छोटे व्यापारियों को माल नहीं भेज पाने से करोड़ों रुपए का नुकसान

कपड़ा व्यापारी जीएसटी के जाल में उलझे हैं। वह एक नियम समझते हैं तो दूसरा नियम उलझन खड़ी कर देता है। आने वाले दिनों में त्योहारों के कारण अन्य राज्यों

By: मुकेश शर्मा

Published: 18 Aug 2017, 10:20 PM IST

सूरत।कपड़ा व्यापारी जीएसटी के जाल में उलझे हैं। वह एक नियम समझते हैं तो दूसरा नियम उलझन खड़ी कर देता है। आने वाले दिनों में त्योहारों के कारण अन्य राज्यों से व्यापारी ऑर्डर दे रहे हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि जिन व्यापारियों का टर्नओवर 20 लाख रुपए से कम है, उनके पास जीएसटी नंबर नहीं होने से कई ट्रांसपोर्टर उनके ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। इससे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि पहले मार्केट बंद रहने के कारण हजारों करोड़ का नुकसान हुआ, अब नियम के मकडज़ाल में व्यापार चौपट हो रहा है। आने वाले दिनों में दुर्गापूजा, नवरात्रि, दिवाली सहित कई राज्यों में स्थानीय त्योहारों के कारण व्यापारियों की ओर से साड़ी और ड्रेस मटीरियल्स की खरीद की जा रही है। सभी राज्यों से व्यापारियों को ऑर्डर मिल रहे हैं, लेकिन छोटे व्यापारियों के ऑर्डर से यहां के व्यापारियों को हाथ धोना पड़ रहा है, क्योंकि यहां के व्यापारी ऑर्डर के अनुसार बिल बनाकर फॉर्म नंबर 402, 403 पर पूरी जानकारी भरकर ट्रांसपोर्टर को पार्सल भेजते हैं तो वहां दूसरे व्यापारी का जीएसटी नंबर भी मांगा जाता है।

यह नहीं होने पर ऑर्डर लेने से इनकार कर दिया जाता है। व्यापारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्टर्स को नियम की जानकारी नहीं होने से वह हठ कर रहे हैं। यहां के व्यापारी बिल की रकम लेकर चुकता का बिल भेजते हैं तो उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। ट्रांसपोर्टर्स की नादानी से व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।

ट्रांसपोर्टर गलत

& सीजीएसटी के नियम के अनुसार यदि ट्रांसपोर्टर की सेवा पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म से भुगतान हो रहा है तो उसे जीएसटी की आवश्यकता नहीं है। यदि सेवा के बदले में बिल चुकाने वाली पार्टी रजिस्टर्ड है तो जीएसटी का भुगतान रिवर्स चार्ज पद्धति से होगा। इस नियम के कारण कई ट्रांसपोर्टर रजिस्टर्ड व्यापारियों के ही ऑर्डर ले रहे हैं।

वह गलत हैं। उन्हें सिर्फ इस सेवा का भुगतान करने वाले का ही नंबर मांगना चाहिए, क्योंकि वही रिवर्स चार्ज भरने के लिए जिम्मेदार है। यदि सूरत का व्यापारी बिक्रीकर्ता है और अपना जीएसटी नंबर देता है, ट्रांसपोर्ट का खर्च उठाता है तो ट्रांसपोर्टर को जीएसटी नहीं चुकाना पड़ेगा। उन्हें रजिस्ट्रेशन भी नहीं लेना होगा। नीरज बजाज, सीए

परेशान हंै व्यापारी

& कई ट्रांसपोर्टर छोटे व्यापारियों के ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। वह उनका भी जीएसटी नंबर मांग रहे हैं। हम उन्हें बिल पर अपना जीएसटी नंबर और फॉर्म 402, 403 दे रहे हैं। साथ ही चुकता रकम का बिल दे रहे हैं, फिर भी वह माल स्वीकारने से इनकार कर रहे हैं। हरीश लालवाणी, व्यापारी

मुकेश शर्मा Reporting
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