स्मीमेर में लिफ्ट चौथी मंजिल पर अटकी, दो गर्भवती महिलाएं समेत छह जने फंसे

महानगर पालिका संचालित स्मीमेर अस्पताल में रविवार रात एक लिफ्ट चौथी मंजिल पर अटक गई, जिससे दो गर्भवती महिलाओं और १०८ एम्बुलेंस कर्मचारी समेत छह जने एक घंटे तक फंसे रहे। दो एम्बुलेंस कर्मचारियों ने लिफ्ट को चालू करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में दमकल विभाग के जवानों ने दरवाजा तोडक़र सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

By: मुकेश शर्मा

Published: 18 Dec 2018, 10:25 PM IST

सूरत।महानगर पालिका संचालित स्मीमेर अस्पताल में रविवार रात एक लिफ्ट चौथी मंजिल पर अटक गई, जिससे दो गर्भवती महिलाओं और १०८ एम्बुलेंस कर्मचारी समेत छह जने एक घंटे तक फंसे रहे। दो एम्बुलेंस कर्मचारियों ने लिफ्ट को चालू करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में दमकल विभाग के जवानों ने दरवाजा तोडक़र सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

दमकल विभाग के अनुसार स्मीमेर अस्पताल में लिफ्ट संख्या पांच रविवार रात अचानक चौथी मंजिल पर बीच में अटक गई। गंगाधरा हरिओम पार्क निवासी गर्भवती महिला मनीषा नारायण प्रजापति (२५) और वर्षा दीपक शर्मा (१७) के साथ १०८ एम्बुलेंस के दो कर्मचारी और दो रिश्तेदार लिफ्ट में थे। लिफ्ट अचानक बंद होने से मनीषा तथा वर्षा घबराने लगीं। मनीषा का दर्द बढऩे लगा। १०८ एम्बुलेंस के कर्मचारियों ने लिफ्ट चालू कर दरवाजा खोलने का प्रयास किया, लेकिन लिफ्ट शुरू नहीं हुई। एम्बुलेंस कर्मचारियों ने रात १२.४८ बजे दमकल विभाग को सूचना दी। सब ऑफिसर कृष्णा मोढ़ दमकल जवानों के साथ अस्पताल पहुंचे। उन्होंने चौथी मंजिल पर लिफ्ट की जांच की। लिफ्ट के पैसेज के पास एक कमरे का दरवाजा दिखाई दिया। मोढ़ ने दमकल जवानों को दरवाजा तोडऩे के निर्देश दिए।

इसके बाद दोनों गर्भवती महिलाओं, परिजनों तथा १०८ एम्बुलेंस कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। मनीषा ने बताया कि करीब एक घंटे तक वह लोग लिफ्ट में फंसे रहे। मोढ़ ने बताया कि चौथी मंजिल पर जिस दरवाजे को तोड़ा गया, वह बंद कमरे का था। काफी अंधेरा होने के कारण दमकल जवानों को थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन मरीजों को तुरंत बाहर निकालने के लिए दरवाजा तोडऩे के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था।

लिफ्टमैन नहीं होने से परेशानी

स्मीमेर अस्पताल में लिफ्ट संख्या पांच को कॉन्ट्रेक्ट पर संचालन के लिए निजी व्यक्ति को दिया गया है। लिफ्टमैन की व्यवस्था रामभरोसे चल रही है। पहले इस लिफ्ट को अलग-अलग वार्ड ब्वॉय ऑपरेट करते थे। तीन महीने पहले लिफ्टमैन की नियुक्ति की गई, लेकिन लिफ्टमैन की सुविधा मरीजों या परिजनों को सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक ही मिलती है। इसके बाद लिफ्ट का संचालन खुद करना होता है। रविवार रात की घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने इस तरह की लापरवाही की जवाबदारी अब तक तय नहीं की है।

अस्पताल प्रशासन को खबर ही नहीं

स्मीमेर अस्पताल की लिफ्ट में छह जनों के फंसने की घटना से अस्पताल प्रशासन सुबह तक अनजान था। १०८ एम्बुलेंस कर्मचारियों ने सबसे पहले दमकल विभाग को मदद के लिए बुलाया। दमकल अधिकारियों ने आधे घंटे में रेस्क्यू कार्य पूरा कर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। एम्बुलेंस कर्मचारी मरीजों को वार्ड में छोड़ कर लौट गए। मीडिया में दमकल विभाग से जानकारी सामने आने के बाद जब अस्पताल प्रशासन से पूछा गया तो घटना के बारे में किसी को कुछ पता नहीं था।


गर्भवती महिलाओं की हालत बिगड़ी

मनीषा ने सोमवार सुबह पांच बजे पुत्र को जन्म दिया, जबकि वर्षा वार्ड में प्राथमिक उपचार के बाद घर लौट गई। मनीषा ने बताया कि लिफ्ट शटर वाली होने के कारण पूरी तरह पैक थी। इसके कारण उसे तथा लिफ्ट के अंदर फंसे अन्य लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। एम्बुलेंस कर्मचारियों ने बीस-पच्चीस मिनट तक लिफ्ट शुरू करने का प्रयास किया। लिफ्ट के अंदर से लोगों को मदद के लिए पुकारा, लेकिन रात होने के कारण लिफ्ट जहां फंसी थी, उसके आसपास कोई मौजूद नहीं था।

मुकेश शर्मा Reporting
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