जानिए किस संघ प्रदेश में मच्छरों से लोग परेशान

दादरा नगर हवेली का सरकारी तंत्र मच्छर नियंत्रण में विफल

By: Sunil Mishra

Published: 04 Apr 2019, 07:32 PM IST

 


सिलवासा. स्वच्छता अभियान के बावजूद लोग मच्छरों से परेशान हैं। मच्छरों से निपटने के लिए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग के सारे प्रयास विफल हो रहे हैं। गर्मी में लोग पसीने की चिपचिपाहट के साथ मच्छरों ने जीना मुश्किल कर रखा है। मच्छर इस कदर बढ़ गए हैं कि लोगों को घरों के दरवाजे एवं खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं। अब इन पर मच्छरनियंत्रक दवाओंं का भी असर नहीं होता है। सिलवासा, आमली, दादरा, नरोली, मसाट, रखोली, खानवेल सहित लगभग सभी आबादी क्षेत्रों में लोग मच्छरों से परेशान है।

गटर एवं नालियों की नहीं होती सफाई
मच्छरों की उत्पत्ति का मुख्य कारण गटर में दूषित जल का एकत्र होना है। निकास के अभाव में गटर की नालियां दूषित जल से अटी हैं। नालियों का दूषित पानी मच्छरों की उत्पत्ति केन्द्र बन गया है। गटर और नालियों की समय पर सफाई नहीं होती है और उनका निकास नदी नालों में किया गया है। नगर परिषद के स्वास्थ्य अधिकारी एवं एनवीडीसीपी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एस कुमार का कहना है कि शहर में सफाई के प्रति लोगों की जागृति बढ़ी है, फिर भी मच्छर ज्यादा हैं। वार्डो में सूखा व गीला कचरा अलग-अलग प्रबंधन की व्यवस्था की गई हैं। कचरा ढोने वाली गाडिय़ां घरों से सूखा व गीला कचरा अलग-अलग उठाती हैं। मच्छरों के नाश के लिए आसपास गंदे पानी का संग्रहण नहीं होना चाहिए। बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें।
डॉ. कुमार ने बताया कि मच्छर पसीना एवं कार्बन डाइऑक्साइड सूंघकर मनुष्य को काटते हैं। केवल मादा मच्छर ही खून चूसती है, वहीं, नर मच्छर शाकाहारी होते हैं। मादा मच्छर एक साथ 300 अंडे दे सकती है। अपने जीवन चक्र में 500 अंडे पैदा कर सकती है। मच्छर नीले रंग की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। दानह में मच्छरों में क्यूलेक्स, एनाफिलीज, एडीस आदि प्रजातियां पाई जाती हंै।

 

Sunil Mishra
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