अधीक्षक अभियंता कार्यालय में जड़ा ताला

नर्मदा बांध विस्थापितों ने अधिकारियों और कर्मचारियों को किया कैद

विस्थापितों ने खोया धैर्य : पिछले ३५ वर्षों से करते आ रहे आंदोलन के बाद भी कार्रवाई नहीं

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 18 Dec 2018, 09:24 PM IST

नर्मदा.

सरदार सरोवर नर्मदा बांध के विस्थापितों की ओर से पिछले 35 वर्षों से अपनी मांग को लेकर आंदोलन करते आ रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से विस्थापितों ने अपना धैर्य खो दिया है। सोमवार को विस्थापितों ने केवडिय़ा स्थित अधीक्षक अभियंता और पुर्नवास कार्यालय में ताला जड़ दिया।

 

विस्थापितों ने बांध के अधीक्षक अभियंता और कर्मचारियों को कार्यालय में ही कैद कर दिया। सरकार की ओर से बार-बार झूठे वादे कर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाकर विस्थापितों ने कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर केवडिय़ा पुलिस आ पहुंची और लगाए गए ताले को खुलवाकर अधिकारियों और कर्मचारियों को बाहर निकाला।

 

विस्थापितों के मुद्दे पर स्थानीय अधिकारियों ने वड़ोदरा स्थित अपने कार्यालय को भी सूचना दी गई थी, वहीं वड़ोदरा कार्यालय से इस मुद्दे पर कुछ भी हस्तक्षेप करने से साफ मना कर दिया गया। नर्मदा नदी पर बांध के निर्माण के बाद केवडिय़ा और आसपास स्थित १९ गांव डूब क्षेत्र में चले गए। इन गांवों के लोगों को अलग-अलग स्थानों पर कॉलोनी बनाकर दोबारा बसा दिया गया। पुर्नवास के समय इन लोगों को नौकरी तथा अन्य सरकारी लाभ देने का वचन सरकार ने दिया था, लेकिन आज तक इन लोगों को घोषित किया गया एक भी लाभ नहीं दिया गया।

 

प्रभावित लोगों की कालोनियों में पानी, बिजली, रास्ता सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने, खेती की जमीन, कट ऑफ डेट के हिसाब से नौकरी की मांग पिछले ३५ वर्षों से की जा रही है। हर बार सरकार की ओर से प्रतिनिधि मंडल भेजकर मांगों को पूरा कर लिया जाएगा। ऐसा आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन बाद में कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से प्रभावितों में काफी ज्यादा नाराजगी देखने को मिल रही है।

 

सरकार की आंख खोलने के लिए सोमवार को ५० से ज्यादा प्रभावितों ने केवडिय़ा में नर्मदा पुर्नवास और अधीक्षक अभियंता के कार्यालय पर हल्ला बोल दिया। लोगों ने दोनों कार्यालयों में बाहर से ताला जड़ दिया। इस दौरान कार्यालय में नर्मदा बांध के अधीक्षक अभियंता राजेन्द्र कानूगा सहित २१ से ज्यादा कर्मचारी उपस्थित थे। ५० से ज्यादा लोगों की भीड़ ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

 

घटना की जानकारी मिलते ही एसीपी अचल त्यागी पुलिस बल के साथ मौके पर वपहुंचे। पुलिस के समझाने के बाद प्रभावितों ने ताला खोला और प्रभावितों के साथ अधीक्षक अभियंता की बैठक कराई। शाम पांच बजे वड़ोदरा से उच्च अधिकारियों के आने की बात कही गई, लेकिन देर शाम तक कोई भी वरिष्ठ अधिकारी केवडिय़ा नहीं आया था।

 


आंदोलन के बाद भी सरकार को चिंता नही

प्रभावितों के अग्रणी जीकू तडवी ने कहा कि हमारी जमीनों को लेकर सरकार ने लोगों को सडक़ पर घूमने के लिए बाध्य कर दिया है। लंबित मांगों के सरकार की ओर से पूरा नहीं किए जाने से लोगों ने स्टेच्यू आने वाले पर्यटकों को भी रोका था, साथ-साथ केनाल का गेट बंद करने सहित कई आंदोलन किया था।

 

बार-बार आंदोलन के बावजूद भी सरकार के पेट का पानी नहीं हिल रहा है। तीन माह पहले विस्थापितों के लिए सरकार ने पैकेज की घोषणा की थी, वहीं आज तक कोई लाभ नहीं मिलने पर विवश होकर कार्यालय में तालाबंदी करनी पड़ी।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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