LAJPORE JAIL : कैदियों का कॉल सेन्टर बनी हाईटेक लाजपोर जेल !


- कोर्ट में धमकी को लेकर की गई शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने चार कैदियों के खिलाफ दर्ज किया मामला
- Based on the complaint made in the court of intimidation, the crime branch filed a case against four inmates.

By: Dinesh M Trivedi

Updated: 03 Mar 2021, 10:01 AM IST

सूरत. मोबाइल फोन समेत प्रतिबंधित वस्तुओं की लगातार बरामदगी के चलते बदनाम गुजरात की कथित हाईटेक लाजपोर सेन्ट्रल जेल अब कैदियों के लिए कॉल सेन्टर बन चुकी है। एक बार फिर यहां से मामला रफादफा करने के लिए यहां बंद कैदी द्वारा पीडि़त पक्ष को लेन्डलाइन व अलग -अलग मोबाइल नम्बर से धमकी देने का मामला सामने आया है।

इतना ही नहीं, तीन अन्य कैदियों द्वारा भी उनके परिजनों से अवैध रूप से बातचीत करने को लेकर क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार हत्या समेत गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में लाजपोर सैन्ट्रल जेल में बंद छगन वाला, इम्तियाज शेख उर्फ मना, बबलू तायडे व गुलाम साबिर कुरैशी अलग-अलग फोन व मोबाइल का इस्तेमाल कर अपने परिजनों से बात करते थे।

वराछा हरिधाम सोसायटी निवासी छगन वाला ने 8 अगस्त 2019 की रात अपने घर में सो रही पत्नी हंसा व उनकी चार संतानों पर तेजाब फेंक दिया था और सबके मोबाइल फोन लेकर फरार हो गया था। एसिड अटैक में हंसा की मौत हो गई थी। जबकि पुत्र भार्गव बेटी प्रवीणा व अल्पा बुरी तरह झुलस गए थे। पुलिस ने उसके पुत्र की प्राथमिकी के आधार पर मामला दर्ज छगन को गिरफ्तार किया था।

LAJPORE JAIL : कैदियों का कॉल सेन्टर बनी हाईटेक लाजपोर जेल !

पिछले कुछ समय छगन जेल में अलग- अलग फोन का उपयोग कर उसकी पुत्री प्रवीणा समेत उनके रिश्तेदारों को फोन कर मामला रफादफा करने के लिए दबाव डाल रहा था। इस बारे में भार्गव को पता चलने पर उसने कोर्ट में शिकायत की। कोर्ट के आदेश पर क्राइम ब्रांच ने मामले की पड़ताल शुरू की तो उन मोबाइल नम्बर की लॉकेशन लाजपोर सैन्ट्रल जेल में मिली।

अलग अलग मोबाइल नम्बर की कॉल डिटेल से सचिन थाने में दर्ज हत्या के मामले में लाजपोर जेल में बंद बबलू तायड़े द्वारा उसके भाई केतन से बातचीत करने का मामला भी सामने आया। इसी तरह से पुणगाम थाने में ड्रग्स तस्करी के मामले में पकड़े गए इम्तियाज मना द्वारा उसकी पत्नी रब्बाना बानू व बहनोई रशीद से बातचीत की जाती थी।

एक सिमकार्ड की जांच में पता चला कि सिमकार्ड उन जलाराम झोपड़पट्टी निवासी फिरोजा बानू मकराणी के नाम पर खरीदा गया था, जो उसने अपने भाई ढिंगली फलिया निवासी गुलाम साबिर कुरैशी को इस्तेमाल करने के लिए दिया था। बाद में साबिर ड्रग्स तस्करी के मामले में पकड़ा गया था। वह जेल से उसी सिम का का इस्तेमाल कर रहा था।

गौरतलब है कि साबिर के जेल जाने के बाद उसका ड्रग्स का कारोबार फिर से शुरू करने वाले उसके भाई समीर व उसकी साली को एसओजी ने दो दिन पूर्व ही गिरफ्तार किया था। प्राथमिक पड़ताल में इन सब बातों का खुलासा होने पर क्राइम ब्रांच ने मंगलवार देर रात चारों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


जेल प्रशासन की संदिग्ध भूमिका :

यदि पुलिस गहराई से मामले की जांच करे तो जेल प्रशासन की संदिग्ध भूमिका का खुलासा हो सकता है। इससे पहले भी लाजपोर जेल में मोबाइल फोन का उपयोग करने और पीडि़तों को मामला रफदफा करने के लिए जेल में से धमकी देने के मामले आ चुके हैं। इस तरह एक पीडि़त को धमकी मिलने पर क्राइम ब्रांच ने जेल पर अचानक छापा मारा था। तलाशी में कई सिमकार्ड व मोबाइल बरामद हुए थे।

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Dinesh M Trivedi Reporting
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