफी बीन, नारियल के पत्ते, तरबूज, सूखे मेवे से अनूठी गणेश प्रतिमा बनाकर स्थापित करने वाली डॉ. अदिति मित्तल ने इस बार भी हटकर गणपति प्रतिमा बनाकर डुमस रोड स्थित वीआर मॉल में विधिविधान से स्थापित की है। डॉ. मित्तल ने बताया कि इस बार नारियल फल को गणपति प्रतिमा निर्माण के लिए चुना है ताकि विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप वितरित किया जा सकें। पेशे से डेंटिस्ट व आर्टिस्ट अदिति ने 201 नारियल पर कार्विंग कर सनातन धर्म के प्रतीक चिह्न, देवी-देवताओं की तस्वीरें बनाकर अनूठी गणपति प्रतिमा बनाकर स्थापित की है।

GANAPATI MAHOTSAV: पांचवें दिन गौरी आएगी, विदाई भी दी जाएगी

-श्रीफल में ही गणपति-

उधना स्थित मीरानगर सोसायटी में श्रीफल में विराजमान गणपति की स्थापना गणपति महोत्सव के पहले दिन गणेश चतुर्थी से की गई है। इस संबंध में श्रद्धालु संजय बोथरा ने बताया कि 2010 में गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले हरा नारियल घर में लाया गया था और संजोग से वह गणपति स्वरूप के समान प्रतीत होते थे। तभी से श्रीफल में प्राकृतिक अवस्था में विराजमान गणपति की स्थापना लगातार एडवोकेट देवेंद्र बोकाडिया समेत अन्य मित्रों के सहयोग से की जा रही है। प्रत्येक वर्ष अनंत चतुर्दशी को प्रतिमा का सांकेतिक विसर्जन तापी नदी के जल को छूकर भी किया जाता है।

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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