सर्वे में पिछड़े, फिर भी कचरे को ठिकाने तक पहुंचाने में लापरवाही जस की तस

स्वच्छता सर्वे में शहर के चौथे से १४वें नंबर पर खिसकने के बावजूद मनपा प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है। हालात खुद बयां कर...

By: मुकेश शर्मा

Published: 20 Jul 2018, 11:18 PM IST

सूरत।स्वच्छता सर्वे में शहर के चौथे से १४वें नंबर पर खिसकने के बावजूद मनपा प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है। हालात खुद बयां कर रहे हैं कि पिछले मनपा बोर्ड में कांग्रेस का यह बयान गलत नहीं था कि सर्वे टीम सही जगह पहुंची होती तो सूरत २८वें नंबर पर होता। जिस तरह से डोर टु डोर गार्बेज और डंपिंग साइट तक पहुंचाए जा रहे कचरे में लापरवाही बरती जा रही है, वह भविष्य की भयावह तस्वीर सामने रखती है।

केंद्र के शहरी विकास मंत्रालय की टीम ने पिछले साल सूरत समेत देशभर में स्वच्छता सर्वे किया था। सर्वे टीम की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार सूरत स्वच्छता सर्वेक्षण में बीते वर्ष के चौथे नंबर से पिछडक़र दस पायदान नीचे आकर १४वें स्थान पर रह गया। बीती सामान्य सभा में विपक्ष के पार्षद असलम साइकिलवाला ने सत्तापक्ष की दुखती रग पर हाथ रख दिया था। असलम ने कहा था कि सत्तापक्ष और अधिकारियों की चिन्हित जगहों पर गई टीम ने शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में १४वें स्थान पर रखा। यदि कांग्रेस पार्षद उन्हें शहर दिखाने ले गए होते तो शहर में सफाई के जो हालात हैं, उनसे सूरत २८वें स्थान पर होता।
मनपा का डोर टु डोर गार्बेज कलेक्शन सिस्टम खुद ही कांग्रेस पार्षद के बयान की असलियत पर मुहर लगा रहा है।


शहर में घर-घर जाकर जिस तरह से कचरा उठाया जाता है और कचरा गाडिय़ों पर पन्नियों में लटक रहा कचरा सडक़ पर फैलता हुआ जाता है, वह स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखा रहा है। डंपिंग साइट पर कचरा पहुंचाने में भी अधिकारियों की लापरवाही खुलकर सामने आ रही है। नदी पुलों पर तो कचरा विजय पताका फहराता दिखता है। जानकारों के मुताबिक मनपा प्रशासन ने स्वच्छता सर्वेक्षण में १४वें नंबर पर खिसकने के बावजूद कोई सबक नहीं लिया है। यदि मनपा प्रशासन को स्वच्छता अभियान पर काम करना है तो सबसे पहले कचरा गाडिय़ों की व्यवस्था सुधारनी होगी।


मानसून में होती है दिक्कत


मानसून के दौरान बारिश के बीच जब कचरा गिरकर नीचे गिरता है तो पीछे आ रहे लोगों के लिए परेशानी की वजह बनता है। कचरा सडक़ों पर गिरने से बारिश के दौरान फिसलन हो जाती है और दुपहिया वाहनों के स्लिप होने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसके अलावा सुबह के समय जब लोग दफ्तरों का रुख करते हैं तो आगे जा रही खुली कचरा गाड़ी का भीगा कचरा उनके उजले कपड़ों पर अपनी मुहर लगा देता है। मजबूरन लोगों को दोबारा घर लौटकर ड्रेस बदलनी पड़ती है। लोगों का आरोप है कि बीते कई वर्ष से मनपा प्रशासन को शिकायत के बावजूद कचरा गाडिय़ों की व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया है।

 

मुकेश शर्मा Reporting
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