खुशखबर: बेटी होने पर यह अस्पताल नहीं लेगा डिलीवरी खर्च

समाज में बेटियों की कम होती संख्या चिंता का विषय


Decreasing number of daughters in society is a matter of concern

By: Sunil Mishra

Published: 27 Nov 2019, 10:08 PM IST

वापी. भिलाड़ स्थित श्रीश्रीजी अस्पताल ने बेटी जन्म पर डिलीवरी का खर्च न लेने की घोषणा की है। सरकार द्वारा कन्या जन्म दर में वृद्धि के लिए लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस प्रयास में सहभागी होते हुए भिलाड़ के श्री श्रीजी अस्पताल के संचालक कुमार त्रिवेदी तथा गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. गुलाटी ने इस संबंध में ऐलान किया। बताया गया है कि उमरगाम तहसील और सिलवासा में श्रीश्रीजी के पांच अस्पतालों में प्रसूता को बेटी होने पर डिलीवरी का खर्च नहीं लिया जाएगा। साथ ही बेटी और माता को अस्पताल की ओर से आकर्षक भेंट भी दी जाएगी। अस्पताल के संचालक कुमार त्रिवेदी के अनुसार यह विस्तार पिछड़ा है और आदिवासी बहुल जनता है। इसमें बेटे और बेटी के जन्मदर में असमानता है। समाज में बेटियों की कम होती संख्या सभी के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में अस्पताल ने सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास में अपना सहयोग देने का निर्णय करते हुए यह घोषणा की है।

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आईटी युग में हिसाब के चोपड़े की खरीद में आई कमी
वापी. आधुनिक युग इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी का है। अब लोग पुराने दिनों की तरह रोज का हिसाब किताब पारंपरिक चोपड़े की जगह कंप्यूटर पर करने लगे हैं। इसके कारण चौपड़े की खरीद में करीब 35 प्रतिशत की कमी आई है। अधिकांश व्यापारिक पेढी में पूरा हिसाब अब कंप्यूटर पर ही हो रहा है। जबकि वर्षों पूर्व सभी व्यापारी रोजाना होने वाले आर्थिक लेनदेन को रोजनामा में दर्ज करते थे। हर साल देव दिवाली पर इस चौपड़े की पूजा कर व्यापार धंधे का शुभारंभ भी करते थे। इसमें रोजाना के नकद व्यवहार के उपरांत उधार का भी पूरा ब्यौरा रहता था। वहीं, समय बीतने के साथ चौपड़े में हिसाब लिखने की पुरानी परम्परा भी पीछे छूट रही है। व्यापारिक प्रतिष्ठान कंप्यूटराइज्ड हो रहे हैं। इसका असर देव दिवाली पर भी दिखा और पहले की तरह दुकानों पर इसे लेने के लिए भीड़ नहीं उमड़ी। वापी टाउन विस्तार में स्टेशनरी दुकानदार अनिल भाई के अनुसार पहले जो व्यापारी तीन सौ पेज का रजिस्टर ले जाते थे, वे अब सौ पेज का ले जाने लगे हैं। पहले की अपेक्षा व्यापार में 35 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि कई पुराने व्यापारी आज भी देव दिवाली पर पूजन के लिए चौपड़ा खरीदते हैं। हालांकि ऐसे लोगों की संख्या दिनों दिन कम होती जा रही है।

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