GSEB : भगवती हिन्दी विद्यालय की मान्यता भी रद्द

9वीं के विद्यार्थियों को अन्य स्कूल में प्रवेश लेने का आदेश

प्रभाततारा स्कूल के विद्यार्थियों को लेकर एक महीने बाद भी कोई ठोस फैसला नहीं

By: Divyesh Kumar Sondarva

Published: 10 Apr 2019, 07:36 PM IST

सूरत.

गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने पांडेसरा में बमरोली रोड के भगवती हिन्दी विद्यालय की मान्यता रद्द कर दी है। स्कूल के 9वीं के विद्यार्थियों को अन्य स्कूल में प्रवेश लेने का आदेश दिया गया है।
रांदेर के प्रभाततारा स्कूल का विवाद अब तक नहीं थमा है। इस स्कूल के 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है। इसी बीच पांडेसरा के एक और हिन्दी विद्यालय की मान्यता को रद्द कर दिया गया है। यह विद्यालय बमरोली की तुलसीधाम सोसायटी में प्रभावती एज्युकेशन ट्रस्ट की ओर से संचालित किया जा रहा है। गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूल को गैर-कानूनी बताते हुए इसकी उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं को अमान्य कर दिया है। स्कूल की 9वीं कक्षा में 51 विद्यार्थी हैं। इन सभी को आस-पास के अन्य स्कूलों में प्रवेश लेने का आदेश दिया गया है।
नए शैक्षणिक सत्र 2019-20 से स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई है। यानी नए शैक्षणिक सत्र में कोई विद्यार्थी इस स्कूल में प्रवेश लेगा तो वह अयोग्य माना जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एज्युकेशन इंस्पेक्टर ने बताया कि गुजरात बोर्ड की ओर से भगवती हिन्दी विद्यालय की मान्यता को रद्द करने का आदेश जारी किया गया
है। स्कूल नए शैक्षणिक सत्र से अमान्य है।


महीनेभर पहले प्रभाततारा को लेकर हुआ था हंगामा
पिछले महीने गुजरात बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होने से एक दिन पहले रांदेर की प्रभाततारा स्कूल को लेकर हंगामा शुरू हुआ था। इस स्कूल ने राज्य शिक्षा विभाग के मान्यता मांगी थी, लेकिन स्कूल के निरीक्षण के बाद इसे मान्यता नहीं दी गई। वर्ष 2016 से स्कूल के पास मान्यता नहीं थी। इसके बावजूद स्कूल की ओर से प्रवेश दिए जाने की जानकारी मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने फरवरी में रांदेर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। स्कूल को मान्यता नहीं मिलने पर अदालत में याचिका दायर की गई थी। अदालत ने सरकार के फैसले को मान्य रखा था और स्कूल की याचिका खारिज कर दी थी। गुजरात बोर्ड परीक्षा का हॉल टिकट नहीं मिलने पर प्रभाततारा स्कूल के विद्यार्थियों ने सूरत जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर कब्जा कर लिया था। विद्यार्थियों का कहना था कि स्कूल संचालकों ने उन्हें जल्द मान्यता मिलने का आश्वासन देकर पढ़ाना जारी रखा। बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरने के लिए सभी से 650 रुपए फीस भी ली गई। बाद में पता चला कि गुजरात बोर्ड से उनके हॉल टिकट नहीं आए हंै। कई दिन के हंगामे के बावजूद गुजरात बोर्ड ने इन विद्यार्थियों को हॉल टिकट देने से साफ मना कर दिया था।

Divyesh Kumar Sondarva Reporting
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