म्युच्युअल फंड में निवेश बढ़ा रहे हैं कारोबारी

नोटबंदी और जीएसटी के बाद कई कारोबारियों के लिए व्यापार करना कठिन हो रहा है। शेयर बाजार और म्युच्युअल फंड में अच्छी ग्रोथ के कारण वह इसमें निवेश करने म

By: मुकेश शर्मा

Published: 20 Jan 2018, 09:33 PM IST

सूरत।नोटबंदी और जीएसटी के बाद कई कारोबारियों के लिए व्यापार करना कठिन हो रहा है। शेयर बाजार और म्युच्युअल फंड में अच्छी ग्रोथ के कारण वह इसमें निवेश करने में रुचि दिखा रहे हैं। सूरत के कपड़ा और हीरा कारोबारी भी इनमें शामिल हैं।

सुरक्षित निवेश के लिए म्युच्युअल फंड अच्छा विकल्प माना जाता है। नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद सूरत के कारोबारी इसे पसंद कर रहे हैं। वर्ष 2016 के बाद से ही सूरत के कपड़ा उद्यमियों के लिए मुसीबत शुरू हो गई थी, जो जीएसटी लगने के बाद और बढ़ गई। असंगठित होने और अब तक इस पर कोई टैक्स नहीं होने के कारण कपड़ा कारोबार में बड़े पैमाने पर नकद में व्यवहार होता था। जीएसटी के बाद सब कुछ चेन में आने से व्यापार पर असर पड़ा है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि व्यापार पचास प्रतिशत से भी कम हो गया है। कपड़ा बाजार में मंदी, रियल एस्टेट और सोने के निवेश में भी कुछ हासिल नहीं होता देख व्यापारी अब म्युच्युअल फंड में निवेश बढ़ा रहे हैं।

शेयर बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार जीएसटी से पीडि़त कपड़ा और हीरा व्यापारियों ने पिछले छह महीनों में निवेश बढ़ाया है। एक आंकड़े के अनुसार देशभर में अक्टूबर-२०16 में 16 लाख करोड़ का निवेश म्युच्युअल फंड में था, जो दिसम्बर-२०17 में बढक़र 23 लाख करोड़ पहुंच गया। जनवरी २०17 से नवंबर-२०17 तक म्युच्युअल फंड में 4 लाख, 8 हजार, करोड़़ रुपए का निवेश किया गया था, जिसमें 3 लाख, 83 हजार करोड़ का निवेश सिर्फ जुलाई से दिसंबर के बीच हुआ, जो जीएसटी लगने का समय था। कई कारोबारियों के पास निवेश का अन्य सुरक्षित विकल्प नहीं होने से उन्हें यह विकल्प पसंद करना पड़ा। म्युच्युअल फंड में निवेश करने का एक कारण और है। बैंक में बचत खाते में सिर्फ साढ़े तीन प्रतिशत ब्याज मिलता है, जबकि लिक्विड फंड में निवेश कर तीन दिन में भी रुपए निकाल सकते हैं और उसमें बचत खाते से ज्यादा रिटर्न है।

कई व्यापारियों ने इस फंड में निवेश किया है। इसके अलावा बैलेन्स फंड और डाइवर्सी इक्विटी फंड में भी निवेश बढ़ा है। कई व्यापारी सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के माध्यम से निवेश बढ़ा रहे हैं। जनवरी में इसके माध्यम से 4000 करोड़ रुपए शेयर मार्केट में जाते थे। यह आंकड़ा अब बढक़र 6000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसके कारण कपड़ा बाजार में नया निवेश नहीं आ रहा है।


बिटकॉइन में निवेश बढ़ा

व्यापार में नुकसान के बाद कई व्यापारियों ने धड़ल्ले से नुकसान की भरपाई करने और लाभ कमाने के लिए बिटकॉइन में निवेश किया है। सूरत के साथ जुड़े अन्य राज्यों के व्यापारी भी इसमें निवेश कर रहे हैं। इससे सूरत के व्यापारियों के रुपए फंस गए हैं।


जीएसटी के बाद कपड़ा व्यापारी और हीरा कारोबारियों का रियल एस्टेट और गोल्ड इन्वेस्टमेंट से मोह भंग हुआ है। वह म्युच्युअल फंड में निवेश बढ़ा रहे हैं।
केयूर मेहता, चेयरमैन, मेहता फिनकोन

इन दिनों बाजार में मंदी का एक कारण बिटकॉइन में निवेश बढऩा भी है। कई व्यापारी अपने धंधे के रुपए बिटकॉइन में निवेश कर रहे हैं। इसका असर भी पड़ा है।राकेश कंसल, यार्न व्यवसायी

मुकेश शर्मा Reporting
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