सूरत

GUJARAT POLITICAL STORY: भाजपा की सर्वाधिक सुरक्षित लोकसभा सीट, 35 साल से दबदबा बरकरार

– 1989 से लगातार भाजपा के पास है सुरक्षित, 6 बार काशीराम राणा, 5 बार मोरारजी देसाई तो तीन बार दर्शना जरदोष बन चुकी है सांसद
– इस बार सीट पर प्रत्याशी परिवर्तन के भी हैं आसार, मोदी सरकार के किसी मंत्री का भी आ सकता है नाम, जनता का मूड केवल विकास पर ही आधारित

सूरतFeb 25, 2024 / 06:55 pm

Dinesh Bhardwaj

GUJARAT POLITICAL STORY: भाजपा की सर्वाधिक सुरक्षित लोकसभा सीट, 35 साल से दबदबा बरकरार

सूरत. पूरे देश में भाजपा के लिए सर्वाधिक सुरक्षित लोकसभा सीट में सूरत का नाम दर्ज है। गत 35 साल से पार्टी का यहां लगातार दबदबा है और इन बीते इतने वर्षों में सूरत लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व काशीराम राणा और दर्शना जरदोष ने ही किया है। राणा 6 टर्म तो दर्शना 3 बार यहां से सांसद रह चुकी है। सूरत के मतदाताओं का विकास पर अधिक भरोसा है, शायद यहीं वजह है भाजपा के लिए यह सर्वाधिक लोकसभा सीट के तौर पर गिनी जाती है। सूरत लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा की दर्शना जरदोष ने 2014 के आम चुनाव में यहां से कांग्रेस प्रत्याशी नैषध देसाई को 5,33,190 वोटों से पराजित किया था। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की दर्शना ने 7,95,661 वोट हासिल किए जबकि कांग्रेस के अशोक अधेवरा को केवल 2,47,621 ही मत मिले थे। केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में जरदोष को वस्त्र व रेल राज्यमंत्री का जिम्मा भी मिला।
– इतिहास की नजर में सूरत

सूरत मुख्य रूप से कपड़ा उद्योग व डायमंड कटिंग और पोलिशिंग के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए इस शहर को ”सिल्क सिटी” और ”डायमंड सिटी” के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि आधुनिक सूरत शहर की स्थापना पंद्रहवी सदी के आस-पास हुई थी। 1516 में एक हिन्दू ब्राह्मण गोपी ने इसे बसाया था। 12वीं से 15वीं शताब्दी तक यह शहर मुस्लिम शासकों, पुर्तग़ालियों, मुग़लों और मराठों के आक्रमणों का शिकार हुआ। 1514 में पुर्तग़ाली यात्री दुआरते बारबोसा ने सूरत का वर्णन एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह के रूप में किया था। 1800 में अंग्रेज़ों का इस पर अधिकार हो गया, अंग्रेज़ों ने 1612 में पहली बार अपनी व्यापारिक चौकी यहीं पर स्थापित की थी।
– राजनीतिक पृष्ठभूमि भी है मजबूत

साल 1952 के आम चुनाव में यहां पर कांग्रेस को सफलता मिली और उसका राज 1971 तक रहा। सूरत सीट से देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई लगातार 5 बार सांसद चुने गए। साल 1977 में उन्होंने यहां का चुनाव जनता पार्टी के टिकट पर जीता था। 1980 और 1984 का चुनाव कांग्रेस के सीडी पटेल ने जीता और लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद साल 1989 में सूरत सीट पर भाजपा जीती और काशीराम राणा यहां से सांसद चुने गए और तब से लेकर साल 2004 तक लगातार 6 टर्म वो ही इस सीट के सांसद पद पर रहे। साल 2009 से भाजपा नेता दर्शना जरदोष यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचीं और तब से वे लगातार सूरत की सांसद बनी हुई है। लोकसभा चुनावों के दौरान 2014 के चुनाव में सूरत सीट के लिए सबसे अधिक तथा 1999 के चुनाव में सबसे कम मतदान दर्ज हुआ था।
– पैराशूट उम्मीदवार की चर्चा होती हर बार

सूरत लोकसभा सीट भाजपा के लिए सुरक्षित गिनी जाती है और शायद यहीं वजह है कि यहां हर लोकसभा चुनाव में बाहरी उम्मीदवार की चर्चा खूब चलती है। पिछले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वडोदरा सीट के बजाय बनारस के साथ-साथ सूरत सीट से चुनाव लड़ने की बात भी उसी का हिस्सा थी। अब की बार भी यह चर्चा लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही चर्चा में आ गई है और इसमें केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर व मनसुख मांडविया का नाम मुख्य रूप से शामिल है। इनके अलावा चर्चा में प्रत्येक लोकसभा चुनाव में स्थानीय मतलब सुरती और सोराष्ट्रियन नाम जरूर शामिल होते है और फिर बाजी स्थानीय के हाथ लग जाती है।
– विकास ने बदल दी सूरत की शक्ल

पिछले 10 साल में वर्षों पुराने गड्ढे भरे गए है और विकास की नई इबारत लिखी गई है। सूरत की जनता विकास पसन्द है क्योंकि इसमें सभी वर्ग का हित छिपा होता है। सुरती मतदाता विकास पसन्द है और आगे भी रहेंगे।
– डॉ. अंकिता राज्यगुरु, अडाजन

– दूर-दूर तक कोई विकल्प ही नहीं

सूरत की जनता विकास पसन्द है, इसमें कोई दो राय नहीं है। फिर इसके अलावा कोई मजबूत विकल्प भी जनता के सामने पिछले सालों में कभी अन्य पार्टी की ओर से सामने आया भी नहीं है, जिसे जनता पसन्द कर सकें।
जगदीश चंदेल, कोसाड़-भरथाना

– मौजूदा माहौल में बदलाव की गुंजाइश नहीं

आगामी लोकसभा चुनाव 2024 आने वाले है और सभी राजनीतिक दलों की जोर-शोर से तैयारियां भी चल रही है। कांग्रेस नेताओं का झुकाव भाजपा की तरफ बढ़ते देख इस माहौल में सरकार में बदलाव की गुंजाइश नहीं लगती।
-एडवोकेट भगवती चौधरी, रांदेर-अडाजन

– करोड़ों भारतीयों की आस्था फली

बीते दस साल में मोदी सरकार के नेतृत्व में विकास के अनगिनत कार्य देशभर में हुए है। देश पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बना है तो करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक श्रीराम मंदिर भी अब जाकर साकार हुआ है।
– सुनील माहेश्वरी, प्रबंधक, निजी कम्पनी, पालनपुर

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