लेडी पैडमैन दे रही महिलाओं को सुरक्षा

काजल की पहल से भागी हुई लड़कियां जुटा रहीं भरोसा, बच्चों को बांट रहीं कॉपियां

By: विनीत शर्मा

Updated: 08 Mar 2020, 05:08 PM IST

विनीत शर्मा

सूरत. करीब दो वर्ष पूर्व अक्षय कुमार की एक फिल्म आई थी पैडमैन। इसकी थीम महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अहम सेनेटरी नेपकिन के प्रति जागरुकता फैलाना था। सूरत की लेडी पैडमैन बीते करीब तीन वर्ष से महिलाओं को सेनेटरी नेपकिन देकर महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही हैं। हम बात कर रहे हैं काजल त्रिवेदी की।

काजल त्रिवेदी डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक टेलिकॉम सेक्टर में शीर्ष पदों पर रहीं। बीते एक दशक से ज्यादा समय उन्होंने टाटा समूह के साथ बिताया। काजल बताती हैं कि लोगों की सेवा का सूत्र उन्हें टाटा फाउंडेशन से मिला। करीब तीन वर्ष पहले अच्छी भली नौकरी छोड़कर उन्होंने एनजीओ खोला और महिलाओं को आत्मनिर्भर करने के साथ ही उनमें सेनेटरी नेपकिन के प्रति जागरूक करने की मुहिम शुरू की। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए काजल ने बताया कि पहली बार महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए सेमिनार किया तो महज तीन महिलाएं ही आई थीं।

काजल बताती हैं कि तीन साल में यह बदलाव आया कि आज लोग खुद संपर्क कर इस तरह के सेमिनार के लिए बुलाते हैं। काजल ने बताया कि महिलाओं को सेनेटरी नेपकिन देने से पहले उसके डिस्पोजल का तरीका उन्हें समझाया जाता है। एनजीओ से होने वाली आय काजल महिलाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर देती हैं। काजल स्कूलों से बच्चों की जरूरत की जानकारी हासिल कर उन्हें कॉपियों का वितरण करती हैं। काजल कहती हैं कि स्वास्थ्य और शिक्षा देश के विकास की रीढ़ हैं। इसके प्रति सभी को आगे आना चाहिए।

इस तरह आया बदलाव

करीब तीन वर्ष पूर्व एक संस्था के साथ डेडियापाडा गई थीं। उस वक्त उन्होंने महसूस किया कि महिलाओं को सेनेटरी नेपकिन के प्रति जागरूक किया जाए। संस्था के पदाधिकारियों ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। इसके बाद वे पति के साथ दोबारा डेडियापाडा गईं और महिलाओं को सेनेटरी नेपकिन वितरित किए। उसके बाद से ही उन्होंने इसे अपनी मुहिम का हिस्सा बना लिया और नौकरी छोड़कर महिला सुरक्षा के लिए खुद को समर्पित कर दिया।

भागी लड़कियों को देती हैं हौसला

काजल महिला सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा के साथ ही घर से भागी हुई लड़कियों व परिजनों की काउंसलिंग भी करती हैं। उन्होंने बताया कि करीब दर्जनभर मामलों में भागी हुई लड़कियों को जिंदगी की दूसरी पारी हौसले के साथ जीने की जज्बा दिया है।

विनीत शर्मा Reporting
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