कैश पैमेंट पर डिस्काउंट के लैटर वायरल

मिल संचालकों ने वक्त के साथ बदली व्यापार की नीति, जॉबवर्क के भुगतान की मियाद बढ़ाई

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 02 Jul 2020, 09:13 PM IST

सूरत. कोरोना से उपजे संकटकाल के दौरान कपड़ा कारोबार में लगातार बदलाव देखे जा रहे हैं। अनलॉक-1.0 की शुरुआत में बनाए गए कड़े व्यापारिक नियम अब धीरे-धीरे लचीले व व्यापार अनुकूल होते जा रहे हैं। ऐसे नए नियमों के लैटर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। बताते हैं कि मिल संचालकों ने व्यापारियों के सहयोग से ऐसे निर्णय किए हैं।
कोरोना महामारी से बचाव के लिए सरकार ने 22 मार्च को जनता कफ्र्यू लगाया था और उसके बाद 25 मार्च से लगातार 31 मई तक लॉकडाउन रहा। इस अवधि में कपड़ा बाजार पूरी तरह से बंद रहा, हालांकि औद्योगिक क्षेत्र व कम भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को प्रशासन ने एक मई से खोल दिया था पर वहां व्यापारिक चहल-पहल का अभाव ही दिखा। वहीं, केंद्र सरकार ने 68 दिन के लॉकडाउन के बाद एक जून से अनलॉक-1.0 की शुरुआत की और इसमें रिंगरोड कपड़ा बाजार भी 13 टैक्सटाइल मार्केट को छोड़ पूरा खुला। कपड़ा बाजार खुलते ही मामूली व्यापारिक चहल-पहल कपड़ा उद्योग में दिखने भी लगी और इसी दौरान साउथ गुजरात टैक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने नए व्यापारिक नियम बनाए। इन पर कपड़ा व्यापारियों के संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई और कोरोना से उपजे संकटकाल में व्यापार के दौरान नरम व लचीलेपन व्यवहार की अपेक्षा रखी। इस सिलसिले में बैठकें भी आयोजित की गई जिनमें प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने सकारात्मक तरीके से व्यापार नीति अपनाने की प्रतिबद्धता बताई।


कपड़ा बाजार में खूब रही चर्चा


सचिन, पांडेसरा, कतारगांव क्षेत्र की डाइंग-प्रोसेसिंग यूनिटों के केश पैमेंट पर डिस्काउंट वाले लैटर गुरुवार को तुरत-फुरत में ही सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल होकर कपड़ा बाजार में व्यापारियों के बीच चर्चा का कारण बन गए। कई व्यापारियों ने वायरल लैटर के बारे में पुख्ता जानकारी भी संबंधित मिल संचालकों से हासिल की। इस संबंध में व्यापारियों ने बताया कि कपड़ा कारोबार आपसी समझ और व्यापारिक व्यवहार के बूते चलता है, इसमें समय-समय पर लचीलेपन की भी जरूरत पड़ती है।


वायरल लैटर के आकर्षण


कपड़ा बाजार में वायरल लैटर में तीन अहम बिन्दू शामिल है और वे पुराने व्यापारिक नियमों से बिल्कुल हटकर है।
1- सात दिन की अवधि में भुगतान करने की स्थिति पर 3 प्रतिशत डिस्काउंट दिया जाएगा।
2- एक जुलाई 2020 से डिलीवर होने वाले माल के लिए भुगतान की अवधि 60 दिन की रहेगी। 60 दिन में भुगतान होने की स्थिति पर किसी तरह का डिस्काउंट नहीं दिया जाएगा।
3- यदि किसी कारणवश 60 दिन तक भुगतान नहीं हो पाता है तो 61वें दिन से डेढ़ टका ब्याज देना रहेगा।


व्यापारिक समझ पर निर्भर


वायरल लैटर देखे हैं और यह कपड़ा कारोबार में आपसी व्यापारिक समझ पर निर्भर है जो कहीं से गलत भी नहीं है। कपड़ा व्यापारी मिल संचालकों से इसी तरह की उम्मीद कोरोना से उपजे संकटकाल में रख रहे थे।
मनोज अग्रवाल, अध्यक्ष, फैडरेशन ऑफ सूरत टैक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन


एक-दूसरे के पूरक हैं हम


कपड़ा व्यापारी व मिल संचालक कपड़ा कारोबार में पूरी तरह से एक-दूसरे के पूरक है और दोनों कपड़ा उद्योग व एक-दूसरे की स्थिति को समझकर ही आगे बढ़ते हैं। एसोसिएशन ने भी कोरोना से उपजे संकटकाल में कपड़ा व्यापारियों का साथ दिया।
जीतू वखारिया, अध्यक्ष, साउथ गुजरात टैक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन


उनसे बस यहीं कहना था


अनलॉक-1.0 में कपड़ा कारोबार शुरू होते ही प्रोसेसर्स एसोसिएसन के व्यापारिक नियम वक्त के मुताबिक थोड़े जटिल महसूस किए गए थे। बाद में बैठकों में उनके समक्ष नियमों में सरलता की मांग रखी गई, जो सबके सामने है।
सांवरप्रसाद बुधिया, अध्यक्ष, साउथ गुजरात टैक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन

Dinesh Bhardwaj Reporting
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